Bihar: एम्बुलेंस न मिलने पर चिलचिलाती धूप में मां को ठेले पर लाद घर ले गया बेटा; अस्पताल से मिला टका सा जवाब
Bhagalpur News: भागलपुर में जाने माने सरकारी अस्पताल से छुट्टी के बाद बुजुर्ग महिला मरीज को एम्बुलेंस नहीं दी गई। उसके बाद मरीज का बेटा उसे मजबूरन चिलचिलाती धूप में ठेले पर लादकर अपने घर ले गया। इस मामले में सरकारी अस्पताल से हैरान करने वाला जवाब भी आया है।
विस्तार
पूर्वी बिहार के सबसे बड़े अस्पताल जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्था को बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। बदहाल या बदतर से भी नीचे जो हो होता है, वही स्थिति यहां है। यहां आने वाले मरीज और उनके तीमारदारों का कहना है कि इस अस्पताल में सही से इलाज तक नहीं होता है। ताजा मामला इस बात की खालिस तौर पर तस्दीक भी करता है। दरअसल, शनिवार को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पहुंचे एक मरीज को एम्बुलेंस मुहैया नहीं कराई गई। उसके बाद चिलचिलाती धूप में एक बुजुर्ग महिला को उसका बेटा ठेले पर लादकर मायागंज अस्पताल से इलाज कराकर अपने घर ले गया। इस दौरान उसने बुजुर्ग महिला को कपड़ों ढक लिया था। पूछे जाने पर मरीज के बेटे ने बताया कि मायागंज अस्पताल प्रशासन ने एम्बुलेंस की सुविधा ही नहीं दी।
अस्पताल ने एम्बुलेंस देने से किया मना
जानकारी के मुताबिक, 22 मार्च को बारिश के दौरान चित्तनी देवी (75) का पैर फिसल गया था। उस घटना में उनका पैर टूट गया। उनका इलाज करीब एक महीने तक मायागंज अस्पताल में जारी रहा। उसके बाद अस्पताल से उन्हें छुट्टी दी गई। इस दौरान अस्पताल कर्मी से एम्बुलेंस मुहैया कराने की मांग की गई, लेकिन किसी ने एक न सुनी और एम्बुलेंस देने से मना कर दिया। इसके बाद मजबूरी में बुजुर्ग महिला का बेटा चिलचिलाती धूप में अपनी मां को ठेले पर लादकर घर ले गया।
अधीक्षक ने दिया सरकारी जवाब
इस मामले को लेकर पूछे जाने पर अस्पताल अधीक्षक ने कहा कि जरूरत के अनुसार हम लोग मदद करते हैं। इसके लिए सरकारी रेट हैं, जिसके मुताबिक मरीज के परिजनों को शुल्क देना होता है। उसके बाद एम्बुलेंस से जिले के अंदर कुछ किलोमीटर तक जा सकते हैं। जिले के बाहर नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि यह जानकारी हम लोगों को होती तो जरूर कोशिश करते। जरूर उपाय बताते कि क्या करना है, कैसे लेकर जाना है। हमारे यहां भर्ती होने वाले सभी मरीजों को एम्बुलेंस देना संभव नहीं है।
इमारत समेत व्यवस्था जर्जर, जिम्मेदारी भी शून्य
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कई भवन जर्जर हो चुके हैं। केवल अस्पताल की इमारत ही नहीं, बल्कि व्यवस्था भी जर्जर हो चुकी है और जिम्मेदारी की तो किसी पड़ी ही नहीं है। बिहार समेत झारखंड के कुछ हिस्सों के लोग इस अस्पताल में इलाज करवाने के लिए जाते हैं। लेकिन व्यवस्था के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। यहां इतना बुरा हाल है कि मरीज रहने से लेकर इलाज और दवाई तक के लिए भटकते रहते हैं।