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Rare Earth Magnets: मैग्नेट के संकट से जूझ रही कंपोनेंट इंडस्ट्री, ACMA ने की राष्ट्रीय रणनीति बनाने की मांग
Tue, 08 Jul 2025 05:09 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 08 Jul 2025 05:09 PM IST
सार
रेयर अर्थ मैग्नेट की किल्लत से जूझ रही ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री ने सरकार से इस संकट से निपटने के लिए राष्ट्रीय रणनीति बनाने की मांग की है। ACMA ने आत्मनिर्भरता और वैकल्पिक समाधान को वक्त की जरूरत बताया है।
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- फोटो : एआई
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विस्तार
चीन के रेयर अर्थ मैग्नेट निर्यात प्रतिबंधों के कारण भारत में इसका संकट गहराता जा रहा है। रेयर अर्थ मैग्नेट की कमी से ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री पर उत्पादन बंद करने का संकट छा गया है। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) की अध्यक्ष श्रद्धा सूरी मारवाह ने इस संकट को गंभीर बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने। उन्होंने केंद्र सरकार से क्रिटिकल मटेरियल्स को लेकर एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने की अपील की है।
चीन के प्रतिबंध से उद्योग पर संकट
चीन ने 4 अप्रैल 2025 से रेयर अर्थ मिनरल और मैग्नेट्स के निर्यात पर विशेष लाइसेंस की अनिवार्यता लागू कर दी है। चीन विश्व में 90% से अधिक मैग्नेट प्रोसेसिंग क्षमता रखता है। अप्रैल के बाद से भारत को एक भी रेयर अर्थ मैग्नेट का आयात नहीं मिला है।
ACMA के महानिदेशक विन्नी मेहता ने बताया कि कंपनियों के पास सीमित स्टॉक बचा है और यह स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
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चीन के प्रतिबंध से उद्योग पर संकट
चीन ने 4 अप्रैल 2025 से रेयर अर्थ मिनरल और मैग्नेट्स के निर्यात पर विशेष लाइसेंस की अनिवार्यता लागू कर दी है। चीन विश्व में 90% से अधिक मैग्नेट प्रोसेसिंग क्षमता रखता है। अप्रैल के बाद से भारत को एक भी रेयर अर्थ मैग्नेट का आयात नहीं मिला है।
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ACMA के महानिदेशक विन्नी मेहता ने बताया कि कंपनियों के पास सीमित स्टॉक बचा है और यह स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
वैकल्पिक समाधान की तलाश शुरू
- फोटो : Freepik
वैकल्पिक समाधान पर काम जारी
श्रद्धा सूरी ने बताया कि इंडस्ट्री ने समाधान की दिशा में काम शुरू कर दिया है। भारत के पास इन मैग्नेट्स के भंडार मौजूद हैं, लेकिन प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी की जरूरत है। सरकार और इंडस्ट्री दोनों इस दिशा में एकमत हैं।
वह कहती हैं, “यह संकट हमारे लिए एक वेक-अप कॉल है। अगर अब भी नहीं चेते, तो भविष्य में बड़ी दिक्कतें होंगी।”
लॉजिस्टिक्स में भी चुनौती, कैश फ्लो पर असर
मारवाह ने बताया कि भू-राजनीतिक संकटों की वजह से लॉजिस्टिक्स और फ्रेट सेक्टर में भी बाधाएं आ रही हैं। कई गलियारों के बंद होने से इन्वेंटरी बढ़ रही है और वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ा है।
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संकट के बावजूद FY25 में ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का टर्नओवर 6.73 लाख करोड़ रुपये (USD 80.2 बिलियन) रहा, जो FY24 के मुकाबले 10% ज्यादा है। FY20 से FY25 के बीच इंडस्ट्री ने 14% की CAGR से ग्रोथ की है।
ACMA का मानना है कि अब भारत को हाई लोकलाइजेशन और खुद की प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ना होगा। यह सिर्फ एक इंडस्ट्री संकट नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय चुनौती है, जिसका समाधान दीर्घकालिक नीति और तकनीकी निवेश से ही संभव है।
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श्रद्धा सूरी ने बताया कि इंडस्ट्री ने समाधान की दिशा में काम शुरू कर दिया है। भारत के पास इन मैग्नेट्स के भंडार मौजूद हैं, लेकिन प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी की जरूरत है। सरकार और इंडस्ट्री दोनों इस दिशा में एकमत हैं।
वह कहती हैं, “यह संकट हमारे लिए एक वेक-अप कॉल है। अगर अब भी नहीं चेते, तो भविष्य में बड़ी दिक्कतें होंगी।”
लॉजिस्टिक्स में भी चुनौती, कैश फ्लो पर असर
मारवाह ने बताया कि भू-राजनीतिक संकटों की वजह से लॉजिस्टिक्स और फ्रेट सेक्टर में भी बाधाएं आ रही हैं। कई गलियारों के बंद होने से इन्वेंटरी बढ़ रही है और वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ा है।
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संकट के बावजूद FY25 में ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का टर्नओवर 6.73 लाख करोड़ रुपये (USD 80.2 बिलियन) रहा, जो FY24 के मुकाबले 10% ज्यादा है। FY20 से FY25 के बीच इंडस्ट्री ने 14% की CAGR से ग्रोथ की है।
ACMA का मानना है कि अब भारत को हाई लोकलाइजेशन और खुद की प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ना होगा। यह सिर्फ एक इंडस्ट्री संकट नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय चुनौती है, जिसका समाधान दीर्घकालिक नीति और तकनीकी निवेश से ही संभव है।
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