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Car vs Bike: कारें बाइक से भारी क्यों होती हैं? राहुल गांधी के अनोखे उदाहरण को बीजेपी ने कहा- बकवास

Fri, 03 Oct 2025 07:57 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 03 Oct 2025 07:57 PM IST
सार

बाइक का वजन जहां लगभग 100 किलो होता है, वहीं एक कार का वजन करीब 3,000 किलो तक क्यों होता है? इस सवाल को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कोलंबिया के एक सेमिनार में उठाया।

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Rahul Gandhi Explains Why Cars Are Heavier Than Bikes in Colombia; BJP Calls It Gibberish
Representative Image - फोटो : PTI

विस्तार

बाइक का वजन जहां लगभग 100 किलो होता है, वहीं एक कार का वजन करीब 3,000 किलो तक क्यों होता है? इस सवाल को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कोलंबिया के एक सेमिनार में उठाया। लेकिन उनके जवाब ने बीजेपी को हैरान कर दिया, जिसने इसे बकवास करार दिया।
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छात्रों से बातचीत में उठा सवाल
कोलंबिया की EIA यूनिवर्सिटी में छात्रों से बात करते हुए राहुल गांधी ने पूछा कि एक कार आमतौर पर इतनी भारी क्यों होती है? कांग्रेस सांसद ने सवाल किया, "एक पैसेंजर को ले जाने के लिए कार में 3,000 किलो धातु चाहिए, जबकि 100 किलो की बाइक दो पैसेंजर ले जाती है। तो आखिर क्यों बाइक 150 किलो के धातु से दो लोगों को ले जा सकती है, लेकिन कार के लिए 3,000 किलो की जरूरत होती है?"

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इंजन ही है असली कारण, राहुल का दावा
राहुल गांधी ने कहा कि यह सवाल असल में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के ट्रांजिशन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने समझाया कि गाड़ियों का वजन इंजन की वजह से ज्यादा होता है। उन्होंने कहा, "जब बाइक की दुर्घटना होता है तो इंजन अलग होकर बाहर चला जाता है और इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाता। लेकिन कार का इंजन टक्कर में अंदर ही रहता है। इसलिए कार को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि इंजन आपको न मार सके।"

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इलेक्ट्रिक मोटर है हल
राहुल गांधी ने बताया कि इस समस्या का हल इलेक्ट्रिक गाड़ियां हैं। उनके मुताबिक, "इलेक्ट्रिक मोटर इस केंद्रीकृत ऊर्जा सिस्टम को तोड़ देती है। इलेक्ट्रिक मोटर को अलग-अलग जगह लगाया जा सकता है। यानी यह शक्ति का विकेंद्रीकरण है और यही इसकी असली ताकत है।"

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बीजेपी ने उड़ाया मजाक
राहुल गांधी के इस तर्क पर बीजेपी ने तीखा मजाक उड़ाया। बीजेपी के मीडिया सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, "मैंने एक साथ इतनी बकवास कभी नहीं सुनी। अगर कोई बता दे कि राहुल गांधी यहां क्या समझाना चाह रहे हैं, तो मुझे अच्छा लगेगा। लेकिन अगर आप मेरी तरह ही कंफ्यूज और मनोरंजन महसूस कर रहे हैं, तो जान लें कि आप अकेले नहीं हैं।"

ऑटोमोबाइल की बात या राजनीतिक इशारा?
राहुल गांधी की ये बातें सिर्फ ऑटोमोबाइल का उदाहरण भर नहीं लगतीं, बल्कि इसे एक राजनीतिक इशारे के तौर पर भी देखा जा रहा है। इसी साल फरवरी में भी उन्होंने इसी तरह का उदाहरण देते हुए राजनीतिक सत्ता के विकेंद्रीकरण की बात कही थी।

उन्होंने कहा था, "पारंपरिक इंजन केंद्रीकृत शक्ति का स्रोत हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन में शक्ति का विकेंद्रीकरण है- बैटरी और मोटर्स पूरे डिजाइन को बदल देते हैं।" 

राहुल गांधी के मुताबिक, दुनिया एक नए ऊर्जा तंत्र की ओर बढ़ रही है जहां इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरियां सबसे अहम तकनीक साबित होंगी। उनका मानना है कि सत्ता का विकेंद्रीकरण अर्थव्यवस्था से लेकर राजनीति तक, सबकुछ बदल देगा। 

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