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Google Maps: कर्नाटक के कोडागु का साइनबोर्ड हुआ वायरल, इंटरनेट पर लोगों ने कहा- गूगल मैप्स पर कभी भरोसा न करें

Tue, 19 Mar 2024 07:41 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 19 Mar 2024 07:41 PM IST
सार

Google Maps (गूगल मैप्स) 2005 में लॉन्च हुआ था। और तब से यह हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। हालांकि, कभी-कभी पुराने जीपीएस डेटा या तकनीकी समस्याओं के कारण गूगल मैप्स गलत दिशा-निर्देश दे सकता है। जिससे हमें उस जगह पर ले जाया जा सकता है, जहां जाने का हमारा इरादा नहीं था। ऐसा ही मामला समाने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 

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Signboard Viral on Social media users say never rely on Google Maps
Viral Signboard - फोटो : X

विस्तार

Google Maps (गूगल मैप्स) 2005 में लॉन्च हुआ था। और तब से यह हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। यह एप न सिर्फ हमें हमारी चाही हुई जगह पर पहुंचने में मदद करता है। बल्कि रियल टाइम ट्रैफिक अपडेट भी देता है। और आस-पास के व्यापारों, रेस्तरांओं और आकर्षणों को खोजने में हमारी मदद करता है। हालांकि, कभी-कभी पुराने जीपीएस डेटा या तकनीकी समस्याओं के कारण गूगल मैप्स गलत दिशा-निर्देश दे सकता है। जिससे हमें उस जगह पर ले जाया जा सकता है, जहां जाने का हमारा इरादा नहीं था।
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तो, कर्नाटक के कोडागु जिले में जब स्थानीय लोगों को एहसास हुआ कि गूगल मैप्स के कारण यात्री इस इलाके में खो जा रहे हैं। तो उन्होंने एक साइनबोर्ड लगा दिया, जिस पर लिखा था "गूगल गलत है"। उन्होंने ऐसा लोगों को सही रास्ते से क्लब महिंद्रा रिसॉर्ट तक पहुंचने में मदद करने के लिए किया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई तस्वीर के कैप्शन में लिखा है, "कर्नाटक में किसी जगह पर।" तस्वीर में एक साइनबोर्ड दिख रहा है जिस पर लिखा है "गूगल गलत है! यह रास्ता क्लब महिंद्रा की ओर नहीं जाता है।"
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस ट्वीट को देखें:



यह ट्वीट 14 मार्च को एक्स पर शेयर किया गया था। तब से इसे 48,000 से ज्यादा बार देखा गया है और 1,200 से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। इस पोस्ट पर लोगों के ढेरों कमेंट्स भी आए हैं।
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लोगों ने इस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। 

एक व्यक्ति ने पोस्ट किया, "सिर्फ पहाड़ी क्षेत्रों में ही गूगल मैप्स गुमराह नहीं करता है। एक बार लखनऊ में, एक संस्थान की तलाश में, मैं एक आवासीय कॉलोनी में जा पहुंचा! मुंबई में एक अन्य उदाहरण में, वोडाफोन गैलरी की तलाश में, मैं एक गैरेज में पहुंच गया।"

दूसरे व्यक्ति ने आधिकारिक गूगल मैप्स और गूगल इंडिया के हैंडल को टैग करते हुए लिखा, "क्या आप इस रास्ते को सही करने का ध्यान रखेंगे?"

तीसरे व्यक्ति ने बताया, "एक बार जब हम पहाड़ों पर चढ़ते हैं, तो गूगल हमेशा गलत रास्ता बताता है। एक बार मुझे याद है कि हम कूर्ग सुब्रमण्या से सुलिया होते हुए मडिकेरी कैसे गए थे। गूगल ने हमें एक जगह अचानक दाएं मोड़ पर ले गया, और हम 80 किमी से ज्यादा दूर चले गए। हमनें जब महसूस किया कि हम गलत रास्ते पर हैं और तब एक स्थानीय व्यक्ति ने हमें सही रास्ता बताया।"

चौथे ने साझा किया, "कभी-कभी सुझावों के बावजूद गूगल सही सड़क के नाम देने से इंकार कर देता है।"

पांचवें व्यक्ति ने टिप्पणी की, "बिलकुल सच। गूगल मैप्स हमेशा सही नहीं होते हैं। पिछले हफ्ते, मेरी बहन सकलेशपुर गई और गूगल मैप्स के बताए रास्ते पर चली। जिसने आखिरकार उन्हें एक बंद रास्ते पर ले जा पहुंचाया और कार खराब सड़क में फंस गई। सौभाग्य से, कुछ स्थानीय लोगों ने उनकी मदद की। हिल स्टेशनों पर जाने के दौरान कभी भी नेविगेशन पर भरोसा न करें।"
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