{"_id":"6275063cb3506f47d32bcd34","slug":"madras-high-court-directs-tamil-nadu-government-to-effect-necessary-amendments-to-tn-motor-vehicles-accident-claims-tribunals-rules-with-regard-to-payment-of-court-fees","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट का निर्देश: कोर्ट फीस के भुगतान पर नियमों में करें बदलाव","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
हाईकोर्ट का निर्देश: कोर्ट फीस के भुगतान पर नियमों में करें बदलाव
Fri, 06 May 2022 04:57 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 06 May 2022 04:57 PM IST
सार
मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार को अदालत शुल्क (कोर्ट फीस) के भुगतान के संबंध में तमिलनाडु मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण नियमों में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
मद्रास हाई कोर्ट
- फोटो : For Reference Only
विस्तार
मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार को अदालत शुल्क (कोर्ट फीस) के भुगतान के संबंध में तमिलनाडु मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण नियमों में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति पीटी आशा ने 5 मई को दीवानी विविध याचिकाओं के एक बैच का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया।
न्यायाधीश ने कहा कि अदालती शुल्क लगाने या उससे छूट देने का अधिकार दावा न्यायाधिकरणों को चलाने वाले न्यायिक अधिकारियों के पास है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में कहा गया था कि इस विवेक का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके, सुसंगत तार्किक तर्क के साथ किया जाना चाहिए, न कि नियमित रूप से। चूंकि इस छूट को विनियमित (रेगुलेट) करने के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं बनाए गए थे, इसलिए हर न्यायिक अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने के लिए अपना तर्क अपनाया।
न्यायाधीश ने कहा, "इसलिए, सरकार को, जो अदालती शुल्क लगाने में मुख्य पक्ष है, तमिलनाडु मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण नियमों के नियम 24 (3) में आवश्यक संशोधन करने की जरूरत है।"
विज्ञापन
न्यायाधीश ने कहा कि जब तक नियमों में संशोधन नहीं किया जाता और एक योजना तैयार नहीं की जाती, न्यायिक अधिकारी कुछ दिशानिर्देशों का पालन करेंगे।
इसके अलावा, न्यायाधीश ने कहा कि यदि दावेदार यह कहते हुए अदालत में आता है कि वह आय अर्जित करने वाले व्यवसाय / काम में लगा हुआ है, तो उससे एक हलफनामा लेने के लिए ध्यान रखा जाना चाहिए कि इसके बावजूद वे उनके पास न्यायालय शुल्क का भुगतान करने का साधन नहीं है और उनके पास मूल्य की कोई चल या अचल संपत्ति नहीं है।
इस हलफनामे को नोटरी के सामने शपथ दिलाई जाएगी और इसमें एक वचनबद्धता (अंडरटेकिंग) भी होनी चाहिए कि दावेदार अदालत की फीस का भुगतान करेगा चाहे वह दावे में सफल हो या न हो। छूट प्रदान करते समय, जिसके लिए आम तौर पर एक याचिका के रूप में प्रार्थना की जाती है, ट्रिब्यूनल छूट देने के अपने कारण को संक्षेप में दर्ज करेगा। न्यायाधीश ने कहा, छूट में यह स्पष्ट रूप से देखा जाएगा कि छूट की राशि एक निर्दिष्ट समय के भीतर जमा की जाएगी और एक बार छूट की राशि जमा हो जाने के बाद, अदालत शुल्क घटक को पहले वापस ले लिया जाएगा और एक अलग कोर्ट खाते में डाल दिया जाएगा।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति पीटी आशा ने 5 मई को दीवानी विविध याचिकाओं के एक बैच का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया।
न्यायाधीश ने कहा कि अदालती शुल्क लगाने या उससे छूट देने का अधिकार दावा न्यायाधिकरणों को चलाने वाले न्यायिक अधिकारियों के पास है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में कहा गया था कि इस विवेक का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके, सुसंगत तार्किक तर्क के साथ किया जाना चाहिए, न कि नियमित रूप से। चूंकि इस छूट को विनियमित (रेगुलेट) करने के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं बनाए गए थे, इसलिए हर न्यायिक अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने के लिए अपना तर्क अपनाया।
विज्ञापन
न्यायाधीश ने कहा, "इसलिए, सरकार को, जो अदालती शुल्क लगाने में मुख्य पक्ष है, तमिलनाडु मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण नियमों के नियम 24 (3) में आवश्यक संशोधन करने की जरूरत है।"
विज्ञापन
न्यायाधीश ने कहा कि जब तक नियमों में संशोधन नहीं किया जाता और एक योजना तैयार नहीं की जाती, न्यायिक अधिकारी कुछ दिशानिर्देशों का पालन करेंगे।
इसके अलावा, न्यायाधीश ने कहा कि यदि दावेदार यह कहते हुए अदालत में आता है कि वह आय अर्जित करने वाले व्यवसाय / काम में लगा हुआ है, तो उससे एक हलफनामा लेने के लिए ध्यान रखा जाना चाहिए कि इसके बावजूद वे उनके पास न्यायालय शुल्क का भुगतान करने का साधन नहीं है और उनके पास मूल्य की कोई चल या अचल संपत्ति नहीं है।
इस हलफनामे को नोटरी के सामने शपथ दिलाई जाएगी और इसमें एक वचनबद्धता (अंडरटेकिंग) भी होनी चाहिए कि दावेदार अदालत की फीस का भुगतान करेगा चाहे वह दावे में सफल हो या न हो। छूट प्रदान करते समय, जिसके लिए आम तौर पर एक याचिका के रूप में प्रार्थना की जाती है, ट्रिब्यूनल छूट देने के अपने कारण को संक्षेप में दर्ज करेगा। न्यायाधीश ने कहा, छूट में यह स्पष्ट रूप से देखा जाएगा कि छूट की राशि एक निर्दिष्ट समय के भीतर जमा की जाएगी और एक बार छूट की राशि जमा हो जाने के बाद, अदालत शुल्क घटक को पहले वापस ले लिया जाएगा और एक अलग कोर्ट खाते में डाल दिया जाएगा।