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Gadkari: सड़क निर्माण में 35% तक होगा बायो-बिटुमेन मिश्रण का उपयोग, सरकार का लक्ष्य 10,000 करोड़ रुपये बचाना
Thu, 08 Aug 2024 11:37 AM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 08 Aug 2024 11:37 AM IST
सार
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन में 35 प्रतिशत तक लिग्निन मिलाने की अनुमति देगी। जिसका एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात किया जाता है।
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Nitin Gadkari
- फोटो : PTI
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विस्तार
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन में 35 प्रतिशत तक लिग्निन मिलाने की अनुमति देगी। जिसका एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात किया जाता है।
बिटुमेन एक काला पदार्थ है जो कच्चे तेल के आसवन (डिस्टिलेशन) के जरिए हासिल होता है और इसका व्यापक रूप से सड़कों और छतों को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
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बिटुमेन एक काला पदार्थ है जो कच्चे तेल के आसवन (डिस्टिलेशन) के जरिए हासिल होता है और इसका व्यापक रूप से सड़कों और छतों को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
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गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा में सवालों के जवाब देते हुए कहा, "हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। 90 प्रतिशत सड़कें बिटुमिनस परतों का इस्तेमाल कर रही हैं। 2023-24 में बिटुमेन की खपत 88 लाख टन थी। 2024-25 में इसके 100 लाख टन होने की उम्मीद है। 50 प्रतिशत बिटुमेन आयात किया जाता है। और वार्षिक आयात लागत 25,000-30,000 करोड़ रुपये है।"
मंत्री ने कहा कि किसान अब न सिर्फ खाद्यान्न पैदा कर रहे हैं, बल्कि वे ऊर्जा उत्पादक भी बन गए हैं। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून ने धान की पराली से बायो-बिटुमेन विकसित किया है।
मंत्री ने कहा कि किसान अब न सिर्फ खाद्यान्न पैदा कर रहे हैं, बल्कि वे ऊर्जा उत्पादक भी बन गए हैं। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून ने धान की पराली से बायो-बिटुमेन विकसित किया है।
मंत्री ने चिंता जताई कि पराली जलाने के कारण दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या है।
उन्होंने कहा, "एक टन पराली 30 प्रतिशत बायो-बिटुमेन, 350 किलोग्राम बायो-गैस और 350 किलोग्राम बायोचार दे रही है।" उन्होंने कहा कि 35 प्रतिशत तक बायो-बिटुमेन को बिटुमेन में बदलना सफल रहा है। मंत्री ने कहा कि इससे 10,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होने की उम्मीद है और पेटेंट पहले ही जमा किया जा चुका है।
उन्होंने कहा, "एक टन पराली 30 प्रतिशत बायो-बिटुमेन, 350 किलोग्राम बायो-गैस और 350 किलोग्राम बायोचार दे रही है।" उन्होंने कहा कि 35 प्रतिशत तक बायो-बिटुमेन को बिटुमेन में बदलना सफल रहा है। मंत्री ने कहा कि इससे 10,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होने की उम्मीद है और पेटेंट पहले ही जमा किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन की कीमत 50 रुपये प्रति किलोग्राम है। जबकि बायोमास (चावल के भूसे) से बने बायो-बिटुमेन की कीमत 40 रुपये प्रति किलोग्राम है। गडकरी ने कहा कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के पास पानीपत में चावल के भूसे से प्रतिदिन एक लाख लीटर इथेनॉल बनाने की परियोजना है। इसके अलावा प्रतिदिन 150 टन बायो-बिटुमेन और प्रति वर्ष 88,000 टन बायो-एविएशन ईंधन भी बनाया जा रहा है।
मंत्री ने कहा, "...अब हमारे पास 450 परियोजनाएं हैं, जहां हम पराली (चावल के भूसे) को बायो-सीएनजी में बदल रहे हैं और हमें लिग्निन मिल रहा है। अब मेरा विभाग एक अधिसूचना आदेश जारी करने जा रहा है, जिसके तहत हम इस लिग्निन का इस्तेमाल पेट्रोलियम बिटुमेन में 35 प्रतिशत तक कर सकते हैं।"
मंत्री ने कहा, "...अब हमारे पास 450 परियोजनाएं हैं, जहां हम पराली (चावल के भूसे) को बायो-सीएनजी में बदल रहे हैं और हमें लिग्निन मिल रहा है। अब मेरा विभाग एक अधिसूचना आदेश जारी करने जा रहा है, जिसके तहत हम इस लिग्निन का इस्तेमाल पेट्रोलियम बिटुमेन में 35 प्रतिशत तक कर सकते हैं।"
गडकरी ने कहा कि ये 450 परियोजनाएं हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं। जहाँ बायोमास (पराली) को बायो-सीएनजी में बदला जा रहा है और अब लिग्निन मिल रहा है।
उन्होंने कहा, "और अब हम इसे खरीदने के लिए तैयार हैं। हम ऑर्डर जारी कर रहे हैं। इसलिए यह न सिर्फ हमारे आयात को बचाएगा, बल्कि यह वायु प्रदूषण की समस्या को हल करने जा रहा है। साथ ही, यह किसानों के लिए भी उपयोगी है।" किसानों को चावल के भूसे के लिए 2,500 रुपये प्रति टन की दर मिल सकती है।
उन्होंने कहा, "और अब हम इसे खरीदने के लिए तैयार हैं। हम ऑर्डर जारी कर रहे हैं। इसलिए यह न सिर्फ हमारे आयात को बचाएगा, बल्कि यह वायु प्रदूषण की समस्या को हल करने जा रहा है। साथ ही, यह किसानों के लिए भी उपयोगी है।" किसानों को चावल के भूसे के लिए 2,500 रुपये प्रति टन की दर मिल सकती है।
गडकरी ने कहा कि NHAI ने पारिस्थितिकी और पर्यावरण की रक्षा के लिए बहुत से पर्यावरण-अनुकूल फैसले लिए हैं।
उन्होंने कहा, "हम फ्लाई ऐश का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम 86 किलोमीटर लंबे बांस के क्रैश बैरियर का उपयोग कर रहे हैं। हम प्लास्टिक, रबर के कचरे का इस्तेमाल बिटुमेन में कर रहे हैं। हम स्टील स्लैग का उपयोग कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "हम फ्लाई ऐश का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम 86 किलोमीटर लंबे बांस के क्रैश बैरियर का उपयोग कर रहे हैं। हम प्लास्टिक, रबर के कचरे का इस्तेमाल बिटुमेन में कर रहे हैं। हम स्टील स्लैग का उपयोग कर रहे हैं।"
लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने प्रयोगशाला में बायो-बिटुमेन का मूल्यांकन और बायो-बिटुमेन से बने फुटपाथ के दीर्घकालिक प्रदर्शन का आकलन कर रही है। इसके मंत्रालय ने भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) देहरादून के सहयोग से आईआईटी रुड़की और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) नई दिल्ली को दो शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
सड़क निर्माण में बायो-बिटुमेन की उपयुक्तता का आकलन करने के लिए तीन साल की अवधि के लिए प्रदर्शन निगरानी के लिए नवंबर 2022 में एनएच-709एडी के शामली-मुजफ्फरनगर खंड पर एक परीक्षण खंड भी रखा गया है। एनएचएआई ने एनएच-40 के जोराबाट-शिलांग खंड पर बायो-बिटुमेन के साथ परीक्षण करने पर भी विचार किया है।
उन्होंने कहा कि बायो-बिटुमेन के परिकल्पित लाभों में बिटुमेन आयात में कमी, ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन में कमी और किसानों/एमएसएमई के लिए राजस्व पैदा करने और रोजगार देने के अवसर शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बायो-बिटुमेन के परिकल्पित लाभों में बिटुमेन आयात में कमी, ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन में कमी और किसानों/एमएसएमई के लिए राजस्व पैदा करने और रोजगार देने के अवसर शामिल हैं।