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Off-Road Tyres: एडवेंचर ट्रिप पर जाने का है प्लान, तो अपने वाहन के लिए परफेक्ट ऑफ-रोड टायर कैसे चुनें
Sat, 15 Jun 2024 08:21 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 15 Jun 2024 08:21 PM IST
सार
टायर न सिर्फ वाहन के ऑफ-रोड प्रदर्शन को अहम रूप से प्रभावित करते हैं। बल्कि वे इसकी समग्र रूप-रेखा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए, अपने ऑफ-रोड वाहन के लिए सही टायर चुनना जरूरी है।
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off road tyres
- फोटो : Freepik
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विस्तार
ऑफ-रोड ड्राइविंग के लिए टायर के ट्रैक्शन बढ़ाने की बात करें तो सबसे कारगर तरीकों में से एक है अपने वाहन के टायरों पर ध्यान देना। अक्सर, एक 4x4 गाड़ी खरीदने के बाद उत्साही लोग जो शुरुआती मॉडिफिकेशन करते हैं, उनमें से एक उनके टायरों को अपग्रेड करना होता है। टायर न सिर्फ वाहन के ऑफ-रोड प्रदर्शन को अहम रूप से प्रभावित करते हैं। बल्कि वे इसकी समग्र रूप-रेखा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए, अपने ऑफ-रोड वाहन के लिए सही टायर चुनना जरूरी है।
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कैसें चुनें सही टायर
टायर चुनना किसी वाहन की ऑफ-रोड क्षमताओं को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऑप्शन के तौर पर तीन प्राथमिक टायर पैटर्न हैं: हाइवे टेरेन (एचटी), ऑल टेरेन (एटी), और मड टेरेन (एमटी)। जबकि एचटी टायर अच्छी ग्रिप, ईंधन दक्षता और कम से कम सड़क पर शोर के साथ पक्की सड़कों पर बेहतरीन परफॉर्मेंस देते हैं। लेकन वे अपने पतले ट्रीड के कारण ऑफ-रोड खराब प्रदर्शन करते हैं।
दूसरी ओर, एटी टायरों में बड़े ट्रीड होते हैं, जो ऑफ-रोड बेहतर ट्रैक्शन प्रदान करते हैं। साथ ही चिकना और शांत ऑन-रोड प्रदर्शन भी बढ़िया देते हैं। वहीं, एमटी टायर की बात करें तो, वे अपने आक्रामक ट्रीड पैटर्न के साथ, मिट्टी और गंदगी को कुशलतापूर्वक साफ करके चुनौतीपूर्ण ऑफ-रोड परिस्थितियों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। लेकिन ऑन-रोड हैंडलिंग से समझौता कर सकते हैं और सड़क पर ज्यादा शोर पैदा कर सकते हैं।
टायर चुनना किसी वाहन की ऑफ-रोड क्षमताओं को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऑप्शन के तौर पर तीन प्राथमिक टायर पैटर्न हैं: हाइवे टेरेन (एचटी), ऑल टेरेन (एटी), और मड टेरेन (एमटी)। जबकि एचटी टायर अच्छी ग्रिप, ईंधन दक्षता और कम से कम सड़क पर शोर के साथ पक्की सड़कों पर बेहतरीन परफॉर्मेंस देते हैं। लेकन वे अपने पतले ट्रीड के कारण ऑफ-रोड खराब प्रदर्शन करते हैं।
दूसरी ओर, एटी टायरों में बड़े ट्रीड होते हैं, जो ऑफ-रोड बेहतर ट्रैक्शन प्रदान करते हैं। साथ ही चिकना और शांत ऑन-रोड प्रदर्शन भी बढ़िया देते हैं। वहीं, एमटी टायर की बात करें तो, वे अपने आक्रामक ट्रीड पैटर्न के साथ, मिट्टी और गंदगी को कुशलतापूर्वक साफ करके चुनौतीपूर्ण ऑफ-रोड परिस्थितियों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। लेकिन ऑन-रोड हैंडलिंग से समझौता कर सकते हैं और सड़क पर ज्यादा शोर पैदा कर सकते हैं।
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क्या हो टायर का साइज
टायर पैटर्न के अलावा, टायर का साइज भी ऑफ-रोड प्रदर्शन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। हालांकि बड़े व्यास (डायमीटर) के टायर ग्राउंड क्लियरेंस बढ़ाते हैं। लेकिन वे स्पीडोमीटर की गलतियों और अधिकतम आर्टिकुलेशन के दौरान फेंडर के साथ क्लियरेंस के मुद्दों को पैदा कर सकते हैं।
ऑप्टिमम ड्राइवट्रेन परफॉर्मेंस बनाए रखने के लिए मौजूदा डिफरेंशियल रेशियो और नए टायर के डायमीटर पर विचार करके सही क्रॉल रेशियो के कैल्कुलेट (गणना) करना महत्वपूर्ण है।
टायर पैटर्न के अलावा, टायर का साइज भी ऑफ-रोड प्रदर्शन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। हालांकि बड़े व्यास (डायमीटर) के टायर ग्राउंड क्लियरेंस बढ़ाते हैं। लेकिन वे स्पीडोमीटर की गलतियों और अधिकतम आर्टिकुलेशन के दौरान फेंडर के साथ क्लियरेंस के मुद्दों को पैदा कर सकते हैं।
ऑप्टिमम ड्राइवट्रेन परफॉर्मेंस बनाए रखने के लिए मौजूदा डिफरेंशियल रेशियो और नए टायर के डायमीटर पर विचार करके सही क्रॉल रेशियो के कैल्कुलेट (गणना) करना महत्वपूर्ण है।
टायर ट्रैक्शन कितना अहम
यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि टायर पर्याप्त ट्रैक्शन पैदा कर रहे हैं। ट्रैक्शन को बेहतर बनाने के लिए एक सरल लेकिन विश्वसनीय तकनीक टायर के दबाव को कम करना है। यह क्रिया जमीन के साथ टायर के संपर्क क्षेत्र को बढ़ा देती है। जिससे यह असमान सतहों और चट्टानों जैसी बाधाओं के अनुरूप बेहतर हो जाता है। नतीजतन, यह विशेष रूप से कीचड़ या रेतीले इलाके में ट्रैक्शन बढ़ाने में मदद करता है।
हालांकि, सावधानी बरतना और दबाव को अत्यधिक कम न करना जरूरी है। क्योंकि इससे टायर का बीड अलग हो सकता है। आम तौर पर, ज्यादातर ऑफ-रोड परिस्थितियों के लिए लगभग 18-20 psi का टायर दबाव बनाए रखना सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, सड़क पर वापस आने के बाद, हाई स्पीड पर वाहन चलाते समय संभावित टायर फटने से बचने के लिए, टायरों में दोबारा हवा भरना अनिवार्य है।
यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि टायर पर्याप्त ट्रैक्शन पैदा कर रहे हैं। ट्रैक्शन को बेहतर बनाने के लिए एक सरल लेकिन विश्वसनीय तकनीक टायर के दबाव को कम करना है। यह क्रिया जमीन के साथ टायर के संपर्क क्षेत्र को बढ़ा देती है। जिससे यह असमान सतहों और चट्टानों जैसी बाधाओं के अनुरूप बेहतर हो जाता है। नतीजतन, यह विशेष रूप से कीचड़ या रेतीले इलाके में ट्रैक्शन बढ़ाने में मदद करता है।
हालांकि, सावधानी बरतना और दबाव को अत्यधिक कम न करना जरूरी है। क्योंकि इससे टायर का बीड अलग हो सकता है। आम तौर पर, ज्यादातर ऑफ-रोड परिस्थितियों के लिए लगभग 18-20 psi का टायर दबाव बनाए रखना सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, सड़क पर वापस आने के बाद, हाई स्पीड पर वाहन चलाते समय संभावित टायर फटने से बचने के लिए, टायरों में दोबारा हवा भरना अनिवार्य है।
इसके अलावा, टायरों को अपग्रेड करते समय, चौड़े टायरों को पूरी तरह से एडजस्ट करने के लिए रिम्स को बदलने पर विचार करना महत्वपूर्ण है। मेटल रिम्स टिकाऊपन देते हैं, लेकिन वजन बढ़ाते हैं। जबकि अलॉय व्हील के पहिये हल्के और सौंदर्य की दृष्टि से मनभावन होते हैं। लेकिन टकराने से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
कुल मिलाकर निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि, ऑफ-रोड क्षमता को बढ़ाने के लिए सही टायरों को चुनना बेहद महत्वपूर्ण है। और विशेषज्ञों से सलाह लेने से व्यक्तिगत जरूरतों के मुताबिक फैसला लेने में मदद मिल सकती है।