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EV: इंटरसिटी डीजल बसों की रेट्रोफिटिंग से पैदा हो सकती हैं 50,000 से ज्यादा नौकरियां, रिपोर्ट में दावा
Mon, 01 Jul 2024 04:31 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 01 Jul 2024 04:31 PM IST
सार
एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतर-राज्यीय (इंटरसिटी) डीजल यात्री बसों में रेट्रोफिटिंग को अपनाने से रोजगार के मौके बढ़ सकते हैं।
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Electric Bus (For Representation only)
- फोटो : Freepik
विस्तार
एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतर-राज्यीय (इंटरसिटी) डीजल यात्री बसों में रेट्रोफिटिंग को अपनाने से रोजगार के मौके बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले कुछ वर्षों में 6000-7000 प्रत्यक्ष नौकरियां और 36,000-42,000 नई अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।
क्या होती है रेट्रोफिटिंग
मौजूदा इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने को रेट्रोफिटिंग कहते हैं। इस प्रक्रिया में मूल इंजन और उससे संबंधित किसी भी हिस्से को निकालकर एक नए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के साथ बदल दिया जाता है। जिसे मौजूदा वाहन बॉडी के अंदर लगाया जाएगा।
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क्या होती है रेट्रोफिटिंग
मौजूदा इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने को रेट्रोफिटिंग कहते हैं। इस प्रक्रिया में मूल इंजन और उससे संबंधित किसी भी हिस्से को निकालकर एक नए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के साथ बदल दिया जाता है। जिसे मौजूदा वाहन बॉडी के अंदर लगाया जाएगा।
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इस रिपोर्ट को इकोनॉमिक ग्रोथ एंड वेलफेयर फाउंडेशन (EGROW फाउंडेशन) और प्राइमस पार्टनर्स के सहयोग से संयुक्त रूप से तैयार किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर देश सालाना 20,000 बसों को रेट्रोफिट करता है, तो यह लगभग 500,000 टन डीजल बचा सकता है। और कच्चे तेल के आयात को सालाना 12.7 मिलियन बैरल कम कर सकता है। यह उद्योग 2047 तक भारत के 30-35 मिलियन नए हरित रोजगार पैदा करने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
रेट्रोफिटिंग के फायदों को रेखांकित करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि रेट्रोफिट बसें पारंपरिक और नई इलेक्ट्रिक बसों की तुलना में परिचालन और रखरखाव लागत को काफी कम कर देती हैं। विशेष रूप से, इनकी लाइफ और रोजमर्रा के संचालन मापदंडों को ध्यान में रखते हुए, रेट्रोफिटेड बसों के लिए प्रति किलोमीटर लागत काफी कम हो जाती है। जो रेट्रोफिटिंग के लिए आर्थिक तर्क को मजबूत करती है।
रिपोर्ट ने इस प्रक्रिया के वित्तीय फायदे का भी विश्लेषण किया और कहा कि यह रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) जल्दी हासिल करने में मदद करता है। जिससे यह बस बेड़े के संचालकों और सरकारी अधिकारियों दोनों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन जाता है।
रिपोर्ट ने इस प्रक्रिया के वित्तीय फायदे का भी विश्लेषण किया और कहा कि यह रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) जल्दी हासिल करने में मदद करता है। जिससे यह बस बेड़े के संचालकों और सरकारी अधिकारियों दोनों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन जाता है।
रेट्रोफिटिंग को अपनाने के फायदों को उजागर करते हुए, रिपोर्ट बताती है कि एक ICE बस की लागत 29 रुपये प्रति किमी से ज्यादा है। जबकि एक इलेक्ट्रिक बस की लागत 28 रुपये प्रति किमी है। इसके उलट, 9 मीटर की रेट्रोफिटेड बस की लागत 19 रुपये प्रति किमी, दो बैटरी वाली 12 मीटर की रेट्रोफिटेड बस की लागत लगभग 22 रुपये प्रति किमी और तीन बैटरी वाली 12 मीटर की रेट्रोफिटेड बस की लागत 23 रुपये प्रति किमी से थोड़ी ज्यादा है। इस तरह 9-मीटर की रेट्रोफिटेड बसें नई ईवी बस की तुलना में 32.1 प्रतिशत ज्यादा लागत प्रभावी हैं। 9-मीटर की रेट्रोफिटेड बस सबसे किफायती ऑप्शन है।
इसने भारत में रेट्रोफिटेड बसों की संख्या बढ़ाने के लिए विशिष्ट नीतियों का सुझाव देते हुए नीतिगत सिफारिशों को भी रोशनी डाली।
रिपोर्ट में कहा गया है कि "सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए FAME (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक वाहिकल्स) नीति में रेट्रोफिटिंग इंसेंटिव को भी शामिल करना चाहिए।"
जीएसटी मानदंड, मौजूदा वाहन स्क्रैपिंग नीति को संशोधित करना और राज्य के रेट्रोफिट ईवी नीतियों पर दोबारा विचार करना, रिपोर्ट की शीर्ष नीतिगत सिफारिशों में शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि "सरकार को इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए FAME (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक वाहिकल्स) नीति में रेट्रोफिटिंग इंसेंटिव को भी शामिल करना चाहिए।"
जीएसटी मानदंड, मौजूदा वाहन स्क्रैपिंग नीति को संशोधित करना और राज्य के रेट्रोफिट ईवी नीतियों पर दोबारा विचार करना, रिपोर्ट की शीर्ष नीतिगत सिफारिशों में शामिल हैं।
रिपोर्ट के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, EGROW फाउंडेशन के सीईओ डॉ. चरण सिंह और प्राइमस पार्टनर्स के अध्यक्ष दविंदर संधू ने अपने प्रस्तावना में कहा, "इस दृष्टिकोण के आर्थिक लाभ बहुत बड़े हैं। जो सिर्फ वित्तीय बचत से आगे बढ़कर व्यापक आर्थिक पुनरोद्धार और पर्यावरण सुधार तक फैले हुए हैं। रेट्रोफिटिंग एक व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है। जो मौजूदा बुनियादी ढांचे का लाभ उठाते हुए क्लीन मोबिलिटी को अपनाता है। यह टिकाऊ शहरी परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जो दर्शाता है कि कैसे इनोवेशन और पॉलिसी अलाइनमेंट (नीति संरेखण) ठोस प्रगति को आगे बढ़ा सकते हैं।"