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बिहारः 'फैमिली इलेक्शन' बना विधानसभा चुनाव

Thu, 24 Sep 2015 01:24 PM IST
Updated Thu, 24 Sep 2015 01:24 PM IST
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bihar assembly election 2015, parties gave ticket to relatives

बिहार चुनाव पूरी तरह परिवारवाद के बीच सिमटकर रह गया है। टिकटों की घोषणा करते समय सभी पार्टियों ने बेटों-बेटियों के साथ-साथ रिश्तेदारों का पूरा ख्याल रखा तो कर्मठ कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया।

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वशंवाद की यह झलक भाजपा जैसी पार्टियों में भी देखने को मिली जो भाई भतीजावाद को लेकर दूसरी पार्टियों पर निशाना साधती रही है। आलम ये है कि सभी पार्टियों ने अपनों को जमकर रेवड़ियां बांटी। नतीजतन, अब हर दल में सिर फुटौव्वल की स्थिति है। आइए एक निगाह डालते हैं सभी दलों में रिश्तेदारों को दिए गए टिकट पर।
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लालू ने दोनों बेटों को दिया टिकट
चारा घोटाले में फंसने के कारण राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव खुद तो चुनाव नहीं लड़ सके लेकिन उन्होंने अपने दोनों बेटों को जरूर चुनावी मैदान में उतार दिया है। बड़े बेटे तेज प्रताप को महुआ सीट से तो छोटे बेटे तेजस्वी को अपनी पंपरागत राघोपुर सीट से टिकट दिया है।
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चर्चा राबड़ी देवी और लालू की बेटी मीसा भारती के चुनाव लड़ने की भी थी लेकिन लोकसभा चुनावों में इस मामले में हाथ जला चुके लालू ने इस बार इन्हें राजनीति से दूर रखना ही बेहतर समझा। इसके अलावा भी राजद की ओर से कई पूर्व विधायकों के बेटों को टिकटों से नवाजा गया है।

पासवान ने रिश्तेदारों में ही बांट दी रेवडियां

bihar assembly election 2015, parties gave ticket to relatives

नाते रिश्तेदारों को ‌टिकट बांटने में सबसे ज्यादा दरियादिली इस बार राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने दिखाई है। पासवान ने अपने लगभग सभी प्रमुख रिश्तेदारों को टिकटों से नवाज दिया है। जिसमें उनके भाई, भतीजे और समधी तक शामिल हैं।

पासवान ने अपने भाई और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार को खगड़िया की अलौली सीट से टिकट दिया है। वो पहले भी इस सीट से जीत चुके हैं हालांकि पिछले चुनावों में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।

इसके अलावा पासवान ने भाई और सांसद रामचंद्र पासवान के बेटे प्रिंस राज को भी समस्तीपुर जिले की कल्याणपुर सुरक्षित सीट से टिकट दिया है। इसके अलावा सहरसा की सोनबरसा सीट से दूर के रिश्ते में बहू लगने वाली सरिता पासवान को टिकट दिया गया है। वहीं खगड़िया के सांसद महबूब अली के बेटे मोहम्मद यूसुफ को सिमरी बख्तियारपुर से टिकट दिया गया है। यह सीट महबूब अली की पुश्तैनी सीट बनी हुई है।
 
भाजपा ने भी नेता पुत्रों पर दिखाई दरियादिली

खुद को पार्टी विद डिफरेंस कहने वाली भाजपा ने भी अपनों को टिकट बांटने के मामले में खूब दरियादिली दिखाई है। पार्टी ने बिहार भाजपा के कद्दावर नेता सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर को टिकट दिया है तो अश्विनी चौबे अपने बेटे अरिजीत सारस्वत को टिकट दिलाने में कामयाब रहे हैं।

वरिष्ठ नेता गंगा प्रसाद भी अपने बेटे संजीव चौरसिया के लिए टिकट का जुगाड़ करने में सफल रहे। इसके अलावा बांका से पूर्व सांसद जनार्दन यादव के बेटे मनोज यादव को और कटोरिया से विधायक सोनेलाल की बहू निक्की को भी टिकट दिया गया है।

मांझी ने भी बेटे को दिया टिकट

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पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा में भी पुत्रों को जमकर टिकट बांटे गए हैं। दलित राजनीति को अपनी तरफ मोड़ने की कवायद में लगे मांझी ने अपने बेटों की राजनीतिक राह भी आसान करने की तैयारी कर ली है। उन्होंने अपने बेटे संतोष कुमार सुमन को टिकट दिया है।

इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे और हम नेता नीतीश मिश्रा भी बीजेपी के हम कोटे से झंझारपुर से टिकट पाने में सफल रहे। वहीं हम के बड़े नेता और चकई से वर्तमान विधायक नरेंद्र सिंह ने अपने बेटे को जमुई से टिकट दिलवा दिया है। उनका दावा पिता की जमुई सीट पर भी था लेकिन यहां से लोजपा ने अपना उम्‍मीदवार उतार दिया।

रालोसपा और जेडीयू में भी मचा घमासान
वहीं भाजपा की सहयोगी रालोसपा में भी रिश्तेदारों को टिकट दिए जाने पर घमासान मचा है। तीन दिन पहले ही पार्टी कार्यकर्ता अशोक गुप्ता ने पार्टी अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की प्रेस कान्फ्रेंस में यह कहकर हंगामा मचा दिया था कि कुशवाहा ने नरकटिया सीट से उनका नाम काटकर अपने समधी को टिकट दे दिया है।

इसके अलावा सत्तारूढ़ जेडीयू में भी कई नेताओं को टिकट दिए जाने पर बवाल मचा है। बुधवार को नीतीश कुमार ने जैसे ही उम्‍मदीवारों की घोषणा की तभी पटना में पार्टी कार्यालय पर नाराज समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया। विरोध करने वालों का गुस्सा रिश्तेदारों को टिकट दिए जाने को लेकर था।

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