फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   129 Children died due to AES in Muzaffarpur, Villagers leave with children

दिमागी बुखार: अपने घरों को छोड़कर जा रहे लोग, नीतीश सरकार ने की पहली कार्रवाई

Sun, 23 Jun 2019 02:24 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Sun, 23 Jun 2019 02:24 PM IST
विज्ञापन
129 Children died due to AES in Muzaffarpur, Villagers leave with children
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

बिहार के मुजफ्फरपुर में एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) से मरने वाले बच्चों की संख्या 129 हो गई है। इनमें से 109 मौत एसकेएमसीएच (श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) अस्पताल में और 20 मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई हैं। वहीं बिहार की नीतीश सरकार ने पहली बार दिमागी बुखार के संबंध में कार्रवाई की है।


loader

बिहार के मुजफ्फरपुर में एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) से मरने वाले बच्चों की संख्या 129 हो गई है। इनमें से 109 मौत एसकेएमसीएच (श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) अस्पताल में और 20 मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई हैं। वहीं बिहार की नीतीश सरकार ने पहली बार दिमागी बुखार के संबंध में कार्रवाई की है।

एसकेएमसीएच के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भीमसेन कुमार को भी ड्यूटी के वक्त लापरवाही करने पर निलंबित कर दिया गया है। पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के इस बाल चिकित्सक को स्वास्थ्य विभाग ने 19 जून को एसकेएमसीएच भेजा था। 

 





एईएस को बिहार में दिमागी बुखार या फिर चमकी बुखार कहा जा रहा है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि लोग अपने बच्चों को लेकर अपने घरों से दूर जा रहे हैं। कुछ लोग अपने बच्चों को रिश्तेदारों के घर भेज रहे हैं। राज्य के वैशाली जिले के हरवंशपुर गांव में भी अब इस बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। ये गांव मुजफ्फरपुर से 40 किलोमीटर दूर है। यहां रहने वाली चतुरी सहनी ने 24 घंटे के अंदर अपने सात और दो साल के दोनों बेटों को एईएस के कारण खो दिया।

इस गांव में अब तक सात मौत के मामले सामने आ चुके हैं। अभी गांव के दो बच्चों का इलाज एसकेएमसीएच अस्पताल में चल रहा है। ये मामले सामने आने के बाद से ही गांव के लोग काफी डर गए हैं और अपने बच्चों को गांव से दूर भेज रहे हैं।

अपने बच्चों को खोने वाले छह परिवार दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। जिन्हें महीने में 10-12 दिन ही काम मिलता है। सरकार द्वारा घोषित चार लाख रुपये की क्षतिपूर्ति इनमें से एक भी परिवार को नहीं मिली है। हालांकि खंड विकास अधिकारी अरोम मोदी ने गांव का दौरा किया है।

बताया जा रहा है कि सहनी अब अपने दोनों बेटों के मृत्यु प्रमाणपत्रों के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। ताकि मुआवजे में मिले पैसे उनके चार बच्चों के काम आ सकें।  

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ANI
इस गांव में करीब दो हजार परिवार रहते हैं। जिनमें से अधिकतर पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति से हैं। इनके पास अपनी खेती भी नहीं है, अपने परिवार का पेट पालने के लिए ये लोग 15 उच्च जाति के परिवारों पर निर्भर हैं। गांव का करीब एक चौथाई युवा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और मुंबई में काम करता है।

फूस के घर बनाकर रोज के 500 रुपये कमाने वाले राजेश सहनी ने अपनी सात साल की बेटी रूपा को नौ जून को एईएस के चलते खो दिया। उनका कहना है, "एसकेएमसीएच में मेरे बच्चे की मौत के बाद मुझे सरकारी एंबुलेंस के लिए तीन घंटे तक लड़ना और इंतजार करना पड़ा। उस दिन मेरे अंदर का पिता सौ मौत मरा। मेरी बेटी पढ़ाई में अच्छी थी।"  

सरकार की निष्क्रियता का विरोध करने पर 19 गांव वालों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। यहां के रहने वाले रामदेव सहनी ने भी अपनी सात साल की बेटी सिमरन को इस बीमारी में खो दिया है। पहले वो उसे किसी निजी डॉक्टर के पास लेकर गए, जहां से उसे एसकेएमसीएच अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। सिमरन की अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही मौत हो गई।

उन्हें अब इस बात का भी भरोसा नहीं है कि उन्हें सरकारी मुआवजा मिल पाएगा या नहीं। अब रामदेव का घर प्राथमिक हेल्थ कैंप बन चुका है। जिला प्रशासन ने भगवानपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दो डॉक्टरों और एक सहायक नर्स को भेज दिया है। जो दो शिफ्ट में काम करते हुए जागरुकता फैला रहे हैं और लोगों को जरूरी दवाईयां मुहया करा रहे हैं। लेकिन अधिकतर गांव वाले गांव छोड़कर जा चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed