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उम्मीद की मशाल: जरूरतमंद परिवारों तक शिक्षा की रौशनी फैला रही प्रतिमा

Mon, 04 Apr 2016 04:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Mon, 04 Apr 2016 04:07 PM IST
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Flame of Hope: pratima spreading the light of education to needy families
प्रतिमा मोहंती - फोटो : अमर उजाला

फलक ने जहां गिराई है बिजलियां, अपनी भी जिद है वहीं बसाएंगे आशियां। इस कहावत को सच करके दिखा रही हैं प्रतिमा मोहंती। जिन जरूरतमंद परिवारों में शिक्षा की रोशनी नहीं पहुंची है, वहां अपने प्रयास से 40 वर्षीय प्रतिमा शिक्षा की अलख जगा रही हैं।

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अपने शिक्षम अभियान के तहत जरूरतमंदों को शिक्षा के प्रति प्रेरित कर उन्हें समाज में एक पहचान दिलाना इनका मकसद है। जिससे वे दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सके। नहर पार सहित शहर की कॉलोनी, स्लम आदि में प्रतिम शिक्षा के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार के बच्चों को जागरूक कर रही है। वे सेक्टर-9 में ऐसे बच्चों के लिए विशेष स्कूल का संचालन कर रही हैं।
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प्रतिमा इस अभियान में 2014 से जुटी हुई हैं। जरूरतमंद बच्चों को बेहतर शिक्षा का मार्ग प्रशस्त कर सुनहरे भविष्य की नींव रख रही हैं। अभी तक प्रतिमा के प्रयास से ऐसे परिवारों के 73 प्रतिभावान बच्चों का विभिन्न कक्षाओं में एडमिशन निजी स्कूलों में कराया गया है।
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शिक्षम अभियान के तहत बच्चों के लिए नियमित पढ़ाई की व्यवस्था की जाती है। जो बच्चे प्रतिभावान होते हैं। उनका हर साल नामचीन निजी स्कूलों में दाखिला कराया जाता है। प्रतिमा शिक्षा के साथ स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूकता अभियान का संचालन करती हैं। बकौल प्रतिमा, जहां चाह है वहां राह अपने आप ही बन जाती है। भले ही देश तरक्की की राह पर चल रहा है लेकिन जागरूकता की काफी कमी है।

परिवार के मुखियाओं को समझना मुश्किल होता था। लेकिन मेहनत रंग लाई

Flame of Hope: pratima spreading the light of education to needy families
‌किताबें - फोटो : demo pic

आर्थिक तंगी के चलते लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते। जब अभियान की शुरुआत की थी तब ऐसे परिवार के मुखियाओं को समझना मुश्किल होता था। लेकिन मेहनत रंग लाई। गांव-गांव, स्लम औरकॉलोनियों में जाकर उन्होंने लोगों को समझाया कि बदलते समय में बेहतर शिक्षा से ही सब कुछ संभव है।

जरूरतमंद बच्चों के लिए चलाए जा रहे शिक्षम अभियान का मकसद न सिर्फ किताबी ज्ञान देना है, बल्कि बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील भी बनाया जा रहा है। स्लैड्ज हैमर फाउंडेशन के सहयोग से मुफ्त डिस्पेंसरी का भी संचालन प्रतिमा कर रही हैं।

उनके अभियान के तहत जरूरतमंद लड़कियों के लिए ब्यूटीशियन व सिलाई प्रशिक्षण का कार्यक्त्रस्म भी चलाया जा रहा है। तीन से छह माह का प्रशिक्षण देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित किया जाता है। विशेषज्ञ द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद खुद के रोजगार के बारे में बताया जाता है। जिससे वे अपना रोजगार शुरू कर दूसरों के भी खुद के कार्य के लिए प्रेरित कर सकें। इस अभियान में प्रतिमा के पति प्रदीप मोहंती भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

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