{"_id":"652fbfe32649d6465e0f5f85","slug":"union-minister-nitin-gadkari-explains-why-nhai-facing-difficulties-in-preparation-of-detailed-project-reports-2023-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nitin Gadkari: एनएचएआई को डीपीआर तैयार करने में कठिनाइयों का करना पड़ रहा है सामना, नितिन गडकरी ने बताई वजह","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
Nitin Gadkari: एनएचएआई को डीपीआर तैयार करने में कठिनाइयों का करना पड़ रहा है सामना, नितिन गडकरी ने बताई वजह
Wed, 18 Oct 2023 04:52 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 18 Oct 2023 04:52 PM IST
सार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) (डीपीआर) तैयार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
Nitin Gadkari
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) (डीपीआर) तैयार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि संबंधित कंपनियां नई टेक्नोलॉजी को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि सरकार नई प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित कर रही है।
'क्रिसिल इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव 2023' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्टील और सीमेंट उद्योग के बड़े खिलाड़ी कीमतें बढ़ाने के लिए गुटबंदी में शामिल हैं।
उन्होंने कहा, "...इस्पात उद्योग और सीमेंट उद्योग...जब भी उन्हें मौका मिलता है, वे कार्टेल बनाते हैं और दरें बढ़ा देते हैं।"
गडकरी के मुताबिक डीपीआर बनाने वाली कंपनियों की रेटिंग करना एक बड़ी चुनौती है।
अपने स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाने वाले गडकरी ने कहा, "एनएचएआई के लिए डीपीआर तैयार करना एक बड़ी समस्या है... किसी भी परियोजना में कहीं भी कोई सटीक डीपीआर नहीं है।"
विज्ञापन
उन्होंने कहा, "डीपीआर बनाते समय वे (डीपीआर बनाने में लगी कंपनियां) नई टेक्नोलॉजी, नए इनोवेशन, नए शोध को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और यहां तक कि डीपीआर का मानक इतना कम है कि हर जगह काम की अतिरिक्त गुंजाइश है।"
भारत में उच्च लॉजिस्टिक लागत के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत में लॉजिस्टिक लागत 14-16 प्रतिशत है, जबकि चीन में यह 8-10 प्रतिशत है।
विज्ञापन
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि सरकार नई प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित कर रही है।
'क्रिसिल इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव 2023' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्टील और सीमेंट उद्योग के बड़े खिलाड़ी कीमतें बढ़ाने के लिए गुटबंदी में शामिल हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, "...इस्पात उद्योग और सीमेंट उद्योग...जब भी उन्हें मौका मिलता है, वे कार्टेल बनाते हैं और दरें बढ़ा देते हैं।"
गडकरी के मुताबिक डीपीआर बनाने वाली कंपनियों की रेटिंग करना एक बड़ी चुनौती है।
अपने स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाने वाले गडकरी ने कहा, "एनएचएआई के लिए डीपीआर तैयार करना एक बड़ी समस्या है... किसी भी परियोजना में कहीं भी कोई सटीक डीपीआर नहीं है।"
विज्ञापन
उन्होंने कहा, "डीपीआर बनाते समय वे (डीपीआर बनाने में लगी कंपनियां) नई टेक्नोलॉजी, नए इनोवेशन, नए शोध को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और यहां तक कि डीपीआर का मानक इतना कम है कि हर जगह काम की अतिरिक्त गुंजाइश है।"
भारत में उच्च लॉजिस्टिक लागत के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत में लॉजिस्टिक लागत 14-16 प्रतिशत है, जबकि चीन में यह 8-10 प्रतिशत है।