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Tesla: टेस्ला की राह में कांटे ही कांटे, भारत तो आ जाएगी कार, लेकिन चार्ज करने में छूटेंगे पसीने, जानिए वजह
Thu, 27 Feb 2025 10:52 AM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 27 Feb 2025 10:52 AM IST
सार
Tesla Charging Infrastructure: ईवी नीति पर गौर करें तो यह देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश को सीमित करती है। अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में निवेश के लिए तैयार होती है तो वह कुल निवेश का केवल 5 प्रतिशत ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने में खर्च कर पाएगी।
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Elon Musk Tesla Car
- फोटो : Social Media
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विस्तार
भारत में टेस्ला कार तो बेचना चाहती है, लेकिन कंपनी प्लांट लगाना नहीं चाहती। इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली अमेरिकी कंपनी टेस्ला के मालिक एलन मस्क ईवी नीति के तहत छूट चाहते हैं, जो मौजूदा समय में उन्हें दूसरे देश से बनी बनाई कार को लाकर भारत में बेचे से रोक रही है। मस्क ने कहा था कि पहले वह भारत में आयातित कारों को बेचकर बाजार को समझना चाहते हैं जिसके बाद वह भारत में प्लांट लगाने का फैसला लेंगे। हालांकि, भारत की नई ईवी नीति (EV Policy) को देखें तो देश में बगैर फैक्ट्री लगाए कंपनियों का कार बेचना मुश्किल है।
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कंपनी को लगानी होगी फैकट्री
Tesla
- फोटो : iStock
ईवी नीति के तहत भारत में कार बेचने की इच्छुक कंपनी को पहले फैक्ट्री लगानी होगी, जिसके लिए उसे ईवी नीति के तहत समर्थन दिया जाएगा। नई ईवी नीति यह भी कहती है कि आयातित कारों पर लगने वाली आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) में छूट पाने के लिए कंपनी को कम से कम 4,150 करोड़ रुपये (500 मिलियन डॉलर) का शुरुआती निवेश करना होगा। ऐसा करने पर कंपनी हर साल 8,000 यूनिट कारों को 15% के रियायती आयात शुल्क पर इम्पोर्ट कर सकती है। वहीं, निवेश के पहले 5 सालों में 10,500 करोड़ रुपये का रेवेन्यू लाना जरूरी होगा। इसके अलावा, यह निवेश केवल जमीन खरीदने या बिल्डिंग बनाने के लिए नहीं किया जा सकता।
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EV नीति का चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस कम
Tesla Model Y
- फोटो : Tesla
ईवी नीति पर गौर करें तो यह देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश को सीमित कर देती है। अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में निवेश के लिए तैयार होती है तो वह कुल निवेश का केवल 5 प्रतिशत ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने में खर्च कर सकती है। पॉलिसी को इस तरह से बनाया गया है कि अगर कंपनी अपना निवेश बढ़ाती भी है तो भी उसका चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश कुल निवेश का अधिकतम 5 प्रतिशत ही होगा।
इसे ऐसे समझें कि अगर कोई कंपनी 1000 करोड़ रुपये का निवेश करती है तो वह केवल 50 करोड़ रुपये ही चार्जिंग स्टेशनों को बनाने में लगा पाएगी। यानी इलेक्ट्रिक वाहनों को बनाने के मामले में तो अच्छा-खासा निवेश आकर्षित किया जा सकता है, लेकिन चार्जिंग स्टेशनों पर निवेश सीमित ही रह जाएगा।
इसे ऐसे समझें कि अगर कोई कंपनी 1000 करोड़ रुपये का निवेश करती है तो वह केवल 50 करोड़ रुपये ही चार्जिंग स्टेशनों को बनाने में लगा पाएगी। यानी इलेक्ट्रिक वाहनों को बनाने के मामले में तो अच्छा-खासा निवेश आकर्षित किया जा सकता है, लेकिन चार्जिंग स्टेशनों पर निवेश सीमित ही रह जाएगा।
चार्जिंग स्टेशनों को लेकर चुनौतियां
Tesla
- फोटो : iStock
बता दें कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री रफ्तार पकड़ रही है। ऐसे में समय की मांग है कि पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए जाएं। टेस्ला की बात करें तो कंपनी ने अमेरिका समेत कई देशों में खुद का चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है। ऐसे में भारत में पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना टेस्ला की शुरूआत मुश्किल हो सकती है। दूसरी ओर, भारत में ईवी नीति के चलते वह खुद का चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में ज्यादा खर्च भी नहीं कर पाएगी।