Bageshwar Dham : पटना के होटल का एक कमरा बना रसोई, भंडारी ने नए बर्तन में पकाया था भोजन; ठेकुआ भी आया था
Dhirendra Shastri in Bihar : बुधवार को बागेश्वर वाले बाबा लौट गए, लेकिन राजनीतिक गलियारे से लेकर पटना के उस होटल तक उनकी ही बातें हैं, जहां वह ठहरे थे। बाबा के पास लिट्टी-चोखा न आया, न उन्होंने खाया; लेकिन उनके पास बिहार का ठेकुआ जरूर पहुंचा।
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पंडित धीरेंद्र शास्त्री 13 मई को पटना पहुंचे और 17 की शाम लौट गए। इस दौरान गांधी मैदान स्थित होटल में कुछ चुनिंदा लोगों को ही इंट्री मिल रही थी। बाबा के बारे में बात करने का कोई प्रावधान नहीं था। गुरुवार को जब सबकुछ थोड़ा सामान्य हुआ तो भी उनकी ही बातें चल रही थीं। उनके इस भ्रमण के दौरान होटल ही वेजिटेरियन हो गया था। लेकिन, उनकी अपनी तैयारी अपने तरीके से थी। होटल पनाश के ऑपरेशन मैनेजर कुमोद कंचन शर्मा ने बताया कि बागेश्वर वाले बाबा के आने से पूरा माहौल ही बदला हुआ था। हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी सुरक्षा और सुविधा के स्तर पर थी, खान-पान का पूरा सेटअप उनकी पूरी टीम खुद देख रही थी।
फल पर फोकस, खाना उनके भंडारी बनाते हैं
होटल के कमरे में खाना पहुंचाने की व्यवस्था रहती है, लेकिन बागेश्वर वाले बाबा के लिए उनके फ्लोर का एक कमरा ही रसोई के रूप में बदल दिया गया था। कमरे को साफ करने के साथ ही सैनेटाइज किया गया था। नए बरतन मंगाए गए थे। उनके साथ आए बागेश्वर धाम के भक्तों के अलावा मध्य प्रदेश पुलिस के जवान, धार्मिक चैनल के प्रतिनिधि भी यहां ठहरे थे। 17 कमरे कम पड़ गए तो कुछ लोग आसपास के रेस्ट हाउस में रुके। बाबा और साथ आए लोगों के लिए बिना लहसुन-प्याज का खाना उनके पुरोहित के निर्देश पर भंडारी बना रहे थे। रात में क्या खाना है, सुबह बताया जाता था। सुबह के बारे में प्लान रात में बताया जाता था। उनके भंडारी अपने हिसाब से खाना पकाते थे।
भक्त जो लेकर आए, उनमें फल-ठेकुआ पहुंचा
ऑपरेशन मैनेजर कुमोद शर्मा बताते हैं कि होटल में तो सुबह-शाम भारी भीड़ उमड़ ही रही थी, लेकिन इनमें उनकी संख्या भी ठीक थी जो बाबा को कुछ खाने के लिए देना चाहते थे। उसमें फल ही बाबा ने स्वीकार किए। हां, बिहार में छठ महापर्व के प्रसाद के रूप में प्रसिद्ध ठेकुआ (पकवान) भी बाबा तक पहुंचा। किसी भक्त ने लाकर दिया था।