बिहार: भोजपुर में गंगा का रौद्र रूप, खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर जलस्तर; 30 से ज्यादा गांव प्रभावित
भोजपुर के बड़हरा प्रखंड में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। दर्जनों गांवों में खेत-बधार और ग्रामीण सड़कें जलमग्न हैं। फसलों के साथ पशु चारे का संकट भी बढ़ गया है। पढ़ें पूरी खबर
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गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण भोजपुर के बड़हरा प्रखंड में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सोमवार शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 53.51 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने से प्रखंड के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेत-बधार जलमग्न हो गए हैं, कई ग्रामीण सड़कों पर पानी चढ़ गया है और किसानों के सामने फसल के साथ-साथ पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा हो गया है।
जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता आशीष कुमार रंजन ने बताया कि सोमवार शाम छह बजे बड़हरा में गंगा का जलस्तर 53.51 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
खेतों में लगी फसलें पानी में डूबीं
गंगा के उफान से मोहन करजा, बड़का लौहर, नेकनाम टोला, बखोरापुर, दुबे छपरा, हाजीपुर, शिवपुर, गुंडी और छोटका ईटहना समेत कई गांवों के बधार में पानी फैल गया है। खेतों में लगी लौकी, नेनुआ, छिंगुनी, परवल, मकई समेत अन्य फसलें पानी की चपेट में हैं। इससे किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है। वहीं, खेत और बधार जलमग्न होने से पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट भी गहराने लगा है।
कई ग्रामीण पथों पर चढ़ा पानी
बाढ़ का पानी लौहर-दुबे छपरा, लौहर-बखोरापुर, नेकनाम टोला-केशोपुर-सरैंया समेत कई ग्रामीण मार्गों पर पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गंगा का जलस्तर स्थिर होकर अब घटने लगता है तो बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, खेतों और बधार में जमा पानी निकलने में अभी समय लग सकता है।
करीब 30 से 35 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों में स्थिति को लेकर डर के साथ नाराजगी भी है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 30 से 35 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ के दौरान नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पुल का निर्माण अधूरा छोड़े जाने से भी बड़ी आबादी प्रभावित हुई है। उनका दावा है कि इससे करीब एक लाख लोगों की परेशानी बढ़ी है।
ग्रामीण राजेंद्र पांडे ने कहा कि बड़हरा के लोग हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अधिक खराब है। उनका आरोप है कि अधिकारियों के आने और स्थिति का जायजा लेने के बावजूद राहत एवं बचाव की ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी है। वहीं, बुजुर्ग रमेश सिंह ने कहा कि बाढ़ की समस्या वर्षों से बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। चार दिनों से बाढ़ की स्थिति के बावजूद नाव और जरूरी राहत सामग्री की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं पर मेडिकल टीम की नजर
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी तैयारी तेज कर दी है। बड़हरा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि मेडिकल टीम रविवार से ही पूरी तरह तत्पर है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। जरूरतमंद मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या ब्लॉक स्तर के अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि फिलहाल चार मेडिकल टीमें लगातार काम कर रही हैं। आवश्यकता पड़ने पर एक-दो और मेडिकल टीमों को बढ़ाने की तैयारी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी बनाए रखने, नावों की पर्याप्त व्यवस्था करने तथा जरूरतमंद लोगों तक राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की मांग की है।