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Train to Sikkim: सिक्किम के लिए चलेगी ट्रेन, 14 में से 10 सुरंगों में खनन का काम पूरा, जानें डिटेल्स
Sat, 13 Apr 2024 08:59 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 13 Apr 2024 08:59 PM IST
सार
सिमोक-रंगपो रेल परियोजना (एसएसआरपी) को पूरा करने की एक नई समय सीमा निर्धारित की गई है। यह परियोजना, 14 में से 10 सुरंगों में खुदाई का काम पूरा होने के साथ ही, सिक्किम को पहली बार रेल नेटवर्क के जरिए देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगी।
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- फोटो : iStock
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विस्तार
Sivok-Rangpo Rail Project (SRRP), सिमोक-रंगपो रेल परियोजना (एसएसआरपी) को अगस्त 2025 तक पूरा करने की एक नई समय सीमा निर्धारित की गई है। यह परियोजना, 14 में से 10 सुरंगों में खुदाई का काम पूरा होने के साथ ही, सिक्किम को पहली बार रेल नेटवर्क के जरिए देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
यह परियोजना, सिवोक (पश्चिम बंगाल) से रंगपो (सिक्किम) के बीच कुल 44.96 किमी लंबी है। जिसमें 14 सुरंगें, 22 पुल (13 प्रमुख और 9 छोटे) और पांच रेलवे स्टेशन शामिल हैं। जैसे सिवोक, रियांग, तीस्ता बाजार, मेली और रंगपो।
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यह परियोजना, सिवोक (पश्चिम बंगाल) से रंगपो (सिक्किम) के बीच कुल 44.96 किमी लंबी है। जिसमें 14 सुरंगें, 22 पुल (13 प्रमुख और 9 छोटे) और पांच रेलवे स्टेशन शामिल हैं। जैसे सिवोक, रियांग, तीस्ता बाजार, मेली और रंगपो।
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इस समय, देश के अन्य हिस्सों से गुवाहाटी की ओर जाने वाली ट्रेनें सिवोक रेलवे स्टेशन से होकर गुजरती हैं। जो अब रियांग, तीस्ता और मेली (सभी पश्चिम बंगाल में) के रास्ते रंगपो के लिए एक नए रेल रूट का मार्ग प्रशस्त करती है। अधिकारी ने बताया कि "14 सुरंगों में से 10 में खनन कार्य पूरा हो चुका है। 10 में से चार सुरंगों में हमने लाइनिंग का काम पूरा कर लिया है और बाकी छह में काम चल रहा है। सबसे लंबी सुरंग 5.3 किमी और सबसे छोटी 538 मीटर है।”
उन्होंने आगे कहा, "13 प्रमुख पुलों में से 12 उप-संरचना के साथ तैयार हैं। पियर (पुल-17 का) की अधिकतम ऊंचाई 85 मीटर है, जिसका निर्माण अपने आप में एक कठिन काम था। परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू यह है कि कुल रेल लाइन का 86 प्रतिशत सुरंगों से होकर गुजरता है और पांच प्रतिशत पुलों के ऊपर से गुजरता है। सिर्फ नौ प्रतिशत खुले आसमान के नीचे है।”
उन्होंने आगे कहा, "13 प्रमुख पुलों में से 12 उप-संरचना के साथ तैयार हैं। पियर (पुल-17 का) की अधिकतम ऊंचाई 85 मीटर है, जिसका निर्माण अपने आप में एक कठिन काम था। परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू यह है कि कुल रेल लाइन का 86 प्रतिशत सुरंगों से होकर गुजरता है और पांच प्रतिशत पुलों के ऊपर से गुजरता है। सिर्फ नौ प्रतिशत खुले आसमान के नीचे है।”
अगस्त 2025 की समय सीमा को पूरा करने में चुनौती के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा, "हमें टी-8 और टी-10 में चट्टानों की बहुत खराब परतों के कारण महत्वपूर्ण निचोड़/विकृति का अनुभव हुआ। हमने इसे सीमेंट समेकन, ग्राउटिंग और डिजाइन के मुताबिक प्राथमिक समर्थन में बढ़ोतरी करके कंट्रोल करने के लिए जरूरी उपाय किए।"
उन्होंने कहा, "इस मुद्दे को हल करने के लिए कई अन्य सुधारात्मक उपाय किए गए थे। हालांकि, चुनौतीपूर्ण चट्टान स्थितियों के कारण प्रगति धीमी रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रोजेक्ट इंजीनियरों ने खास तरीकों को अपनाया है।" परियोजना के अधिकारियों का कहना है कि तीस्ता बाजार स्टेशन, जो देश का पहला भूमिगत रेलवे स्टेशन है, भी अंतिम चरण के कार्य के साथ पूरा होने वाला है।
उन्होंने कहा, "इस मुद्दे को हल करने के लिए कई अन्य सुधारात्मक उपाय किए गए थे। हालांकि, चुनौतीपूर्ण चट्टान स्थितियों के कारण प्रगति धीमी रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रोजेक्ट इंजीनियरों ने खास तरीकों को अपनाया है।" परियोजना के अधिकारियों का कहना है कि तीस्ता बाजार स्टेशन, जो देश का पहला भूमिगत रेलवे स्टेशन है, भी अंतिम चरण के कार्य के साथ पूरा होने वाला है।
इरकॉन के अधिकारी ने कहा, "हम मई के आखिर से सुरंग 14 से रेल की पटरियां बिछाना शुरू कर देंगे जो रंगपो में पड़ती है।" उन्होंने कहा, "चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और ऊबड़-खाबड़ इलाके का सामना करने के बावजूद, एसएसआरपी टीम लगातार प्रगति कर रही है। 4 अक्टूबर 2023 को तीस्ता नदी पर आई बाढ़ के कारण पिछले चार महीनों में सिवोक से रंगपो तक एनएच-10 के साथ संपर्क में समस्या पैदा होने के कारण सुरंग, पुल और यार्ड कार्यों काफी प्रभावित हुए हैं।"
हालांकि इस परियोजना को 2009-10 में ही मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण और वन विभाग की अनुमति में देरी ने इसकी प्रगति को धीमा कर दिया। क्योंकि रेल लाइन महानांद वन्यजीव अभयारण्य, कर्सियांग वन मंडल, दार्जिलिंग वन मंडल, कलिम्पोंग वन मंडल और पूर्वी सिक्किम वन मंडल से होकर गुजरती है।
कोविड महामारी के कारण भी परियोजना का काम काफी प्रभावित हुआ। मार्च 2020 से सितंबर 2020 और दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 तक काम रुका रहा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सुरंगों, पुलों और यार्डों के सभी टेंडर दे दिए गए हैं और काम चल रहा है।
कोविड महामारी के कारण भी परियोजना का काम काफी प्रभावित हुआ। मार्च 2020 से सितंबर 2020 और दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 तक काम रुका रहा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सुरंगों, पुलों और यार्डों के सभी टेंडर दे दिए गए हैं और काम चल रहा है।