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Bihar Diwas: कल बिहार दिवस पर पटना में बड़े आयोजन; जानिए, थीम आधारित पवेलियन और स्टॉल पर क्या दिखेगा-मिलेगा?
Sat, 21 Mar 2026 05:14 PM IST
Aditya Anand
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Aditya Anand
Updated Sat, 21 Mar 2026 05:14 PM IST
सार
Bihar News: बिहार दिवस समारोह को इस बार खास बनाने की तैयारी है। कला एवं संस्कृति विभाग की ओर कहा गया है कि इस वर्ष 'बिहार दिवस 2026' केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि हर बिहारी के स्वाभिमान और उसकी जड़ों की ओर लौटने का एक उत्सव है।
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बिहार दिवस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार दिवस 22 मार्च यानी रविवार को है। बारिश के बावजूद लगभग सारी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। इस बार बिहार दिवस के अवसर पर ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ थीम के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा महिला एवं बाल विकास निगम को नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। गांधी मैदान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाली विभिन्न इकाइयों द्वारा उनकी योजनाओं, उपलब्धियों एवं सेवाओं के प्रदर्शन के लिए थीम-आधारित स्टॉल और पवेलियन लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों के जरिए आमजन को राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, सेवाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, विभाग के पवेलियन में इस बार राज्य की पारंपरिक कलाओं, जैसे लहठी एवं सुजनी का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही, महिला उद्यमियों के उत्पादों के प्रदर्शन-सह-विपणन के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा जीविका पवेलियन भी लगाया जाएगा। इसका शुभारंभ ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री करेंगे।
कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा
बिहार सरकार के विभाग की इकाइयों में समाज कल्याण निदेशालय, आईसीडीएस निदेशालय, राज्य आयुक्त निशक्तता (दिव्यांगजन) कार्यालय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय, बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग, सामाजिक सुरक्षा निदेशालय, स्टेट सोसाइटी फॉर अल्ट्रा पुअर एंड सोशल वेलफेयर (सक्षम) तथा राज्य बाल संरक्षण समिति आयोजन में शामिल रहेंगी। महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से राज्य की विकास यात्रा, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
15 हजार वर्गफुट में फैला पवेलियन
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 15 हजार वर्गफुट में फैला हमारा पवेलियन एक 'टाइम मशीन' की तरह होगा। यहां 'धरोहर दर्शन' के माध्यम से हम अपनी खोती हुई ग्रामीण विरासतों को पुनर्जीवित करेंगे। यह उन बुजुर्गों के लिए पुरानी यादें और बच्चों के लिए नई प्रेरणा लेकर आएगा।
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यहां पर दिखाई जाएंगी फिल्में
बिहार की मिट्टी की महक वाली फिल्में जैसे "नदिया के पार" और "तीसरी कसम" केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारे समाज का दर्पण हैं। बिहार संग्रहालय और आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में इनकी स्क्रीनिंग के जरिए हम सिनेमा के स्वर्ण युग को फिर से जीएंगे। इसके अलावा 22 से 26 मार्च तक प्रेमचंद रंगशाला में आयोजित 'महिला नाट्य उत्सव' हमारी आधी आबादी की रचनात्मक शक्ति और उनके संघर्षों की कहानियों को समर्पित होगा। यह मंच उनकी आवाज़ को एक नई ऊंचाई देगा।
पहली बार बिहार का लोक संगीत और नृत्य मॉरीशस की गलियों में गूंजेगा। विभाग की एक विशेष सांस्कृतिक टोली उन 'गिरमिटिया' वंशजों के पास अपनी जड़ों का संदेश लेकर जा रही है, जिनके पूर्वज यहां की मिट्टी अपने साथ ले गए थे। यह आयोजन आंकड़ों या प्रदर्शनियों का समूह नहीं है। यह हमारे पुरखों के संघर्ष और भविष्य के बिहार के सपनों का संगम है। हम अपनी कला के माध्यम से दुनिया को बता रहे हैं कि बिहार अपनी जड़ों पर खड़ा होकर आज भी फल-फूल रहा है।
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कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा
बिहार सरकार के विभाग की इकाइयों में समाज कल्याण निदेशालय, आईसीडीएस निदेशालय, राज्य आयुक्त निशक्तता (दिव्यांगजन) कार्यालय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय, बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग, सामाजिक सुरक्षा निदेशालय, स्टेट सोसाइटी फॉर अल्ट्रा पुअर एंड सोशल वेलफेयर (सक्षम) तथा राज्य बाल संरक्षण समिति आयोजन में शामिल रहेंगी। महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से राज्य की विकास यात्रा, विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
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15 हजार वर्गफुट में फैला पवेलियन
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 15 हजार वर्गफुट में फैला हमारा पवेलियन एक 'टाइम मशीन' की तरह होगा। यहां 'धरोहर दर्शन' के माध्यम से हम अपनी खोती हुई ग्रामीण विरासतों को पुनर्जीवित करेंगे। यह उन बुजुर्गों के लिए पुरानी यादें और बच्चों के लिए नई प्रेरणा लेकर आएगा।
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यहां पर दिखाई जाएंगी फिल्में
बिहार की मिट्टी की महक वाली फिल्में जैसे "नदिया के पार" और "तीसरी कसम" केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारे समाज का दर्पण हैं। बिहार संग्रहालय और आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में इनकी स्क्रीनिंग के जरिए हम सिनेमा के स्वर्ण युग को फिर से जीएंगे। इसके अलावा 22 से 26 मार्च तक प्रेमचंद रंगशाला में आयोजित 'महिला नाट्य उत्सव' हमारी आधी आबादी की रचनात्मक शक्ति और उनके संघर्षों की कहानियों को समर्पित होगा। यह मंच उनकी आवाज़ को एक नई ऊंचाई देगा।
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पहली बार ऐसा होने जा रहा हैपहली बार बिहार का लोक संगीत और नृत्य मॉरीशस की गलियों में गूंजेगा। विभाग की एक विशेष सांस्कृतिक टोली उन 'गिरमिटिया' वंशजों के पास अपनी जड़ों का संदेश लेकर जा रही है, जिनके पूर्वज यहां की मिट्टी अपने साथ ले गए थे। यह आयोजन आंकड़ों या प्रदर्शनियों का समूह नहीं है। यह हमारे पुरखों के संघर्ष और भविष्य के बिहार के सपनों का संगम है। हम अपनी कला के माध्यम से दुनिया को बता रहे हैं कि बिहार अपनी जड़ों पर खड़ा होकर आज भी फल-फूल रहा है।