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Road Safety: इस महाद्वीप पर हैं दुनिया की सबसे कम कारें, लेकिन यहीं पर होती हैं सड़कों पर सबसे ज्यादा मौतें

Sat, 05 Oct 2024 06:53 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 05 Oct 2024 06:53 PM IST
सार

अफ्रीका में किसी भी क्षेत्र की तुलना में सबसे कम सड़कें और कारें हैं। बावजूद इसके वहां वाहनों से होने वाली मौतों का अनुपात सबसे ज्यादा है। जानें क्या है इसकी वजहें। 

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This continent have fewest roads and cars of any region, and yet largest ratio of vehicle deaths Know Details
Motorcycle rider on empty road - फोटो : Freepik

विस्तार

अफ्रीका में किसी भी क्षेत्र की तुलना में सबसे कम सड़कें और कारें हैं। बावजूद इसके वहां वाहनों से होने वाली मौतों का अनुपात सबसे ज्यादा है। जिसके लिए सामान्य कारण जिम्मेदार हैं - असुरक्षित आदतें, तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना और शराब पीना। लेकिन इसके अलावा खराब बुनियादी ढांचा, अपर्याप्त बचावकर्मी और पुरानी कारें जैसी भी कुछ वजहें हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि हर जगह की तरह तेज रफ्तार, शराब और सीट बेल्ट या हेलमेट न पहनना भी मौत और चोट के मुख्य कारणों में से हैं।

लेकिन अफ्रीका में, जहां प्रतिदिन 620 ट्रैफिक दुर्घटनाएं होती हैं, ये समस्याएं खराब सड़कों, पुराने वाहनों, बेहद कम अभियोजन और आपातकालीन सेवाओं (इमरजेंसी सर्विस) की कमी के कारण और भी जटिल हो जाती हैं। 
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विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि अफ्रीका ने दक्षिण-पूर्व एशिया सहित दुनिया के बाकी हिस्सों को इस मामले में पीछे छोड़ दिया है। जहां सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। जो कि 2021 में प्रति 100,000 निवासियों पर 19.5 लोगों की मौत का रिकॉर्ड अनुपात है।

दुनिया के सिर्फ चार प्रतिशत ऑटोमोबाइल होने के बावजूद, अफ्रीका में पिछले साल सड़क दुर्घटनाओं में 19 प्रतिशत मौतें हुईं। 
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अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल फेडरेशन के पूर्व प्रमुख और अब संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के सड़क सुरक्षा के लिए विशेष दूत जीन टॉड ने कहा, "चिंता की बात यह है कि अफ्रीका में मौतों का रुझान बढ़ रहा है।"

यह महाद्वीप एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां 2010 और 2021 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में मौतों में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो 2,26,100 हो गई है। यह इजाफा अफ्रीका के आधे से ज्यादा देशों (54 में से 28) में देखा गया। 
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सबसे बड़े पीड़ित पैदल यात्री हैं, जो पर्याप्त फुटपाथों की कमी के कारण होने वाली मौतों में से एक तिहाई के लिए जिम्मेदार हैं। जबकि दुनिया भर में यह 21 प्रतिशत है। 

टॉड ने कहा, "हमें फुटपाथ, पर्याप्त साइनेज और पैदल यात्रियों के लिए लेन के साथ बेहतर डिजाइन वाली सड़कें बनाने की जरूरत है, खासकर स्कूलों के आसपास।" 

उन्होंने तेजी से शहरीकरण कर रहे महाद्वीप में सार्वजनिक परिवहन की कमी पर भी दुख जताया। शहरी नियोजन भी दोषपूर्ण है।

विश्व बैंक के परिवहन विशेषज्ञ हैलीयसस एडमटेई ने कहा, "कई अफ्रीकी देश अपने बुनियादी ढांचे को मोटर वाहनों के लिए डिजाइन करना जारी रखे हुए हैं, न कि लोगों के लिए, और सुरक्षा को मुख्य चिंता बनाए बिना।" 

'नियम कभी लागू नहीं हुए'
संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष के अनुसार, अफ्रीका की सड़कों पर चलने वाली कारों की गुणवत्ता एक प्रमुख दोषी है। जिनमें से कई 15 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेनेगल में परिवहन मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि खराब ब्रेक और घिसे हुए टायर आम हैं। और अक्सर जानलेवा भी।

प्रवक्ता ने कहा, "वाहनों की खराब स्थिति सुरक्षा की कमी का एक प्रमुख कारण है।" 

जनवरी 2023 में दो रात्रि बसों के बीच हुई आमने-सामने की टक्कर में 40 लोगों की मौत के बाद, पश्चिम अफ्रीकी देश ने कई नए नियम लागू किए। 

मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्वीकार किया, "लेकिन उनमें से ज्यादातर को कभी लागू नहीं किया गया।" 

भ्रष्टाचार का बोलबाला
कुछ नियम, जैसे कि बसों की छत पर सामान लादने पर प्रतिबंध, जिससे वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है, का ऑपरेटरों द्वारा कड़ा विरोध किया गया।

इससे कोई मदद नहीं मिलती है कि ड्राइवरों को अक्सर सिर्फ औपचारिक सबक और टेस्टिंग के साथ लाइसेंस मिल जाता है। इसे अक्सर रिश्वत देकर पूरी तरह से टाला जाता है।

भ्रष्टाचार का मतलब यह भी है कि अनुमेय कानून प्रवर्तन अक्सर कई सड़क सुरक्षा उल्लंघनों को दबा देता है। 

संयुक्त राष्ट्र ने 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या को आधा करने के लिए "कार्रवाई के एक दशक" का आह्वान किया है।

टॉड ने जोर देकर कहा कि यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और इसे सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए। 

उन्होंने कहा, "मानवीय त्रासदी से परे, सड़क दुर्घटनाएं किसी देश के विकास में मंदी का एक प्रमुख कारण भी हैं। जिसकी वजह से सकल घरेलू उत्पाद का औसतन चार से पांच प्रतिशत नुकसान होता है। कभी-कभी अफ्रीका में तो इससे भी ज्यादा।" 

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