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पल्लवी फौजदार के हौंसले का सीएम अखिलेश ने किया सम्मान
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sun, 01 May 2016 02:53 PM IST
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पल्लवी फौजदार को मिला सम्मान
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जब दिल में हौंसला और कुछ कर दिखाने का जुनून हो तो कोई भी बाधा आपके लक्ष्य को नहीं रोक सकती है। दो बच्चों की मां ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो आज तक कोई पुरुष भी नहीं कर सका।
पल्लवी फौजदार ने बाइक से 18 हजार फीट की ऊंचाई तक का सफर पूरा कर दो बार लिम्का बुक में अपना नाम दर्ज कराया है। उनके इस साहस को शनिवार को लखनऊ में आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पत्नी सांसद डिम्पल यादव ने ग्लोबल वूमन आफ यूपी का सम्मान दिया है।
सेक्टर-110 में रहने वाली पल्लवी फौजदार के पति भारतीय सेना में मेजर हैं। पल्लवी 18,497 फुट ऊंचाई तक मोटर बाइक ले जाने वाली देश की पहली महिला है, उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज किया गया है।
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मुश्किल रास्तों पर हौंसले की बाइकिंग से उन्होंने उपलब्धि हासिल की है। पल्लवी ने बताया कि उन्हें बाइक चलाने का जुनून है। वे आम जिंदगी में भी लंबी दूरी के सफर पर बाइक से ही जाना पसंद करती हैं।
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पल्लवी फौजदार ने बाइक से 18 हजार फीट की ऊंचाई तक का सफर पूरा कर दो बार लिम्का बुक में अपना नाम दर्ज कराया है। उनके इस साहस को शनिवार को लखनऊ में आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पत्नी सांसद डिम्पल यादव ने ग्लोबल वूमन आफ यूपी का सम्मान दिया है।
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सेक्टर-110 में रहने वाली पल्लवी फौजदार के पति भारतीय सेना में मेजर हैं। पल्लवी 18,497 फुट ऊंचाई तक मोटर बाइक ले जाने वाली देश की पहली महिला है, उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज किया गया है।
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मुश्किल रास्तों पर हौंसले की बाइकिंग से उन्होंने उपलब्धि हासिल की है। पल्लवी ने बताया कि उन्हें बाइक चलाने का जुनून है। वे आम जिंदगी में भी लंबी दूरी के सफर पर बाइक से ही जाना पसंद करती हैं।
लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज है नाम
पल्लवी फौजदार
पल्लवी ने बताया कि 20 सितंबर 2015 को दिल्ली के इंडिया गेट से एवंजर बाइक से राइड शुरू की थी। वहां से बद्रीनाथ से आगे माना गांव पहुंची। यह देश का आखिरी गांव है।
माना गांव से भी 55 किलोमीटर आगे माना पास पड़ता है, यहां पूरा कच्चा रास्ता है, पल्लवी ने यह दूरी 6 घंटे में तय की। वे दुर्गम रास्ते पर अपनी बाइक से चलती रहीं और उपलब्धि हासिल कर ली। सबसे ऊंची लेह लद्दाख के काक संगला की पहाड़ियों तक पहुंची और 24 सितंबर को माना पास में दस्तक दी। जहां से वह 27 सितंबर को वापस दिल्ली लौटीं।
पल्लवी ने पांच हजार मीटर से अधिक के हिमालय की आठ चोटियों पर बाइक से सफर पूरा किया है। पहले इसके लिए उनका नाम लिम्का बुक में दर्ज किया गया। करीब चार हजार किलोमीटर का सफर उन्होंने 18 दिन में पूरा किया था।
इस दौरान उन्होंने लुचुंगला, तंगलांगला, खार्दुंगला, वारीला, चांग्ला, मरसिमिकला, सताथोला और काकसंगला तक गई थीं। इसके बाद उन्होंने 18,497 फुट ऊंचाई पर स्थित माना पास (डुंगरीला) की बाइक से राइड पूरी की। अपने इस रिकॉर्ड को गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज कराने के लिए जुट गई है।
माना गांव से भी 55 किलोमीटर आगे माना पास पड़ता है, यहां पूरा कच्चा रास्ता है, पल्लवी ने यह दूरी 6 घंटे में तय की। वे दुर्गम रास्ते पर अपनी बाइक से चलती रहीं और उपलब्धि हासिल कर ली। सबसे ऊंची लेह लद्दाख के काक संगला की पहाड़ियों तक पहुंची और 24 सितंबर को माना पास में दस्तक दी। जहां से वह 27 सितंबर को वापस दिल्ली लौटीं।
पल्लवी ने पांच हजार मीटर से अधिक के हिमालय की आठ चोटियों पर बाइक से सफर पूरा किया है। पहले इसके लिए उनका नाम लिम्का बुक में दर्ज किया गया। करीब चार हजार किलोमीटर का सफर उन्होंने 18 दिन में पूरा किया था।
इस दौरान उन्होंने लुचुंगला, तंगलांगला, खार्दुंगला, वारीला, चांग्ला, मरसिमिकला, सताथोला और काकसंगला तक गई थीं। इसके बाद उन्होंने 18,497 फुट ऊंचाई पर स्थित माना पास (डुंगरीला) की बाइक से राइड पूरी की। अपने इस रिकॉर्ड को गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज कराने के लिए जुट गई है।