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SC: सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को निर्देश, तेज गति से चलने वाले वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के प्रावधान करें

Mon, 02 Sep 2024 10:00 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 02 Sep 2024 10:00 PM IST
सार

राजमार्गों और सड़कों पर सड़क अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136 ए को लागू करने के लिए तुरंत कदम उठाने का निर्देश दिया।

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Supreme Court directs states to implement provision for electronically monitoring speeding vehicles
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

राजमार्गों और सड़कों पर सड़क अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136 ए को लागू करने के लिए तुरंत कदम उठाने का निर्देश दिया। जो अधिकारियों को तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी करने की अनुमति देता है।
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न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136ए और नियम 167ए के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों से अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया। 
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इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश चालान जारी करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरणों के इस्तेमाल के बारे में फैसला लेने के बाद, वे यह सुनिश्चित करेंगे कि एमवी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए जुर्माना इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से फुटेज के आधार पर लगाया जाए।

नियम 167ए इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरणों (स्पीड कैमरा, क्लोज्ड-सर्किट टेलीविजन कैमरा, स्पीड गन, बॉडी वियरेबल कैमरा, डैशबोर्ड कैमरा, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR), वेट-इन मशीन (WIM) और ऐसी कोई भी टेक्नोलॉजी) के रखने के लिए विस्तृत प्रावधान निर्दिष्ट करता है। 

नियम के तहत, राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना है कि इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरण राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर उच्च-जोखिम और उच्च-घनत्व वाले कॉरिडोर पर और प्रमुख शहरों में कम से कम 10 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों में और नियमों में निर्दिष्ट 132 शहरों सहित महत्वपूर्ण जंक्शनों पर रखे जाएं।

पीठ ने निर्देश दिया, "हम दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल की राज्य सरकारों को निर्देश देते हैं कि वे नियम 167ए के साथ धारा 136ए के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट इस अदालत को दें। रिपोर्ट 6 दिसंबर तक न्यायमित्र को सौंपी जाए।" 
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शीर्ष अदालत देश में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 2012 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

इसने कहा कि अदालत 11 दिसंबर को रिपोर्टों पर विचार करेगी और अन्य राज्य सरकारों को इसके लिए निर्देश जारी करेगी। 

पीठ ने नोट किया कि एमवी अधिनियम की धारा 136ए के प्रभावी प्रवर्तन के कार्यान्वयन और देश भर में रोलआउट के लिए तौर-तरीकों पर एक अवधारणा पत्र तैयार किया गया है।

"यदि अवधारणा पत्र में की गई सिफारिशों को लागू किया जाना है, तो धारा 163ए (मोटर वाहन के कारण स्थायी विकलांगता/मृत्यु के मामले में पीड़ित/दावाकर्ता का मुआवजा) के प्रावधान कुछ और वर्षों तक लागू नहीं होंगे। 

पीठ ने निर्देश दिया, "इसलिए, हम सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को तत्काल एमवी अधिनियम के नियम 167 के संदर्भ में धारा 136ए लागू करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देते हैं।"

पीठ ने 2021 में अधिनियमित धारा 136ए को "नवीन प्रावधान" करार दिया और कहा कि यह राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि सड़क अनुशासन का पालन किया जाए और एमवी अधिनियम और नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए। 

पीठ ने आदेश दिया, "यदि धारा 136ए लागू की जाती है, तो राज्य तंत्र को उन वाहनों और व्यक्तियों का डेटा मिलेगा जो एमवी अधिनियम और इसके तहत नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। और उसके अनुसार मुकदमा चलाया जा सकता है।"

पीठ ने नोट किया कि 2021 में केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन के आधार पर नियमों में नियम 167ए शामिल किया गया है। और इसके तहत, सड़क सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरणों के उपयोग के लिए 132 शहरों को अधिसूचित किया गया है। 

इसने कहा कि पहले से ही अदालत द्वारा नियुक्त एक समिति है जिसे सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट समिति कहा जाता है। और एमवी अधिनियम की धारा 136ए के कार्यान्वयन के मुद्दे की निगरानी इसके द्वारा सभी हितधारकों पर विचार करने के बाद की जा सकती है।

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