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आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव जयंती समारोह: 'राजनीति जब-जब लड़खड़ाती है, साहित्य ही सहारा देता है'
Thu, 28 Oct 2021 06:04 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 28 Oct 2021 06:04 PM IST
सार
इस स्मृति-पर्व में आचार्य डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव स्मृति न्यास द्वारा 2021 के नौ साहित्यकार-पत्रकारों को 'आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव सारस्वत सम्मान' भी प्रदान किया गया।
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Acharya Srijanjan Suridev jayanti
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
आचार्य श्रीरंजन जैसे साहित्य मनीषियों ने सदैव अपने लेखन और कर्म से साहित्य और साहित्यकारों के लिए नवीन मार्ग का निर्देश किया है। आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव स्मृति न्यास द्वारा पटना में आयोजित 95वीं जयंती समारोह और सम्मान अनुष्ठान में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने ये बात कही।
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अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि आज इस सभागार रूपी पवित्र मंदिर में आकर बहुत खुशी हुई, क्योंकि यह लोकतंत्र के रक्षक जयप्रकाश नारायण जी से जुड़ा स्थल है। उन्होंने एक प्रसंग की चर्चा की, जिसमें राष्ट्रकवि दिनकर ने नेहरू जी से कहा था कि राजनीति जब-जब लड़खड़ाती है, साहित्य ही सहारा देता है।
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इस अवसर पर प्रो. अरुण कुमार भगत द्वारा संपादित और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'साहित्य और साहित्यकार सर्जक : आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव' का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. अरुण कुमार भगत ने श्रीरंजन सूरिदेव के कृतित्व को याद करते हुए कहा कि आचार्य जी हिंदी के लब्धप्रतिष्ठ कुशल गद्यकार और समर्थ संपादक थे। आचार्य जी के जीवन में रचनात्मकता त्रिवेणी का संगम दिखाई देता है। उनमें हिंदी, संस्कृत और प्राकृत तीनों भाषाओं की त्रिधारा के भी दर्शन होते हैं।
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विशिष्ट अतिथि प्रो. गिरीश कुमार चौधरी ने आचार्य जी के व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए इस बात का उल्लेख किया कि आज साहित्य के प्रति युवाओं का रुझान कम हुआ है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को साहित्य से दुबारा जोड़ने का प्रयास करेगा। बिहार विधान परिषद के सदस्य देवेश कुमार ने अपने उद्बोधन में भाषा में फूहड़पन पर चिंता जाहिर की और कहा कि बिहार में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की जरूरत है और इसके लिए परिवार से शुरुआत करते हुए वृहत् कार्यशालाओं की आवश्यकता है।
अंतिम वक्ता और इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ. किरण घई ने कहा कि आचार्य जी को कभी अवसादग्रस्त नहीं देखा गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साहित्यकार की कृति एक अक्षय संपदा होती है, जो कभी समाप्त नहीं होती। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के सह-संयोजक गौरव रंजन ने किया।
आज के इस स्मृति-पर्व में आचार्य डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव स्मृति न्यास द्वारा 2021 के नौ साहित्यकार-पत्रकारों को 'आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव सारस्वत सम्मान' भी प्रदान किया गया, जिसमें पटना के सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री मार्कण्डेय शारदेय, डॉ. कुणाल कुमार, डॉ. कैलाश प्रसाद सिंह स्वच्छंद, डॉ. मेहता नगेंद्र सिंह एवं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक और युवा साहित्यकार डॉ. अशोक कुमार ज्योति सहित पटना के सुप्रसिद्ध पत्रकार श्री प्रवीण बागी, राकेश प्रवीर, पटना के सुकवि ज्योतिन्द्र मिश्र और सुप्रसिद्ध गायिका और नृत्यांगना डॉ. पल्लवी विश्वास को 2021 के 'आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव सारस्वत सम्मान' से सम्मानित किया गया।