{"_id":"574ac4e44f1c1b7b28108b8f","slug":"blood-bank-whatsapp-blood-bank-mata-sulakhni-bloon-service-bashindey-paras-julka-punjab","type":"story","status":"publish","title_hn":"पारस जुल्काः दो दोस्तों से व्हाट्सऐप पर ब्लड बैंक बनाया, आज 50 सदस्य","category":{"title":"Bashindey","title_hn":"बाशिंदे ","slug":"bashindey"}}
पारस जुल्काः दो दोस्तों से व्हाट्सऐप पर ब्लड बैंक बनाया, आज 50 सदस्य
टीम डिजिटल/अमर उजाला, बटाला(पंजाब)
Updated Mon, 30 May 2016 09:37 AM IST
विज्ञापन
व्हाट्सऐप पर ब्लड बैंक बनाने वाले बटाला के पारस जुल्का
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मिलिए ऐसे तीन युवकों से, जिन्होंने मिलकर दूसरों को जीवनदान देने का संकल्प लिया और इसके लिए व्हाट्सऐप ग्रुप बना डाला। इस ग्रुप से आज 50 लोग जुड़ चुके हैं। ग्रुप का नाम है माता सुलखनी ब्लड सेवा रखा है। ग्रपु का प्रमुख एडमिन बटाला निवासी वर्ष का पारस जुलका है। उसने सिविल इंजीनियरिंग में तीन साल का डिप्लोमा कर रखा है। फिलहाल पारस जुलका अपने पिता के कोल्ड ड्रिंक के बिजनेस में उनका हाथ बटा रहें हैं।
डिप्लोमा करने के बाद पारस को उसके स्तर का कोई रोजगार नही मिला तो उसने अपना जीवन मानव सेवा में समर्पित कर दिया। इस समय बटाला में यह ग्रुप एक ब्लड बैंक के रूप उभर कर सामने आया है। पारस जुलका ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने अपना यह वाट्सऐप ग्रुप 9 सितंबर 2015 को शुरू किया था। उनके साथ सहयोगी ग्रुप एडमिन पंकज पुरी और अमितपाल अरोड़ा ने भी उनकी इस मुहिम में योगदान दिया है।
पारस जुलका ने बताया कि उनके ग्रुप में 50 सदस्य हैं। ग्रुप में रक्तदान करने की भावना रखने वाले युवकों को शामिल किया गया है। इसमें गुरदासपुर, अमृतसर, पठानकोट, बटाला, लुधियाना के भी कुछ सदस्य हैं। जुलका ने जब भी किसी सदस्य को कोई ब्लड डोनेट की कॉल आती है तो इसे ग्रुप में शेयर करते हैं। सदस्यों अथवा बाहर से भी खून का प्रबंध करके जरूरतमंदों को गिया जाता है। अब तक उनका ग्रुप 31 लोगों को रक्त देकर उनकी जान बचा चुका है।
विज्ञापन
पारस ने बताया कि कुछ समय पहले नवांशहर के रहने वाले उनके मौसा लुधियाना के एक अस्पताल में दाखिल थे औैर वह कैंसर से पीड़ित थे। उन्हें ब्लड की सख्त जरूरत थी। काफी भागदौड़ के बाद ब्लड नहीं मिला। आखिरकार उनका संपर्क एक ब्लड डोनेट करने वाले ग्रुप से हुआ। ग्रुप की ओर से दिए गए ब्लड़ से उनके मौसा की जान बच गई। इस पर उन्होंने उसी दिन से यह ठान लिया कि वह भी रक्तदान ग्रुप बनाएंगे।
रक्त लेने वाले लोगों ने ग्रुप का किया शुक्रिया
बठिंडा के रहने वाले सर्बजीत सिंह ने फोन पर बताया कि कुछ समय पहले उनकी माता दलबीर कौर वासी अमृतसर को ब्रेन हैम्रेज हो गया था। मां के लिए खून की सख्त जरूरत थी। इस पर ग्रुप के सदस्यों ने रात दिन एक कर ब्लड प्रबंध किया था। बदकिस्मती से कुछ दिनों के बाद उनकी माता का देहांत हो गया था। सर्बजीत सिंह ने कहा कि वह बटाला के इस ग्रुप के सदा ही उनके ऋणी रहेंगे। इसके अलावा बटाला के रहने वाले रवि कुमार ने बताया कि ग्रुप ने उनकी मुश्किल दिनों में बहुत मदद की थी। इस समय वह बटाला में अच्छा काम कर रहें हैं। इसके अलावा गुरदासपुर के रहने वाले मनजोत सिंह ने भी इस ब्लड सेवा वाट्सऐप ग्रुप की सराहना की है।
विज्ञापन
डिप्लोमा करने के बाद पारस को उसके स्तर का कोई रोजगार नही मिला तो उसने अपना जीवन मानव सेवा में समर्पित कर दिया। इस समय बटाला में यह ग्रुप एक ब्लड बैंक के रूप उभर कर सामने आया है। पारस जुलका ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने अपना यह वाट्सऐप ग्रुप 9 सितंबर 2015 को शुरू किया था। उनके साथ सहयोगी ग्रुप एडमिन पंकज पुरी और अमितपाल अरोड़ा ने भी उनकी इस मुहिम में योगदान दिया है।
विज्ञापन
पारस जुलका ने बताया कि उनके ग्रुप में 50 सदस्य हैं। ग्रुप में रक्तदान करने की भावना रखने वाले युवकों को शामिल किया गया है। इसमें गुरदासपुर, अमृतसर, पठानकोट, बटाला, लुधियाना के भी कुछ सदस्य हैं। जुलका ने जब भी किसी सदस्य को कोई ब्लड डोनेट की कॉल आती है तो इसे ग्रुप में शेयर करते हैं। सदस्यों अथवा बाहर से भी खून का प्रबंध करके जरूरतमंदों को गिया जाता है। अब तक उनका ग्रुप 31 लोगों को रक्त देकर उनकी जान बचा चुका है।
विज्ञापन
पारस ने बताया कि कुछ समय पहले नवांशहर के रहने वाले उनके मौसा लुधियाना के एक अस्पताल में दाखिल थे औैर वह कैंसर से पीड़ित थे। उन्हें ब्लड की सख्त जरूरत थी। काफी भागदौड़ के बाद ब्लड नहीं मिला। आखिरकार उनका संपर्क एक ब्लड डोनेट करने वाले ग्रुप से हुआ। ग्रुप की ओर से दिए गए ब्लड़ से उनके मौसा की जान बच गई। इस पर उन्होंने उसी दिन से यह ठान लिया कि वह भी रक्तदान ग्रुप बनाएंगे।
रक्त लेने वाले लोगों ने ग्रुप का किया शुक्रिया
बठिंडा के रहने वाले सर्बजीत सिंह ने फोन पर बताया कि कुछ समय पहले उनकी माता दलबीर कौर वासी अमृतसर को ब्रेन हैम्रेज हो गया था। मां के लिए खून की सख्त जरूरत थी। इस पर ग्रुप के सदस्यों ने रात दिन एक कर ब्लड प्रबंध किया था। बदकिस्मती से कुछ दिनों के बाद उनकी माता का देहांत हो गया था। सर्बजीत सिंह ने कहा कि वह बटाला के इस ग्रुप के सदा ही उनके ऋणी रहेंगे। इसके अलावा बटाला के रहने वाले रवि कुमार ने बताया कि ग्रुप ने उनकी मुश्किल दिनों में बहुत मदद की थी। इस समय वह बटाला में अच्छा काम कर रहें हैं। इसके अलावा गुरदासपुर के रहने वाले मनजोत सिंह ने भी इस ब्लड सेवा वाट्सऐप ग्रुप की सराहना की है।