EV Rescue Hub: हाइवे पर चार्ज खत्म हुआ तो भी टेंशन नहीं, सरकार बना रही खास रेस्क्यू हब, जानें पूरी योजना
Range Anxiety Solutions 2026: ईवी मालिकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अक्सर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान अक्सर चार्ज खत्म होने का डर बना रहता है, लेकिन भारत सरकार इसके लिए एक योजना लेकर आई है। इससे सफर आसान और सुरक्षित होगा। जानिए योजना के बारे में विस्तार से..
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विस्तार
भारत सरकार एक्सप्रेसवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए कंट्रोल और कमांड सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है। ये सेंटर ईवी रोडसाइड असिस्टेंस (RSA) और ऑन-रोड सर्विसेज (ORS) हब के रूप में काम करेंगे। ये पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर आधारित होगा। इसका उद्देश्य रेंज एंग्जायटी (रास्ते में चार्ज खत्म होने का डर) को खत्म करना और रियल-टाइम तकनीकी सहायता प्रदान करना है। अगर ये योजना सफल रही तो दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे इस मॉडल को अपनाने वाला देश का पहला कॉरिडोर बन सकता है।
क्या है सरकार का मास्टर प्लान?
अब तक सरकार का ध्यान सिर्फ चार्जिंग प्वाइंट लगाने पर था, लेकिन अब इसे एक कदम आगे ले जाना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ये व्यवस्था एविएशन सेक्टर के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की तरह काम करेगी। ये सेंटर न केवल चार्जिंग प्वाइंट देंगे, बल्कि वाहन की खराबी को ट्रैक करेंगे, बैटरी सहायता देंगे और छोटी-मोटी मरम्मत के साथ टोइंग की सुविधा भी देंगे।
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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बनेगा फर्स्ट कॉरिडोर
करीब1300 किमी लंबा निर्माणाधीन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे इस योजना का पहला गवाह बनेगा। ये दो बड़े महानगरों के बीच एक एंड-टू-एंड ईवी-सहायक मार्ग प्रदान करेगा, जिससे इंटरसिटी यात्रा करने वाले ईवी उपयोगकर्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा। सरकार इस प्रोजेक्ट को पीपीपी मॉडल के तहत चलाएगी। ये हब व्यक्तिगत यात्रियों के लिए बी2सी सेवाएं और कमर्शियल फ्लीट के लिए बी2बी तकनीकी समाधान भी प्रदान कर सकते हैं।
इसके लिए भारत 2047 तक 50,000 किमी एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे बनाने के लिए 20 रुपये ट्रिलियन खर्च कर रहा है। वहीं, अगर मौजूदी बुनियादी ढांचे की बात करे 2025 तक भारत में लगभग 5,100 किमी एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे हैं, जिनमें से 2,000 किमी चालू हैं।
इकरा (ICRA) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आशीष मोदानी के अनुसार, शुरुआती लागत अधिक होने के कारण सरकार को इन प्रोजेक्ट्स को व्यावसायिक रूप से फायदेमंद बनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देना होगा। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि सिर्फ चार्जिंग स्टेशन काफी नहीं हैं, एक भरोसेमंद सपोर्ट बैकबोन होना लंबी दूरी की यात्रा के लिए एक अहम और बड़ा बदलाव साबित होगा।