Bihar By Election: चार विधानसभा सीटों पर 52.83% मतदान, 2020 के चुनाव से इतना कम; रिजल्ट पर पड़ सकता है असर
Bihar News: रामगढ़ और इमामगंज विधानसभा समेत कुछ बूथों पर मतदाताओं ने वोटिंग का बहिष्कार कर दिया। यहां के मतदाता सड़क नहीं तो वोट नहीं का बैनर लगा कर बहिष्कार कर रहे थे।
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बिहार की चार सीटों पर उपचुनाव संपन्न हो गया। कुछ बूथों पर वोट बहिष्कार की बात सामने आई। निर्वाचन आयोग के अनुसार, इमामगंज, बेलागंज, तरारी और रामगढ़ में बुधवार शाम छह बजे तक 52.83 प्रतिशत मतदान हुआ। 2020 में हुए विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो इस बार छह फीसदी मतदान कम हुआ। इस बार उपचुनाव बेलागंज में सबसे अधिक 56.21 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बाद रामगढ़ में 54.02 प्रतिशत, इमामगंज में 51.01 प्रतिशत और तरारी में 50.10 प्रतिशत मतदान हुआ।
वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में बेलागंज में सबसे अधिक 61.14 प्रतिशत रामगढ़ में 63.84 प्रतिशत, इमामगंज में 58.60 प्रतिशत और तरारी में 55.35 प्रतिशत मतदान हुआ। रामगढ़ और इमामगंज विधानसभा समेत कुछ बूथों पर मतदाताओं ने वोटिंग का बहिष्कार कर दिया। यहां के मतदाता सड़क नहीं तो वोट नहीं का बैनर लगा कर बहिष्कार कर रहे थे। मतदाताओं ने बताया कि आजादी के बाद से उक्त गांव में आज तक न तो सड़क बना है और न ही नदी पर पुल नहीं बना है। साथ ही कोई भी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कई बार सांसद और विधायक से मिलकर शिकायत किया पर कुछ नहीं हुआ। राजनीतिक पंडितों की मानें तो इस बार मतदाताओं में वोटिंग के प्रति उदासीनता दिखी।इसका असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।
38 प्रत्याशी उतरे चुनावी मैदान में
सभी चारों विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदान केदो की कुल संख्या 1277 और मतदान केंद्र स्थलों की कुल संख्या 929 थी। निर्वाचन लड़ने वाले कुल प्रत्याशियों की संख्या 38 थी जिसमें 33 पुरुष और पांच महिला अभ्यर्थी थे। चार विधानसभा उपचुनाव के लिए करीब 7000 सुरक्षा बलों और 2550 ग्रह रक्षों की तैनाती की गई थी। सुरक्षा बलों में अर्धसैनिक बल बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस एवं जिला बल शामिल थे। इसके साथ ही अश्व आरोही दल एवं बम निरोधक दस्ते की भी प्रति व्यक्ति की गई थी।
तीन सीटों पर रहा था महागठबंधन का कब्जा
बिहार के चार सीटों पर उपचुनाव से पहले बेलागंज, रामगढ़ और तरारी विधानसभा सीट महागठबंधन के कब्जे में था। तीनों सीटों के विधायक इसी साल लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए तो यह सीटें ख्नाली हुईं। एक इमामगंज विधानसभा सीट राजग के खाते में थी। इसलिए, इस बार राजद को अपनी तीनों सीटें बचाने की चुनौती चर्चा में है और लालू प्रसाद यादव अपने बेटे तेजस्वी यादव की प्रतिष्ठा बचाने के लिए खुद चुनाव प्रचार के मैदान में उतरे थे।