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RDSO: रेलवे को होगा फायदा, 15 प्रतिशत मिथेनॉल मिश्रित डीजल से सालाना 2280 करोड़ रुपये की होगी बचत
Thu, 02 Nov 2023 02:44 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 02 Nov 2023 02:44 PM IST
सार
आरडीएसओ ने आईओसीएल के साथ मिलकर हाई हॉर्सपावर लोकोमोटिव इंजन के लिए 15 प्रतिशत मेथनॉल मिश्रित डीजल के निर्माण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इससे रेलवे को सालाना 2,280 करोड़ रुपये की बचत होगी।
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भारतीय रेल
- फोटो : For Reference Only
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विस्तार
डीजल पर निर्भरता कम करने के भारतीय रेलवे काफी समय से कोशिश कर रही है। इन कोशिशों को बड़ा बढ़ावा देते हुए, रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन) (आरडीएसओ) ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के साथ मिलकर हाई हॉर्सपावर लोकोमोटिव इंजन के लिए 15 प्रतिशत मेथनॉल मिश्रित डीजल के निर्माण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इससे रेलवे को सालाना 2,280 करोड़ रुपये की बचत होगी।
इस समय, भारतीय रेलवे लोकोमोटिव इंजनों के लिए 1.6 अरब लीटर डीजल की खपत के लिए 15,200 करोड़ रुपये खर्च करता है।
आईओसीएल ने MD15 नाम के एक फ्यूल टाइप विकसित किया है। यह डीजल और मेथनॉल का मिश्रण है जिसमें (v/v) 71 प्रतिशत खनिज डीजल, 15 प्रतिशत मिथेनॉल और 14 प्रतिशत कपलर एडिटिव (आईओसीएल द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित) होता है।
जिसके बाद आरडीएसओ ने आईओसीएल द्वारा आपूर्ति किए गए एमडी15 ईंधन के साथ 4500 एचपी डीजल लोकोमोटिव इंजन पर विस्तृत इंजन परीक्षण किया।
आरडीएसओ के एक अधिकारी ने कहा, "व्यापक परीक्षण के बाद, यह पाया गया कि एमडी15 ईंधन वाले इंजन की ब्रेक स्पेसिफिक एनर्जी कंजंप्शन (ब्रेक विशिष्ट ऊर्जा खपत) (बीएसईसी) एमडी15 के साथ उच्च दहन दक्षता के कारण डीजल ईंधन से कम है। यह परफॉर्मेंस सभी इंजन पायदानों पर देखा गया और दो ईंधन (मिथेनॉल मिश्रण और खनिज डीजल) के बीच बीएसईसी में अंतर लगभग स्थिर था, जिसने प्रमाणित किया कि एमडी15 का इस्तेमाल इंजन दक्षता के लिए उपयोगी था।"
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अधिकारी ने कहा, "यह भी देखा गया कि एमडी15 ईंधन वाले इंजन में, बेसलाइन डीजल की तुलना में सिलेंडर का तापमान सभी स्तरों पर कम था। जिसका इंजन इंपोनेंट्स की लाइफ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। MD15 ईंधन वाले इंजन के साथ NOx उत्सर्जन काफी कम था। यह एक हानिकारक प्रदूषक है जो वायुमंडलीय धुंध और सतह के पास ओजोन गठन का कारण बनता है और फेफड़ों के लिए भी हानिकारक है।"
इसके साथ ही अधिकारी ने कहा, "एमडी 15 ईंधन वाले इंजन के साथ पार्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन भी काफी कम था। डीजल एग्जॉस्ट पार्टिकुलेट की तुलना में एमडी 15 इंजन से निकलने वाला धुंआ बिना किसी अपारदर्शिता के साफ था। डीजल एग्जॉस्ट पार्टिकुलेट हानिकारक होते हैं और कार्सिनोजन के रूप में जाने जाते हैं, यानी जो कैंसर के कारण बनते हैं।"
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इस समय, भारतीय रेलवे लोकोमोटिव इंजनों के लिए 1.6 अरब लीटर डीजल की खपत के लिए 15,200 करोड़ रुपये खर्च करता है।
आईओसीएल ने MD15 नाम के एक फ्यूल टाइप विकसित किया है। यह डीजल और मेथनॉल का मिश्रण है जिसमें (v/v) 71 प्रतिशत खनिज डीजल, 15 प्रतिशत मिथेनॉल और 14 प्रतिशत कपलर एडिटिव (आईओसीएल द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित) होता है।
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जिसके बाद आरडीएसओ ने आईओसीएल द्वारा आपूर्ति किए गए एमडी15 ईंधन के साथ 4500 एचपी डीजल लोकोमोटिव इंजन पर विस्तृत इंजन परीक्षण किया।
आरडीएसओ के एक अधिकारी ने कहा, "व्यापक परीक्षण के बाद, यह पाया गया कि एमडी15 ईंधन वाले इंजन की ब्रेक स्पेसिफिक एनर्जी कंजंप्शन (ब्रेक विशिष्ट ऊर्जा खपत) (बीएसईसी) एमडी15 के साथ उच्च दहन दक्षता के कारण डीजल ईंधन से कम है। यह परफॉर्मेंस सभी इंजन पायदानों पर देखा गया और दो ईंधन (मिथेनॉल मिश्रण और खनिज डीजल) के बीच बीएसईसी में अंतर लगभग स्थिर था, जिसने प्रमाणित किया कि एमडी15 का इस्तेमाल इंजन दक्षता के लिए उपयोगी था।"
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अधिकारी ने कहा, "यह भी देखा गया कि एमडी15 ईंधन वाले इंजन में, बेसलाइन डीजल की तुलना में सिलेंडर का तापमान सभी स्तरों पर कम था। जिसका इंजन इंपोनेंट्स की लाइफ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। MD15 ईंधन वाले इंजन के साथ NOx उत्सर्जन काफी कम था। यह एक हानिकारक प्रदूषक है जो वायुमंडलीय धुंध और सतह के पास ओजोन गठन का कारण बनता है और फेफड़ों के लिए भी हानिकारक है।"
इसके साथ ही अधिकारी ने कहा, "एमडी 15 ईंधन वाले इंजन के साथ पार्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन भी काफी कम था। डीजल एग्जॉस्ट पार्टिकुलेट की तुलना में एमडी 15 इंजन से निकलने वाला धुंआ बिना किसी अपारदर्शिता के साफ था। डीजल एग्जॉस्ट पार्टिकुलेट हानिकारक होते हैं और कार्सिनोजन के रूप में जाने जाते हैं, यानी जो कैंसर के कारण बनते हैं।"