जापानी भाषा में साक्षात्कार देकर प्लंबर की बेटी ने हासिल की स्कॉलरशिप, पढ़ने जाएगी जापान
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सावित्री बाई फूले बालिका इंटर कॉलेज की छात्रा ने लिखित परीक्षा और साक्षात्कार पास कर जापान की स्कॉलरशिप हासिल कर ली। छात्रा अब दो साल की पढ़ाई करने के लिए जापान जाएगी। साधारण प्लंबर की बेटी ने यह मुकाम हासिल कर अपने परिवार और स्कूल को गौरवांवित कर दिया है।
मूल रूप से उड़ीसा निवासी 10वीं की छात्रा अनीता बेहरा पुत्री निराकार बेहरा ने बताया कि उसके पिता प्लंबर का काम करते हैं। करीब सात साल पहले वह परिवार के साथ उड़ीसा से ग्रेटर नोएडा के देवला गांव में आकर रहने लगे।
देवला में अनीता का कक्षा चार में दाखिला कराया गया, जहां उसने 7वीं कक्षा तक की पढ़ाई की। इसके बाद उसे सावित्री बाई फूले बालिका इंटर कॉलेज में दाखिला दिलाया गया, जहां से उसने इस वर्ष 10वीं की परीक्षा दी है।
पिछले साल जापान सरकार के एनजीओ ओआईएससीए के प्रतिनिधियों ने स्कूल का दौरा किया था। इसी दौरान अनीता को स्कॉलरशिप के बारे में जानकारी मिली और उसने आवेदन कर दिया। दिसंबर 2015 में एनजीओ ने नोएडा के नेहरू इंटर कॉलेज में उसकी लिखित परीक्षा ली।
इसके बाद एनजीओ के दिल्ली स्थित कार्यालय में छात्रा का साक्षात्कार लिया गया। दोनों में उत्तीर्ण होने के बाद एनजीओ ने उसे दो साल की स्कॉलरशिप देते हुए पढ़ाई करने के लिए जापान बुलाया है। कॉलेज की प्राचार्र्य रीमा-डे ने बताया कि यह संस्था पर्यावरण पर काम करती है।
भारत में करीब एक हजार छात्र-छात्राओं ने यह परीक्षा दी, जिनमें से केवल पांच बच्चों का चयन किया गया। उन्होंने बताया कि 7 अप्रैल को अनीता जापान के लिए रवाना हो जाएगी और दो साल तक वहीं रहकर पढ़ाई करेगी।
यदि वहां पर अच्छे अंक लाती है, तो उसे स्नातक के लिए भी स्कॉलरशिप मिल सकती है। दो साल तक अनीता को जापान में ही रहना होगा। इस बीच वह अपने घर नहीं आ पाएगी। हालांकि हर रविवार को निशुल्क तीन घंटे तक परिजनों से बात कर सकेगी।
आर्थिक तंगी के कारण लिया निशुल्क पढ़ने का निर्णय
जापानी भाषा में दिया साक्षात्कार
फॉर्म भरने के बाद ही अनीता ने अंग्रेजी से जापानी भाषा को बदलकर जापानी भाषा सीखने की तैयारी शुरू कर दी। परीक्षा देने के बाद साक्षात्कार में संस्था की टीम ने एक सदस्य से अंग्रेजी में ट्रांसलेट करने के लिए कहा, तो अनीता ने कहा कि वह जापानी भाषा में बात कर सकती है। इस बात से प्रभावित होकर टीम ने अनीता का दो बार साक्षात्कार लिया और वह पास हो गई।
विज्ञान विषय और शाकाहारी होना जरूरी
इस संस्था की दो शर्तें होती हैं। पहला प्रतिभागी विज्ञान विषय से पढ़ने वाला हो और दूसरा वह शुद्ध शाकाहारी हो। अगर ये शर्तें कोई पूरी करता है, तो वह इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकता है।
आर्थिक तंगी के कारण लिया निशुल्क पढ़ने का निर्णय
अनीता की मानें, तो उसके परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है। स्कूल की फीस देने में भी परेशानी होती थी। इसलिए उसने मन बनाया कि वह किसी भी ऐसी संस्था से स्कॉलरशिप लेगी, जिससे उसकी पढ़ाई निशुल्क हो सके। अब उसका एनडीए की तैयारी करके देश की सेवा करने के लिए सेना में जाने का मन है। अनीता अब इसकी भी तैयारी साथ-साथ करेगी।
स्कूल के लिए रोल मॉडल बनी छात्रा
स्कूल की प्राचार्य रीमा-डे ने बताया कि अनीता उनके स्कूल की सबसे होनहार छात्रा है। वह अभी तक सभी कक्षाओं में अच्छे अंक लाती रही है। अनीता जापान पढ़ने जा रही है, इसे लेकर अन्य छात्राएं काफी खुश हैं और वह उनके लिए रोल मॉडल बन गई है।