{"_id":"6543a538ab220a0d060189b7","slug":"nhai-taking-steps-for-dust-control-at-construction-sites-informs-govt-2023-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Air Pollution: एनएचएआई निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए उठा रहा है कदम, जानें डिटेल्स","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
Air Pollution: एनएचएआई निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए उठा रहा है कदम, जानें डिटेल्स
Thu, 02 Nov 2023 07:11 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 02 Nov 2023 07:11 PM IST
सार
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रण करने के उपाय कर रही है। गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
विज्ञापन
सड़क पर उड़ रही धूल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रण करने के उपाय कर रही है। गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार एनएचएआई ने एक धूल और नियंत्रण प्रबंधन केंद्र स्थापित किया है।
एनएचएआई राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के आसपास द्वारका एक्सप्रेसवे, यूईआर II दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं लागू कर रही है।
विज्ञापन
बयान के अनुसार, हवा की गुणवत्ता और धूल के स्तर को नियंत्रण में रखने के लिए, एनएचएआई ने अपने ठेकेदारों/रियायतकर्ताओं को राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण स्थलों पर मौजूदा धूल नियंत्रण उपायों की समीक्षा करने और सीएक्यूएम/केंद्रीय और/या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। ।
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता मानकों में गिरावट के साथ, सीएक्यूएम ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तहत परिकल्पना के अनुसार कार्रवाई शुरू की है।
बयान में कहा गया है कि इन दिशानिर्देशों के अनुरूप, एनएचएआई यह सुनिश्चित कर रहा है कि क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण को अधिकतम करने के लिए सभी संभव उपाय किए जाएं।
खेतों में आग लगने और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण दिल्ली में गुरुवार को धुंआ छाया रहा। जिससे आसमान धुंधला हो गया और सूरज छिप गया। जिससे डॉक्टरों को सांस लेने की समस्याओं के बढ़ने के बारे में चेतावनी जारी करनी पड़ी।
कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक पहले ही 400 का आंकड़ा पार कर गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है।
विज्ञापन
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार एनएचएआई ने एक धूल और नियंत्रण प्रबंधन केंद्र स्थापित किया है।
विज्ञापन
एनएचएआई राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के आसपास द्वारका एक्सप्रेसवे, यूईआर II दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं लागू कर रही है।
विज्ञापन
बयान के अनुसार, हवा की गुणवत्ता और धूल के स्तर को नियंत्रण में रखने के लिए, एनएचएआई ने अपने ठेकेदारों/रियायतकर्ताओं को राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण स्थलों पर मौजूदा धूल नियंत्रण उपायों की समीक्षा करने और सीएक्यूएम/केंद्रीय और/या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। ।
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता मानकों में गिरावट के साथ, सीएक्यूएम ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तहत परिकल्पना के अनुसार कार्रवाई शुरू की है।
बयान में कहा गया है कि इन दिशानिर्देशों के अनुरूप, एनएचएआई यह सुनिश्चित कर रहा है कि क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण को अधिकतम करने के लिए सभी संभव उपाय किए जाएं।
खेतों में आग लगने और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण दिल्ली में गुरुवार को धुंआ छाया रहा। जिससे आसमान धुंधला हो गया और सूरज छिप गया। जिससे डॉक्टरों को सांस लेने की समस्याओं के बढ़ने के बारे में चेतावनी जारी करनी पड़ी।
कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक पहले ही 400 का आंकड़ा पार कर गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है।