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New Rules: नींद की झपकी से नहीं होंगे हादसे... कार अपने-आप लगाएगी ब्रेक, गाड़ियों में जल्द आएगी नई तकनीक
Thu, 27 Mar 2025 05:13 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 27 Mar 2025 05:13 PM IST
सार
नए नियम अप्रैल 2026 से सभी नए वाहनों के लिए लागू हो जाएंगे। वहीं, मौजूदा मॉडलों के लिए ये नियम अक्तूबर 2026 से लागू होंगे।
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क्षतिग्रस्त कार
- फोटो : संवाद
विस्तार
सड़क परिवहन एंव राजमार्ग मंत्रालय ने गाड़ियों में सफर करने वाले नागरिकों की सुरक्षा को बढ़ाने के मकसद से नई मसौदा अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के तहत अब सभी पैसेंजर वाहन जिनकी सीटिंग क्षमता 8 पैसेंजर्स से अधिक है, उनमें कंपनियों को कुछ नई सेफ्टी फीचर्स देना अनिवार्य होगा। यह नियम, 8 से ज्यादा लोगों को ले जाने वाले पिकअप, मिनी बस और ट्रकों पर भी समान रूप से लागू होंगे।
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ये फीचर्स होंगे जरूरी
- फोटो : अमर उजाला
ये फीचर्स होंगे जरूरी
अधिसूचना के मुताबिक, अब कंपनियों को 8 से ज्यादा पैसेंजर की क्षमता रखने वाले सभी नए वाहनों में नए सेफ्टी फीचर्स में एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम, ड्राइवर ड्राउजिनेस अटेंशन वार्निंग सिस्टम और लेन डिपार्चर सिस्टम जैसे फीचर्स को शामिल करना अनिवार्य होगा। नए नियम अप्रैल 2026 से सभी नए वाहनों के लिए लागू हो जाएंगे। वहीं, मौजूदा मॉडलों के लिए ये नियम अक्तूबर 2026 से लागू होंगे।
इन सुरक्षा तकनीकों के अलावा, देश में बसों और ट्रकों में पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों की पहचान करने और ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए ऑनबोर्ड ब्लाइंड स्पॉट इन्फॉर्मेशन सिस्टम देना भी जरूरी हो जाएगा। मिनी और नियमित दोनों बसों में डेडलाइन के व्हीकल स्टेबिलिटी फंक्शन देना भी अनिवार्य हो जाएगा।
अधिसूचना के मुताबिक, अब कंपनियों को 8 से ज्यादा पैसेंजर की क्षमता रखने वाले सभी नए वाहनों में नए सेफ्टी फीचर्स में एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम, ड्राइवर ड्राउजिनेस अटेंशन वार्निंग सिस्टम और लेन डिपार्चर सिस्टम जैसे फीचर्स को शामिल करना अनिवार्य होगा। नए नियम अप्रैल 2026 से सभी नए वाहनों के लिए लागू हो जाएंगे। वहीं, मौजूदा मॉडलों के लिए ये नियम अक्तूबर 2026 से लागू होंगे।
इन सुरक्षा तकनीकों के अलावा, देश में बसों और ट्रकों में पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों की पहचान करने और ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए ऑनबोर्ड ब्लाइंड स्पॉट इन्फॉर्मेशन सिस्टम देना भी जरूरी हो जाएगा। मिनी और नियमित दोनों बसों में डेडलाइन के व्हीकल स्टेबिलिटी फंक्शन देना भी अनिवार्य हो जाएगा।
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क्रैश टेस्ट
- फोटो : BNCAP
BNCAP पर नए मानदंडों का प्रभाव
भारत में भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (BNCAP) के तहत अपनी खुद की व्हीकल सेफ्टी रेटिंग सिस्टम है। रेटिंग सिस्टम को अपडेट किए जाने की उम्मीद है, जिससे उपर्युक्त तकनीकों से लैस वाहन क्रैश टेस्ट प्रोग्राम में अधिक स्कोर कर पाएंगे।
कैसे काम करते हैं ये सेफ्टी सिस्टम
एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम, यानी AEBS सामने से होने वाले संभावित टक्कर का पता लगाता है। अगर टक्कर होने की संभावना में ड्राइवर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो यह सिस्टम खुद ही ब्रेक लगा देता है। यह तकनीक वाहन को धीमा करने, टक्कर को रोकने और प्रभाव की गंभीरता को कम करने में काफी कारगर साबित हो सकता है।
भारत में भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (BNCAP) के तहत अपनी खुद की व्हीकल सेफ्टी रेटिंग सिस्टम है। रेटिंग सिस्टम को अपडेट किए जाने की उम्मीद है, जिससे उपर्युक्त तकनीकों से लैस वाहन क्रैश टेस्ट प्रोग्राम में अधिक स्कोर कर पाएंगे।
कैसे काम करते हैं ये सेफ्टी सिस्टम
एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम, यानी AEBS सामने से होने वाले संभावित टक्कर का पता लगाता है। अगर टक्कर होने की संभावना में ड्राइवर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो यह सिस्टम खुद ही ब्रेक लगा देता है। यह तकनीक वाहन को धीमा करने, टक्कर को रोकने और प्रभाव की गंभीरता को कम करने में काफी कारगर साबित हो सकता है।
ड्राइवर डिटेक्शन सिस्टम
- फोटो : Nissan
वहीं ड्राउजिनेस डिटेक्शन सिस्टम ड्राइवर को नींद आने या थकान की स्थिती में काम करता है। यह स्टीयरिंग मूवमेंट, वाहन की लेन पोजीशन और ड्राइवर के चेहरे की लगातार ट्रैकिंग कर ड्राइवर की सतर्कता की निगरानी करता है। यदि यह सिस्टम पता लगाता है कि ड्राइवर नींद में है, तो सिस्टम ड्राइवर को सचेत करने के लिए ऑडियो चेतावनी जारी करता है। इससे ड्राइवर की नींद टूट सकती है और दुर्घटना से बचाव हो सकता है।