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Auto Sales: पेट्रोल-डीजल की कीमतें थमीं तो ऑटो बाजार पकड़ सकता है रफ्तार, जानें कौन से सेगमेंट्स मारेंगे बाजी

Mon, 22 Jun 2026 07:56 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 22 Jun 2026 07:56 PM IST
सार

गोल्डमैन साच्स का कहना है कि अगर ईंधन की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो स्कूटर, प्रीमियम मोटरसाइकिल और एंट्री-लेवल कारों की मांग तेजी से सुधर सकती है। जानें किस आधार पर यह अनुमान जताया जा रहा है।

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Stable Fuel Prices Could Boost Scooter and Entry-Level Car Sales in India, Says Goldman Sachs
Vehicles Market - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अगर आने वाले समय में ईंधन की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो भारत के ऑटोमोबाइल बाजार के कुछ प्रमुख सेगमेंट में मांग तेजी से वापस लौट सकती है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन साच्स की एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्षों के ईंधन मूल्य वृद्धि चक्रों का अध्ययन करने पर यह पाया गया कि जैसे ही ईंधन की कीमतों पर दबाव कम हुआ, कुछ वाहन श्रेणियों में बिक्री सबसे तेजी से सुधरी।

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किन वाहन श्रेणियों में सबसे तेज वापसी देखी गई?

गोल्डमैन साच्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन कीमतों में स्थिरता आने के बाद इन श्रेणियों में मांग सबसे तेजी से लौटती रही है:

  • स्कूटर
  • प्रीमियम मोटरसाइकिल
  • एंट्री-लेवल कारें
  • प्रीमियम हैचबैक

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के छह अलग-अलग चरणों का विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन में वाहन बिक्री के आंकड़ों और स्थानीय पेट्रोल-डीजल कीमतों का इस्तेमाल किया गया।

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रिपोर्ट में किस तरह का विश्लेषण किया गया?

इस फर्म ने पिछले एक दशक में ऐसे छह चरणों का अध्ययन किया, जब ईंधन कीमतों में 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई थी।

इस विश्लेषण में शामिल थे:

  • विभिन्न वाहन श्रेणियों की बिक्री वृद्धि
  • स्थानीय पेट्रोल और डीजल कीमतों के आंकड़े
  • ईंधन कीमतों में नरमी आने के बाद मांग की वापसी की रफ्तार

रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी कम होते ही दोपहिया और पैसेंजर वाहन सेगमेंट ने सबसे तेज रिकवरी दिखाई।

कमर्शियल वाहनों की रिकवरी क्यों धीमी रहती है?

रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन कीमतों के झटके के बाद कमर्शियल वाहन सेगमेंट की मांग को वापस पटरी पर आने में अधिक समय लगता है।

इसके उलट:

  • पैसेंजर वाहन
  • दोपहिया वाहन

परिचालन लागत स्थिर होने के बाद अपेक्षाकृत तेजी से सुधार दिखाते हैं।

क्या मानसून भी ऑटो सेक्टर को प्रभावित कर सकता है?

रिपोर्ट में मौसम को भी ऑटो उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत कमजोर रही है।
  • 17 जून 2026 तक मानसून अपने पहले 17 दिनों में देशभर में सामान्य स्तर से लगभग 38 प्रतिशत कम रहा है।

कमजोर मानसून से किन सेगमेंट पर असर पड़ सकता है?

रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून की कमजोर शुरुआत वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी वाहन श्रेणियों को प्रभावित कर सकती है।

विशेष रूप से:

  • ट्रैक्टरों की मांग
  • एंट्री-लेवल मोटरसाइकिलों की बिक्री

पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

क्या वाहन कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव बढ़ रहा है?

रिपोर्ट बताती है कि ऑटो कंपनियों के लिए इनपुट लागत बढ़ने की चिंता भी जताई है।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • धातुओं की बढ़ती कीमतें जून तिमाही में मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं।
  • वाहन निर्माताओं द्वारा कीमतें बढ़ाने के बावजूद यह दबाव बना रह सकता है।

फर्म का अनुमान है कि:

  • पहली तिमाही FY27E में धातु कीमतों का सकल मार्जिन पर प्रभाव 180 से 220 बेसिस प्वाइंट के बीच रह सकता है।
  • ऑटो कंपनियों के सकल मार्जिन पर कुल प्रभाव 40 से 190 बेसिस प्वाइंट के बीच रहने की संभावना है।

त्योहारी सीजन से पहले क्या संकेत मिल रहे हैं?

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं कम होने और उत्पादन सामान्य होने के कारण इन्वेंट्री स्तर में सुधार देखा जा रहा है।

गोल्डमैन साच्स के मुताबिक:

  • जिन कंपनियों ने सप्लाई संबंधी बाधाओं को दूर कर लिया है, उनकी थोक बिक्री (होलसेल) की रफ्तार खुदरा बिक्री (रिटेल) से आगे रह सकती है।
  • इसका समर्थन नए उत्पाद लॉन्च और स्टॉक भरने की प्रक्रिया से भी मिलेगा।

आगे ऑटो उद्योग की दिशा क्या तय करेगी?

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में भारतीय ऑटो बाजार की स्थिति मुख्य रूप से तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी:

  • ईंधन कीमतों का रुख
  • मानसून का प्रदर्शन
  • लागत नियंत्रण की क्षमता

अगर ईंधन कीमतें स्थिर रहती हैं और अन्य परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो स्कूटर, प्रीमियम मोटरसाइकिल, एंट्री-लेवल कारों और प्रीमियम हैचबैक सेगमेंट में मांग की वापसी अपेक्षा से तेज हो सकती है।



 
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