Miyawaki: एनएच-31 पर मियावाकी तकनीक से लहलहाएंगे जंगल, हाईवे के किनारे अब 10 गुना तेजी से बढ़ेंगे पेड़
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने NH31 के गाजीपुर-बलिया खंड पर हरियाली बढ़ाने और वन आवरण के तेजी से विकास को बढ़ावा देने के लिए 'मियावाकी वृक्षारोपण' पद्धति को अपनाया है। जानें क्यों होती यह खास।
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) ने बुनियादी ढांचे को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। NH-31 के गाजीपुर-बलिया खंड पर मियावाकी (Miyawaki) वृक्षारोपण पद्धति को अपनाया गया है। यह पहल सरकार के व्यापक 'ग्रीन हाईवे' कार्यक्रम का हिस्सा है। जिसका मकसद सड़क परियोजनाओं के साथ-साथ हरियाली बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
NH-31 किन प्रमुख शहरों से होकर गुजरता है?
NH-31 एक 1,000 किलोमीटर से भी लंबा हाईवे है जो चार राज्यों से होकर गुजरता है। इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख शहरों ने ये नाम हैं:
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उत्तर प्रदेश: प्रयागराज, गाजीपुर और बलिया।
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बिहार: छपरा, हाजीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, पूर्णिया और किशनगंज।
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पश्चिम बंगाल: सिलिगुड़ी, जलपाईगुड़ी और कूच बिहार।
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असम: कोकराझार, बोंगाईगांव, गोलपारा और गुवाहाटी।
क्या है मियावाकी वृक्षारोपण तकनीक?
मियावाकी पद्धति वनीकरण की एक जापानी तकनीक है:
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इसमें एक छोटे से क्षेत्र में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को बहुत सघन रूप में लगाया जाता है।
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यह पौधों को तेजी से बढ़ने में मदद करती है, जिससे लगभग तीन साल में एक आत्मनिर्भर मिनी जंगल तैयार हो जाता है।
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पारंपरिक तरीकों की तुलना में, यह तकनीक शहरी और सड़क के किनारे के वातावरण के लिए विशेष रूप से प्रभावी है।
🌱 मियावाकी पद्धति एक विशेष जापानी वृक्षारोपण तकनीक है, जिसमें छोटे क्षेत्र में देशी प्रजातियों के पौधों को घने रूप से लगाया जाता है।
— NHAI RO Varanasi (@NHAIROVaranasi) May 8, 2026
यह तकनीक पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में तेज़ी से विकसित होकर लगभग 3 वर्षों में मिनी फॉरेस्ट तैयार करने में सहायक होती है।🌳
इस तकनीक से… pic.twitter.com/0c0pgsSurB
मियावाकी पद्धति अपनाने के मुख्य लाभ क्या हैं?
एनएचएआई द्वारा इस तकनीक को लागू करने के पीछे कई बड़े कारण और फायदे हैं:
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तेजी से विकास: पारंपरिक प्लांटेशन की तुलना में मियावाकी जंगल लगभग 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। और मात्र 2-3 साल में घना हरित क्षेत्र बना देते हैं।
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जैव विविधता को बढ़ावा: स्थानीय पौधों के उपयोग से यह पक्षियों, कीड़ों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का समर्थन करता है।
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हवा की गुणवत्ता में सुधार: घनी वनस्पतियां प्रदूषण को सोखने, धूल के स्तर को कम करने और ऑक्सीजन बढ़ाने में मदद करती हैं।
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कम रखरखाव: एक बार स्थापित होने के बाद, इन जंगलों को बहुत कम पानी या मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।
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सीमित स्थान के लिए उपयुक्त: यह तकनीक कम जमीन वाली जगहों जैसे हाईवे डिवाइडर और शहरी गलियारों के लिए आदर्श है।
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जलवायु अनुकूलन: सघन वृक्षारोपण सतह के तापमान को कम करने, ध्वनि प्रदूषण घटाने और समग्र पर्यावरणीय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है।