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EV: टाटा भारत में कम ईवी आयात टैक्स के खिलाफ कर रही लामबंदी, एंट्री की ताक में है टेस्ला, रिपोर्ट में खुलासा
Fri, 08 Dec 2023 02:05 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 08 Dec 2023 02:05 PM IST
सार
टाटा मोटर्स भारतीय अधिकारियों पर दबाव डाल रही है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी (आयात कर) कम न करें और घरेलू उद्योग और उसके निवेशकों की रक्षा करें। क्योंकि सरकार टेस्ला की भारतीय बाजार में इंट्री करने के लिए योजनाओं की समीक्षा कर रही है।
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Tata Motors EV
- फोटो : Social Media
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विस्तार
टाटा मोटर्स भारतीय अधिकारियों पर दबाव डाल रही है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी (आयात कर) कम न करें और घरेलू उद्योग और उसके निवेशकों की रक्षा करें। क्योंकि सरकार टेस्ला की भारतीय बाजार में इंट्री करने के लिए योजनाओं की समीक्षा कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले की सीधी जानकारी रखनेवाले लोगों ने यह जानकारी दी।
जैसा कि भारत घरेलू मैन्युफेक्चरिंग और ईवी अपनाने को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। टेस्ला एक भारत में एक प्लांट लगाने का प्रस्ताव कर रहा है, लेकिन इलेक्ट्रिक कारों के लिए कम आयात टैक्स की मांग भी कर रहा है। भारत कुछ स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध कंपनियों के लिए ईवी पर आयात टैक्स को कम से कम 15 प्रतिशत तक कम करने की एक नई नीति पर काम कर रहा है। यह नीति टेस्ला को अपनी प्रस्तावित 24,000 डॉलर की कार बनाने के लिए भारत में अपना कारखाना लगाने की इजाजत दे सकती है। जबकि कम टैक्स के साथ टेस्ला अपने ज्यादा महंगे मॉडल का आयात कर सकती है।
टेस्ला की रणनीति पिछले साल की उसकी असफल योजना से हटकर है, जब उसने भारत को टैक्स कम करने का आग्रह किया था।
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जैसा कि भारत घरेलू मैन्युफेक्चरिंग और ईवी अपनाने को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। टेस्ला एक भारत में एक प्लांट लगाने का प्रस्ताव कर रहा है, लेकिन इलेक्ट्रिक कारों के लिए कम आयात टैक्स की मांग भी कर रहा है। भारत कुछ स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध कंपनियों के लिए ईवी पर आयात टैक्स को कम से कम 15 प्रतिशत तक कम करने की एक नई नीति पर काम कर रहा है। यह नीति टेस्ला को अपनी प्रस्तावित 24,000 डॉलर की कार बनाने के लिए भारत में अपना कारखाना लगाने की इजाजत दे सकती है। जबकि कम टैक्स के साथ टेस्ला अपने ज्यादा महंगे मॉडल का आयात कर सकती है।
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टेस्ला की रणनीति पिछले साल की उसकी असफल योजना से हटकर है, जब उसने भारत को टैक्स कम करने का आग्रह किया था।
Tata Motors EV
- फोटो : Social Media
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय और अन्य विभागों के साथ बैठकों में, टाटा ने इस योजना का विरोध किया है। टाटा ने यह तर्क दिया है कि उसके निवेशकों ने यह मानकर फैसला किया है कि स्थानीय लोगों के पक्ष में टैक्स व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा। बातचीत की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने कहा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा मोटर्स और पीएम मोदी के कार्यालय ने फिलहाल इस मामले में टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया।
टाटा यह भी तर्क दे रहा है कि भारत के ईवी खिलाड़ियों को उद्योग के शुरुआती विकास चरण में ज्यादा सरकारी समर्थन की जरूरत है। उन्होंने आयातित पेट्रोल या डीजल कारों की ओर इशारा किया, जिन पर अभी भी 100 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाता है, बावजूद इसके कि उद्योग अच्छी तरह से विकसित हो चुका है। पहले स्रोत ने यह जानकारी दी।
सूत्र ने कहा, "कम शुल्कों से पूरे (घरेलू) उद्योग पर असर पड़ेगा।" उन्होंने आगे कहा, "निवेश का माहौल खराब हो जाएगा।"
भारत के सबसे बड़े कार निर्माताओं में से एक, टाटा ने 2019 में अपना ईवी व्यवसाय शुरू किया। निजी इक्विटी फर्म टीपीजी और अबू धाबी राज्य की होल्डिंग कंपनी एडीक्यू ने 2021 में 1 अरब डॉलर का निवेश किया, और ईवी व्यवसाय का मूल्य लगभग 9 अरब डॉलर लगाया। और दूसरे स्रोत ने कहा कि विदेशी के लिए कम शुल्क खिलाड़ी भविष्य में फंड उगाहने का जोखिम उठा सकते हैं।
भारत का ईवी बाजार छोटा है, लेकिन इस साल अब तक बेची गई 72,000 इलेक्ट्रिक कारों में से 74 प्रतिशत टाटा द्वारा बनाई गई हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा मोटर्स और पीएम मोदी के कार्यालय ने फिलहाल इस मामले में टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया।
टाटा यह भी तर्क दे रहा है कि भारत के ईवी खिलाड़ियों को उद्योग के शुरुआती विकास चरण में ज्यादा सरकारी समर्थन की जरूरत है। उन्होंने आयातित पेट्रोल या डीजल कारों की ओर इशारा किया, जिन पर अभी भी 100 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाता है, बावजूद इसके कि उद्योग अच्छी तरह से विकसित हो चुका है। पहले स्रोत ने यह जानकारी दी।
सूत्र ने कहा, "कम शुल्कों से पूरे (घरेलू) उद्योग पर असर पड़ेगा।" उन्होंने आगे कहा, "निवेश का माहौल खराब हो जाएगा।"
भारत के सबसे बड़े कार निर्माताओं में से एक, टाटा ने 2019 में अपना ईवी व्यवसाय शुरू किया। निजी इक्विटी फर्म टीपीजी और अबू धाबी राज्य की होल्डिंग कंपनी एडीक्यू ने 2021 में 1 अरब डॉलर का निवेश किया, और ईवी व्यवसाय का मूल्य लगभग 9 अरब डॉलर लगाया। और दूसरे स्रोत ने कहा कि विदेशी के लिए कम शुल्क खिलाड़ी भविष्य में फंड उगाहने का जोखिम उठा सकते हैं।
भारत का ईवी बाजार छोटा है, लेकिन इस साल अब तक बेची गई 72,000 इलेक्ट्रिक कारों में से 74 प्रतिशत टाटा द्वारा बनाई गई हैं।
Tesla Supercharger
- फोटो : Social Media
टेस्ला, जो तेजी से कॉम्पीटिशन बढ़ने वाले अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी खो रहा है। उसकी नजर भारत के ऑटो बाजार की संभावनाओं पर है, जो दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। भारत में हर साल 30 लाख से ज्यादा कारें बेची जाती हैं। भारत में अभी भी ईवी की हिस्सेदारी बहुत कम है। लेकिन मोदी सरकार स्वच्छ कारों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है और यह क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है।
जून में न्यूयॉर्क में सीईओ एलन मस्क के साथ मुलाकात के बाद से मोदी सीधे तौर पर टेस्ला के साथ बातचीत की निगरानी कर रहे हैं।
घरेलू कार उद्योग ने भारत में टैक्स को कम करने की टेस्ला की पिछली योजना के खिलाफ कड़ी पैरवी की थी और सफल रहे। टाटा मोटर्स के एक कार्यकारी ने 2021 के आखिर कहा कि यह कदम सरकार के मेक-इन-इंडिया पहल के "उलट" होगा।
जून में न्यूयॉर्क में सीईओ एलन मस्क के साथ मुलाकात के बाद से मोदी सीधे तौर पर टेस्ला के साथ बातचीत की निगरानी कर रहे हैं।
घरेलू कार उद्योग ने भारत में टैक्स को कम करने की टेस्ला की पिछली योजना के खिलाफ कड़ी पैरवी की थी और सफल रहे। टाटा मोटर्स के एक कार्यकारी ने 2021 के आखिर कहा कि यह कदम सरकार के मेक-इन-इंडिया पहल के "उलट" होगा।
Piyush Goyal at Tesla Car Plant
- फोटो : Social Media
भारत सरकार का नजरिया
एक अन्य भारतीय खिलाड़ी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, जिसने सिंगापुर के टेमासेक और ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट से लगभग 400 मिलियन डॉलर जुटाए हैं, ने भी कम ईवी कर योजना के बारे में अधिकारियों के सामने चिंता जताई है। एक तीसरे सूत्र, नीति निर्धारण में शामिल एक वरिष्ठ संघीय अधिकारी, ने कहा।
महिंद्रा ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
तीसरे सूत्र ने कहा कि नई दिल्ली स्थानीय वाहन निर्माताओं की चिंताओं को शांत करने की कोशिश कर रही है। लेकिन भारत अपने लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करने के लिए विदेशी खिलाड़ियों के लिए ईवी क्षेत्र में एंट्री को आसान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मोदी चाहते हैं कि 2030 से भारत में वार्षिक कारों की बिक्री का 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक हो, जो अभी 2 प्रतिशत है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी अपनी शुरुआती अवस्था में है।
अधिकारी ने कहा, ''हम एक ऐसी नीति लेकर आएंगे जो सभी के डर को दूर करेगी।'' उन्होंने कहा कि एक विकल्प सिर्फ एक निश्चित प्राइस पॉइन्ट से ऊपर आयात टैक्स को कम करना है।
एक अन्य भारतीय खिलाड़ी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, जिसने सिंगापुर के टेमासेक और ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट से लगभग 400 मिलियन डॉलर जुटाए हैं, ने भी कम ईवी कर योजना के बारे में अधिकारियों के सामने चिंता जताई है। एक तीसरे सूत्र, नीति निर्धारण में शामिल एक वरिष्ठ संघीय अधिकारी, ने कहा।
महिंद्रा ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
तीसरे सूत्र ने कहा कि नई दिल्ली स्थानीय वाहन निर्माताओं की चिंताओं को शांत करने की कोशिश कर रही है। लेकिन भारत अपने लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करने के लिए विदेशी खिलाड़ियों के लिए ईवी क्षेत्र में एंट्री को आसान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मोदी चाहते हैं कि 2030 से भारत में वार्षिक कारों की बिक्री का 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक हो, जो अभी 2 प्रतिशत है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी अपनी शुरुआती अवस्था में है।
अधिकारी ने कहा, ''हम एक ऐसी नीति लेकर आएंगे जो सभी के डर को दूर करेगी।'' उन्होंने कहा कि एक विकल्प सिर्फ एक निश्चित प्राइस पॉइन्ट से ऊपर आयात टैक्स को कम करना है।
Elon Musk Tesla Cars
- फोटो : Amar Ujala
भारत का इस समय 100 प्रतिशत ईवी आयात टैक्स 40,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाली कारों के लिए है। जो ज्यादातर टेस्ला मॉडल पर लागू होता है। टाटा के पास तीन ईवी पेशकशें हैं, जिनकी कीमत 10,400 डॉलर से 24,000 डॉलर तक है।
भारतीय अधिकारी ने कहा, "अगर भारत को ईवी हब बनना है, तो हमें और ज्यादा निर्माताओं की जरूरत है... स्थानीय उद्योग को डरने की जरूरत नहीं है कि टेस्ला या कोई और उन्हें खत्म कर देगा।"
टेस्ला के साथ भारत की बातचीत तब हो रही है जब अन्य देश अमेरिकी दिग्गज कंपनी को लुभा रहे हैं।
इस हफ्ते, थाईलैंड के प्रधान मंत्री ने कहा कि उन्होंने जमीन की तलाश कर रहे टेस्ला के अधिकारियों को जमीन दिखाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि कंपनी देश में निवेश करेगी।
भारतीय अधिकारी ने कहा, "अगर भारत को ईवी हब बनना है, तो हमें और ज्यादा निर्माताओं की जरूरत है... स्थानीय उद्योग को डरने की जरूरत नहीं है कि टेस्ला या कोई और उन्हें खत्म कर देगा।"
टेस्ला के साथ भारत की बातचीत तब हो रही है जब अन्य देश अमेरिकी दिग्गज कंपनी को लुभा रहे हैं।
इस हफ्ते, थाईलैंड के प्रधान मंत्री ने कहा कि उन्होंने जमीन की तलाश कर रहे टेस्ला के अधिकारियों को जमीन दिखाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि कंपनी देश में निवेश करेगी।