फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Automobiles News ›   Supreme Court directs Centre to constitute teams for inspecting, removing encroachments from national highways

SC: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नेशनल हाईवे से अतिक्रमण हटाने का दिया निर्देश, चेकिंग के लिए बनानी होगी टीम

Tue, 27 Aug 2024 09:14 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 27 Aug 2024 09:14 PM IST
सार

राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर अतिक्रमण पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MORTH) (एमओआरटीएच) को निर्देश दिया कि वह अनधिकृत कब्जों के लिए सड़कों के लगातार और नियमित निरीक्षण के लिए अलग-अलग टीमें गठित करें।

विज्ञापन
Supreme Court directs Centre to constitute teams for inspecting, removing encroachments from national highways
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर अतिक्रमण पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MORTH) (एमओआरटीएच) को निर्देश दिया कि वह अनधिकृत कब्जों के लिए सड़कों के लगातार और नियमित निरीक्षण के लिए अलग-अलग टीमें गठित करें।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मंत्रालय को एक पोर्टल बनाने का भी निर्देश दिया। जहां लोग राजमार्गों पर अतिक्रमण के बारे में रिपोर्ट कर सकें और तस्वीरें अपलोड कर सकें।
विज्ञापन


केंद्र को पोर्टल का व्यापक प्रचार करने का निर्देश देते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि एक टोल-फ्री नंबर भी स्थापित किया जाए जहां लोग राजमार्गों पर अतिक्रमण और अनधिकृत कब्जों के बारे में रिपोर्ट कर सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

शीर्ष अदालत ज्ञान प्रकाश नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग (भूमि और यातायात) अधिनियम, 2002 के प्रावधानों को लागू करने और राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने के लिए विभिन्न निर्देश मांगे थे।

अधिवक्ता स्वाति घिल्डियाल को शीर्ष अदालत ने इस मामले में मदद करने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि 18 मार्च, 2020 को मंत्रालय द्वारा एक सर्कुलर जारी किया गया था। जिसके तहत अतिक्रमण के लिए राजमार्गों का लगातार निरीक्षण करने के लिए टीमों का गठन किया जाना था।

उन्होंने कहा कि अगर राजमार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण को रोका जाना है, तो यह जरूरी है कि उचित टीमें राजमार्गों का लगातार निरीक्षण करें और अतिक्रमण हटाने के लिए सक्षम प्राधिकारी को रिपोर्ट करें, यदि कोई हो।

पीठ ने मंत्रालय को राजमार्गों के निरीक्षण के लिए उचित टीमें बनाने का निर्देश दिया। और राज्य सरकारों को राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने में टीमों की सहायता करने को कहा।

इसने केंद्र को 30 सितंबर तक अपने निर्देश का पालन करने को कहा और मंत्रालय को 18 मार्च, 2020 को जारी अपने सर्कुलर के अनुसार की गई कार्रवाई पर डेटा पेश करने का निर्देश दिया। जहां राष्ट्रीय राजमार्गों और उन पर अतिक्रमण के निरीक्षण के लिए टीमें गठित की जानी थीं।

यह दर्शाते हुए कि यह राज्य राजमार्गों के संबंध में भी निर्देश पारित करेगा। पीठ ने मामले को 14 अक्तूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

30 अप्रैल को, शीर्ष अदालत ने कहा कि वह राष्ट्रीय राजमार्गों का लगातार निरीक्षण करने के लिए 18 मार्च, 2020 के परिपत्र के अनुसार टीमों का गठन करने के संबंध में MORTH द्वारा प्रदान किए गए डेटा से संतुष्ट नहीं थी।

शीर्ष अदालत ने कहा था, "प्राथमिक रूप से, हम राजमार्गों पर अतिक्रमण हटाने के संबंध में राष्ट्रीय राजमार्ग (भूमि और यातायात) अधिनियम, 2002 की धारा 26 में निर्धारित किए गए अनुसार, जब अतिक्रमण हटाने की बात आती है तो उक्त आंकड़ों से प्रतिबिंबित कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं।"

इसने मंत्रालय को एक विशिष्ट शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गों पर किए गए निरीक्षणों का डिटेल्स और असम, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में राजमार्गों पर किए गए अतिक्रमण हटाने के कार्यों को रिकॉर्ड पर रखा जाए। 

इसने 30 जून, 2024 तक इन राज्यों में निरीक्षण दल द्वारा किए गए निरीक्षण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का डेटा मांगा था।

पीठ ने उल्लेख किया था कि MORTH द्वारा दायर पिछले शपथ पत्र के अनुसार, ऐसा लगता है कि अप्रैल, 2023 से ही राजमार्गों पर बड़ी संख्या में अतिक्रमण के संबंध में नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन कुछ संरचनाओं/कब्जों के संबंध में ही हटाने की कार्रवाई की गई प्रतीत होती है।

यह भी निर्देश दिया कि, "सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय संबंधित राज्यों का ध्यान इस ओर आकर्षित करेगा। हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि जहां भी 2002 अधिनियम की धारा 26 के तहत कार्रवाई करने के लिए स्थानीय प्रशासन और स्थानीय पुलिस की सहायता की आवश्यकता होगी, वहां राज्य के प्राधिकारियों द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी। मंत्रालय इस आदेश की एक प्रति राज्यों के सभी संबंधित राजस्व एवं पुलिस प्राधिकारियों को भेजेगा।" 

20 फरवरी को, शीर्ष अदालत ने चिन्हित किया कि विभिन्न राजमार्ग प्रशासनों के अधिकार क्षेत्र में राजमार्गों का सर्वेक्षण करने के लिए कोई मशीनरी नहीं बनाई गई है। ताकि यह पता चल सके कि क्या अनाधिकृत संरचनाएं या राजमार्ग भूमि का अनधिकृत कब्जा है।

शीर्ष अदालत ने कहा, "जब तक सर्वेक्षण नियमित रूप से नहीं किया जाता है, राजमार्ग प्रशासनों को यह जानने का कोई स्रोत नहीं होगा कि क्या राजमार्ग भूमि का कोई अनाधिकृत कब्जा है। न्यायिक नोटिस लेना होगा कि भारत के विभिन्न हिस्सों में राजमार्ग भूमि पर अनाधिकृत अतिक्रमण हैं।"

इसने कहा कि 2002 के कानून के तहत यह प्रावधान है कि जब राजमार्ग पर भीड़भाड़ हो जाए या वह वाहनों तथा पैदल यातायात के लिए असुरक्षित हो जाए तो राजमार्ग प्राधिकरण को हस्तक्षेप करना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने उल्लेख किया था कि नागरिकों को राजमार्ग भूमि के अनाधिकृत कब्जे और भीड़भाड़ की शिकायत करने के लिए कोई मशीनरी प्रदान नहीं की गई है।

इसने कहा था कि मंत्रालय के हलफनामे से ऐसा लगता है कि मशीनरी सिर्फ कागजों पर ही उपलब्ध है। और 2002 अधिनियम के प्रावधानों का कोई प्रभावी कार्यान्वयन नहीं है।

न्यायालय ने आदेश दिया था, ''हम राजमार्ग प्रशासन को एक योजना बनाने का निर्देश देते हैं, जिसमें राजमार्गों का नियमित निरीक्षण, शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना और शिकायतों के आधार पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था होगी।'' 

शीर्ष अदालत ने कहा था कि विभिन्न राजमार्ग प्रशासनों की नियुक्ति के बाद भारत सरकार की भूमिका खत्म नहीं हो जाती है। और यह सुनिश्चित करना केंद्र का कर्तव्य है कि राजमार्ग प्रशासन प्रभावी ढंग से काम करें। और कानून के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed