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Used Electric Cars: सेकेंड हैंड इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे हैं? ये 3 बातें जरूर याद रखें

Fri, 21 Nov 2025 08:33 PM IST
सुयश पांडेय टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Fri, 21 Nov 2025 08:33 PM IST
सार

अगर पुरानी इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं, तो सबसे पहले उसकी बैटरी, वारंटी और दूसरी अहम जानकारियों के बारे में पूरी तरह आश्वस्त होना जरूरी है। भारत में ईवी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं, पर उनकी रीसेल वैल्यू अभी भी काफी कम है।

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Top 3 things you must consider while Buying a used electric car
अगर सेकेंड हैंड इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की सोच रहे हैं तो ये बातें ध्यान में रखें (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik

विस्तार

अगर आप एक पुरानी इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं, तो सबसे पहले उसकी बैटरी, वारंटी और दूसरी अहम जानकारियों के बारे में पूरी तरह आश्वस्त होना जरूरी है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और इसी के साथ सेकेंड-हैंड मार्केट में भी इनकी उपलब्धता बढ़ी है। लेकिन ध्यान देने योग्य बात ये है कि नई ईवी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं, पर उनकी रीसेल वैल्यू अभी भी काफी कम है। पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक कारों की वैल्यू लगभग दो गुना तेजी से गिरती है। इसका सबसे बड़ा कारण है, बैटरी की लाइफ को लेकर अनिश्चितता और उसकी महंगी रिप्लेसमेंट कॉस्ट। साथ ही हर साल नई तकनीक आने से पुराने ईवी मॉडल जल्दी पुराने लगने लगते हैं। अगर आप सेकेंड-हैंड इलेक्ट्रिक कार खरीदने जा रहे हैं तो इन बातों पर जरूर ध्यान दें।
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इलेक्ट्रिक कारों की वैल्यू जल्दी क्यों गिरती है?

ईवी कारों में बैटरी ही सबसे महंगा पार्ट होती है। अगर कीमत की बात करें तो यह कुल कीमत का 40-50% हिस्सा होता है। बैटरी का परफॉर्मेंस बनते ही धीरे-धीरे कम होना शुरू हो जाता है। इसकी लाइफ मौसम, ड्राइविंग, चार्जिंग पैटर्न जैसी चीजों से और तेजी से घट सकती है। और इसकी सबसे बड़ी दिक्कत है कि सेकेंड-हैंड ईवी में बैटरी हेल्थ की जांच के लिए कोई स्टैंडर्ड टेस्ट मौजूद नहीं है। इसी वजह से खरीदार को सही स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
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सेकेंड हैंड इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले ये 3 बातें जरूर चेक करें:

1. बैटरी वारंटी

बैटरी वारंटी पुरानी ईवी की कीमत तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाती है। अधिकतर कंपनियां 8 साल तक की बैटरी वारंटी देती हैं, लेकिन ध्यान रखें यह वारंटी सिर्फ पहले मालिक के लिए होती है। जैसे ही कार दोबारा बिकती है, बैटरी की वारंटी खत्म हो जाती है। सेकेंड-हैंड खरीदार को इसका फायदा नहीं मिलता।
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2. बैटरी रेंटल मॉडल (BaaS: Battery-as-a-Service)

भारत में कुछ कंपनियां अब BaaS मॉडल देती हैं, जिसमें आपको बैटरी अलग से खरीदने की जरूरत नहीं होती। आप सिर्फ चलाए गए किलोमीटर के हिसाब से पैसा देते हैं। बैटरी खराब होने का जोखिम काफी कम हो जाता है। लेकिन खरीदने से पहले एक बात जरूर पूछ लें- क्या यह सुविधा सेकेंड हैंड ओनर पर भी लागू होगी? इसके लिए कंपनी से कंफर्म करना जरूरी है।

3. बैटरी हेल्थ की जांच

ईवी बैटरी हर साल करीब 2-5% तक परफॉर्मेंस खो देती है। इसलिए कार की बैटरी किस साल बनी है, यह जरूर चेक करें। कार का इस्तेमाल कितना हुआ, चार्जिंग पैटर्न कैसा रहा, क्या कार गर्म या ठंडे मौसम में ज्यादा रही, पार्किंग कंडीशंस कैसी थी? ये सभी बातें बैटरी की हेल्थ पर बड़ा असर डालती हैं।
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