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पति की मौत के बाद नोएडा की पहली ऑटो चालक बनी शीतल, मेहनत कर पाल रही परिवार

Fri, 13 May 2016 01:47 PM IST
भव्य नरेश/अमर उजाला, नोएडा
भव्य नरेश/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 13 May 2016 01:47 PM IST
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first woman auto driver sheetal is doing hardships to run her family without husband
शीतल मह‌िला ऑटो ड्राइवर - फोटो : भव्य नरेश

बाबू जी, काम करने में किस बात की शर्म। लोगों के तानों पर ध्यान देंगे तो भूखे मर जाएंगे। काम नहीं करूंगी तो बच्चों का पेट कैसे पालूंगी और पढ़ाऊंगी कैसे? समाज में ताने कसने वालों की कमी नहीं है। चूंकि समाज में रहना है तो जीवन जीने का रास्ता भी निकालना होगा। यह पीड़ा है शहर की इकलौती ऑटो चालक विधवा शीतल की। उसने अमर उजाला से दर्द साझा किया।

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बकौल शीतल, जब जवानी में ही कोई महिला विधवा हो जाए तो उसका दर्द वह ही समझ सकती है, कोई और नहीं। लगभग पांच साल पहले पति मनोज की मेरठ में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। तब उसकी उम्र महज 30 साल थी। उस समय वह गर्भवती थी।
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इसके अलावा दो बच्चे भी थे। ससुराल मुरादनगर और मायका मेरठ के हनुमान पुरी में है। पति की मौत के बाद जिंदगी पहाड़ सी दिखने लगी। बच्चों की परवरिश कैसे होगी इस सवाल ने परेशान कर दिया। कुछ काम करने की इच्छा जताई तो लोगों ने ताने कसने शुरू कर दिए। तब शीतल ने तानों को हिम्मत बनाकर कुछ करने की ठान ली।
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नोएडा आकर सीखा ऑटो
शीतल नोएडा आकर एक कंपनी में काम करने लगी।नवादा गांव में किराये पर रहने लगी। नौकरी के साथ-साथ ऑटो चलाना सीख लिया। सबसे बड़ी परेशानी बच्चों को लेकर होने लगी। बच्चे छोटे होने के कारण उन्हें कहां रखा जाए। बच्चे साथ रहते तो काम नहीं कर सकती थी। तब उसकी मां ने ही बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी ली। बच्चे नानी के साथ मेरठ में रहकर पढ़ रहे हैं।

शहर की इकलौती महिला चालक है
शीतल ने बताया कि ऑटो चलाना महिलाओं का काम नहीं लेकिन क्या करें, बच्चे पालने हैं। पुलिस परेशान करती है लेकिन कुछ पुलिस वाले महिला होने के कारण ज्यादा परेशान नहीं करते। सवारी तो महिला को देखकर गलत नजरों से देखती हैं लेकिन बच्चों की खातिर सब सहन करना पड़ता है । जैसे-तैसे तीनों बच्चों का पालन कर रही हूं। बड़ी बेटी कक्षा 6 और बेटा कक्षा 5 में सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते हैं। तीसरा बेटा छोटा है।


15 घंटे की कड़ी मेहनत
शीतल ने बताया कि सुबह 8 बजे किराये का ऑटो लेकर निकालती हूं। रात 11 बजे तक घर पहुंचती हूं। सेक्टर-37 से मॉडल टाउन तक किराया 7 से 10 रुपये तक है। 1000 रुपये प्रतिदिन कमा पाती हूं। 550 रुपये ऑटो किराया चला जाता है।

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