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नतीजों के बाद मिट जाएगा लालू-नीतीश का राजनीतिक अस्तित्वः अनंत कुमार

Sat, 10 Oct 2015 07:08 PM IST
Updated Sat, 10 Oct 2015 07:08 PM IST
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bihar assembly election 2015: Interview of anant kumar
केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार पार्टी केबिहार चुनाव के प्रभारी हैं। पटना में भाजपा केप्रदेश कार्यालय में बने वॉर रूम में वह लगातार जमे हुए हैं। वहीं अमर उजाला केलिए अनंत कुमार से विनोद अग्निहोत्री की बातचीत।
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क्या लगता है कि बिहार में भाजपा के हिंदुत्व और  महागठबंधन के सामाजिक न्याय के मुद्दे में कौन भारी पड़ेगा?
बिहार केइस चुनाव में सिर्फ एक मुद्दा हावी है विकास और सुशासन। यहां की जनता 15 साल का जंगल राज भोग चुकी है। जब लालू यादव नीतीश कुमार से मिल गए और उसी तरह हावी हो गए जैसे यूपीए पर सोनिया गांधी हावी थीं, तो बिहार की जनता अब तीसरा जंगल राज नहीं चाहती। वह विकास राज चाहती है जो नरेंद्र मोदी केनेतृत्व में बिहार में भाजपा की सरकार बनाकर विकास चाहती है।
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अगर विकास और सुशासन एकमात्र मुद्दा है तो फिर सुशील मोदी क्यों गोमांस और गोहत्या को मुद्दा बना रहे हैं? क्या भाजपा को अपने विकास के नारे पर भरोसा नहीं रहा?
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लालू जी ने खुद कहा कि उनकी जबान पर शैतान चढ़ गया था जो वह यह बोल गए। जब एक वरिष्ठ नेता की जुबान शैतान चढ़ जाता है और एक अति संवेदनशील मुददे पर अनाप शनाप बयान देते हैं जिससे पूरा बिहार आक्रोशित हो जाता है। जो लोग गोवर्धन पूजा करते हैं उनकी भावना, भारतीय संस्कृति, किसान और जन भावना केखिलाफ लालू जी का बयान है। इसलिए सुशील मोदी जी और भाजपा ने उसका विरोध किया।

होर्डिंग में मोदी शाह की ही तस्वीरें क्यों

bihar assembly election 2015: Interview of anant kumar

लेकिन गो मांस पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने ऐसा विवादास्पद बयान दिया तब भाजपा ने ऐसी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी?

किरण रिजिजू ने बाद में अपनी सफाई दे दी थी कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। लेकिन जुबान पर शैतान चढ़ गया कहने केबावजूद लालू यादव ने कोई पश्चाताप नहीं किया।

बिहार चुनाव में भाजपा केप्रचार अभियान में लगे होर्डिंग्स में सिर्फ नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तस्वीरे ही हैं। क्या बिहार के भाजपा नेताओं पर नेतृत्व को भरोसा नहीं है?

ये दोनों नेता हमारे आला नेता हैं। अटल जी और आडवाणी जी के जमाने भी उन दोनों की तस्वीरें भी लगती थीं। कुछ होडिंग्स में बिहार भाजपा केचार नेताओं की तस्वीर भी है। कुछ में दो नेताओं की हैं। कुछ में ज्यादा की तस्वीर है। कई तरह केहोर्डिंग्स हैं।

भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए की कितनी सीटें आने की उम्मीद है?

हमने जो लक्ष्य रखा है उसके मुताबिक भाजपा को अकेले पूर्ण बहुमत और एनडीए को दो तिहाई बहुमत मिलना चाहिए।

लोकसभा चुनाव वाली रहेगी रणनीति

bihar assembly election 2015: Interview of anant kumar

यानी जैसा लोकसभा चुनाव में हुआ कुछ उस तरह?
लोकसभा चुनाव में भी कोई मानने को तैयार नहीं था कि भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलेगा और नरेंद्र भाई के नेतृत्व में एनडीए को 337 सीटें मिलेंगी और कांग्रेस 50 से नीचे आ जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ। ऐसा ही इस चुनाव में भी अप्रत्याशित परिणाम आएंगे और राजद और जद(यू) यानी लालू यादव और नीतीश कुमार का राजनीतिक अस्तित्व मिट जाएगा।

महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू कश्मीर में भाजपा ने किसी को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित नहीं किया और जीत हुई। लेकिन दिल्ली में किरण बेदी को घोषित किया गया और बुरी तरह हार हुई। तो क्या दिल्ली से सबक लेकर बिहार में नेता घोषित नहीं किया गया?
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गोआ में भाजपा ने नेता घोषित करते चुनाव लड़ा। यह पार्टी की रणनीत है कि हमने दोनों विकल्प खुले रखे हैं। जैसी जहां परिस्थिति होती है भाजपा वैसा करती है। बिहार में हमने नेता घोषित नहीं किया। चुनाव के बाद हम चेहरा भी बताएंगे। पहले पुल तक पहुंचे फिर नदी पार करेंगे।

लेकिन गिरिराज सिंह ने तो कह दिया कि कोई भी सवर्ण मुख्यमंत्री नहीं होगा। इसके क्या मायने हैं?
मुझे लगता बड़ी तस्वीर देखनी चाहिए। बड़ी तस्वीर यह है कि लोग जंगल राज समाप्त करना चाहते हैं। अभी वह छोटे मुद्दों पर नहीं जा रही है। भाजपा का संसदीय बोर्ड चुनाव के बाद सही नेता का चयन करेगी। सवाल विश्वसनीयता का है। देश को और बिहार की जनता को नरेंद्र भाई पर भरोसा है। कितना भी चेहरा आगे रखो अगर उसकी विश्वसनीयता नहीं है तो जनता उसे स्वीकार नहीं करती है। इसलिए भाजपा एक अच्छे खासे नेता को मुख्यमंत्री बनाएगी।

जिस जीत का आप दावा कर रहे हैं उसका आधार क्या है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता या नीतीश कुमार का लालू यादव केसाथ गठबंधन?
एक ही आधार होगा कि 11 करोड़ बिहारियों के मन में जो आकांक्षा है कि बिहार में फिर जंगल राज नहीं बनेगा। बिहार को देश की विकास की धारा से जोड़ा जाना चाहिए। बिहार के विकास को गति मिलनी चाहिए। अगर बिहार में ऐसी सरकार आएगी जो केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चले तो बिहार के लिए स्वर्णिम अवसर होगा। बिहार की जनता इस समझदारी के आधार  पर अपना फैसला देगी।


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