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हाईवे किनारे गाड़ी रोकना पड़ेगा भारी?: हादसे रोकने के लिए एनएचआई को सख्त आदेश, जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
Thu, 03 Sep 2026 05:04 PM IST
जागृति शुक्ला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Thu, 03 Sep 2026 05:04 PM IST
सार
राजस्थान के फलोदी में हुए दर्दनाक हादसे में खुद से संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एचएचएआई और कंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही कोर्ट ने कई सुझाव भी दिए हैं। आइए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देशों के बारे में...
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एनएचएआई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
देश के नेशनल हाईवे पर सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। बृहस्पतिवार को अदालत ने हाईवे पर अतिक्रमण और खड़ी गाड़ियों को दो बड़ी समस्याएं बताते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से पूछा कि इन पर नजर रखने के लिए टोल प्लाजा पर कैमरा सर्विलांस सिस्टम और मॉनिटरिंग रूम क्यों नहीं लगाए जा सकते। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच राजस्थान के फलोदी इलाके में हुए एक सड़क हादसे से जुड़े खुद संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी।
टोल प्लाजा पर मॉनिटरिंग रूम बनाने का सुझाव
सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से पेश वकील ने बताया कि हाईवे पर अनधिकृत पार्किंग की जांच के लिए नियमित निरीक्षण और गश्त के निर्देश जारी किए गए हैं। इस पर बेंच ने सवाल किया कि हाईवे पर निगरानी के लिए कैमरा सर्विलांस सिस्टम लगाने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुझाव दिया कि सभी टोल प्लाजा पर मॉनिटरिंग रूम बनाए जा सकते हैं, जहां से हाईवे की स्थिति पर नजर रखी जा सके।
अवैध पार्किंग को बताया हादसों की बड़ी वजह
कैसे हुआ था फलोदी में दर्दनाक हादसा?
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में राजस्थान के फलोदी में हुए एक सड़क हादसे का खुद से संज्ञान लिया था। यह दुर्घटना दो नवंबर को हुई थी, जिसमें एक टेम्पो ट्रैवलर सड़क पर खड़े ट्रेलर ट्रक से टकरा गई थी। हादसा भारत माला हाईवे पर मटोडा गांव के पास हुआ था। टेम्पो ट्रैवलर बीकानेर के कोलायत मंदिर से जोधपुर जा रही थी। इस दुर्घटना में 15 लोगों की जान चली गई थी।
हाईवे पर भारी वाहनों की पार्किंग पर पहले ही निर्देश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल को कई अंतरिम निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि कोई भी भारी या कमर्शियल वाहन किसी नेशनल हाईवे के कैरिजवे या पक्के शोल्डर पर पार्क या खड़ा नहीं किया जाएगा। इसमें केवल तय बे (Bay), ले-बाय (Lay-by) या रास्ते में बनी सुविधाओं वाली जगहों को अपवाद रखा गया था।
हाईवे के किनारे नए ढाबों पर भी रोक
इतना ही नहीं अदालत ने नेशनल हाईवे के राइट ऑफ वे यानी सड़क के लिए आरक्षित जमीन के भीतर नए ढाबे, भोजनालय या किसी अन्य कमर्शियल ढांचे के निर्माण या संचालन पर भी रोक लगाई थी। इसका उद्देश्य हाईवे के आसपास अनधिकृत निर्माण और ऐसी गतिविधियों को रोकना है, जो यातायात और सड़क सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
ब्लैकस्पॉट की पहचान और सूची बनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई को दुर्घटना वाले ब्लैकस्पॉट और संवेदनशील इलाकों की पहचान करने का निर्देश भी दिया था। अदालत ने नेशनल हाईवे पर मौजूद दुर्घटना वाले ब्लैकस्पॉट की विस्तृत लिस्ट जारी करने को कहा था, ताकि खतरनाक जगहों की पहचान कर वहां जरूरी सुरक्षा उपाय किए जा सकें।
नेशनल हाईवे पर हादसों का आंकड़ा क्यों चिंता बढ़ाता है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारत की कुल सड़क लंबाई में नेशनल हाईवे की हिस्सेदारी लगभग दो प्रतिशत है, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। अदालत ने यह भी कहा था कि प्रशासनिक सुस्ती या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण कोई सड़क, खासकर तेज रफ्तार वाला एक्सप्रेसवे, खतरे का गलियारा नहीं बनना चाहिए।
क्या अब कैमरों से होगी हाईवे की निगरानी?
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के ताजा सवाल के बाद हाईवे सुरक्षा में तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा तेज हो सकती है। अगर टोल प्लाजा पर कैमरा सर्विलांस और मॉनिटरिंग सिस्टम को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो हाईवे पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग जैसी समस्याओं की पहचान और निगरानी को बेहतर बनाया जा सकता है। अब अगली सुनवाई में एनएचएआई और संबंधित मंत्रालयों के अनुपालन हलफनामों से यह साफ होगा कि हाईवे सुरक्षा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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टोल प्लाजा पर मॉनिटरिंग रूम बनाने का सुझाव
सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से पेश वकील ने बताया कि हाईवे पर अनधिकृत पार्किंग की जांच के लिए नियमित निरीक्षण और गश्त के निर्देश जारी किए गए हैं। इस पर बेंच ने सवाल किया कि हाईवे पर निगरानी के लिए कैमरा सर्विलांस सिस्टम लगाने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुझाव दिया कि सभी टोल प्लाजा पर मॉनिटरिंग रूम बनाए जा सकते हैं, जहां से हाईवे की स्थिति पर नजर रखी जा सके।
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अवैध पार्किंग को बताया हादसों की बड़ी वजह
- इस मामले में अदालत की ओर से वरिष्ठ वकील एएनएस नाडकर्णी, जो एमिकस क्यूरी की भूमिका में हैं, ने हाईवे पर अवैध पार्किंग को बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे या हाईवे पर गलत तरीके से खड़ी गाड़ियां सड़क हादसों का कारण बनती हैं। खासकर तेज रफ्तार वाले हाईवे पर ऐसी गाड़ियां दूसरे वाहनों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती हैं।
- साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी गौर किया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार ने अभी तक मामले में अपने अनुपालन हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं। अदालत ने दोनों केंद्रीय मंत्रालयों को हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। वहीं, तमिलनाडु सरकार को भी अगली सुनवाई से पहले अपना अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले के आगे की सुनवाई छह अक्तूबर को होगी।
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कैसे हुआ था फलोदी में दर्दनाक हादसा?
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में राजस्थान के फलोदी में हुए एक सड़क हादसे का खुद से संज्ञान लिया था। यह दुर्घटना दो नवंबर को हुई थी, जिसमें एक टेम्पो ट्रैवलर सड़क पर खड़े ट्रेलर ट्रक से टकरा गई थी। हादसा भारत माला हाईवे पर मटोडा गांव के पास हुआ था। टेम्पो ट्रैवलर बीकानेर के कोलायत मंदिर से जोधपुर जा रही थी। इस दुर्घटना में 15 लोगों की जान चली गई थी।
हाईवे पर भारी वाहनों की पार्किंग पर पहले ही निर्देश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल को कई अंतरिम निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि कोई भी भारी या कमर्शियल वाहन किसी नेशनल हाईवे के कैरिजवे या पक्के शोल्डर पर पार्क या खड़ा नहीं किया जाएगा। इसमें केवल तय बे (Bay), ले-बाय (Lay-by) या रास्ते में बनी सुविधाओं वाली जगहों को अपवाद रखा गया था।
हाईवे के किनारे नए ढाबों पर भी रोक
इतना ही नहीं अदालत ने नेशनल हाईवे के राइट ऑफ वे यानी सड़क के लिए आरक्षित जमीन के भीतर नए ढाबे, भोजनालय या किसी अन्य कमर्शियल ढांचे के निर्माण या संचालन पर भी रोक लगाई थी। इसका उद्देश्य हाईवे के आसपास अनधिकृत निर्माण और ऐसी गतिविधियों को रोकना है, जो यातायात और सड़क सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
ब्लैकस्पॉट की पहचान और सूची बनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई को दुर्घटना वाले ब्लैकस्पॉट और संवेदनशील इलाकों की पहचान करने का निर्देश भी दिया था। अदालत ने नेशनल हाईवे पर मौजूद दुर्घटना वाले ब्लैकस्पॉट की विस्तृत लिस्ट जारी करने को कहा था, ताकि खतरनाक जगहों की पहचान कर वहां जरूरी सुरक्षा उपाय किए जा सकें।
नेशनल हाईवे पर हादसों का आंकड़ा क्यों चिंता बढ़ाता है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारत की कुल सड़क लंबाई में नेशनल हाईवे की हिस्सेदारी लगभग दो प्रतिशत है, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। अदालत ने यह भी कहा था कि प्रशासनिक सुस्ती या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण कोई सड़क, खासकर तेज रफ्तार वाला एक्सप्रेसवे, खतरे का गलियारा नहीं बनना चाहिए।
क्या अब कैमरों से होगी हाईवे की निगरानी?
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के ताजा सवाल के बाद हाईवे सुरक्षा में तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा तेज हो सकती है। अगर टोल प्लाजा पर कैमरा सर्विलांस और मॉनिटरिंग सिस्टम को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो हाईवे पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग जैसी समस्याओं की पहचान और निगरानी को बेहतर बनाया जा सकता है। अब अगली सुनवाई में एनएचएआई और संबंधित मंत्रालयों के अनुपालन हलफनामों से यह साफ होगा कि हाईवे सुरक्षा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।