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पहियों पर घूमता जासूसी यंत्र: चीन के कनेक्टेड वाहनों से डरा अमेरिका, क्या बैन हो जाएंगी एडवांस स्मार्ट कारें?

Thu, 03 Sep 2026 10:19 AM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Thu, 03 Sep 2026 10:19 AM IST
सार

30 इंच की स्क्रीन, मसाज सीट्स, वायरलेस कराओके और खुद पार्क होने की तकनीक...चीन की गीली गैलेक्सी एम9 जैसी स्मार्ट कारों ने अमेरिकी ऑटो उद्योग की नींव हिला दी है। 35 हजार डॉलर में मिलने वानी यह लग्जरी फीचर्स से लैस कार्स को अमेरिका पहियों पर घूमता जासूसी यंत्र मान रहा है। तो क्या जासूसी की डर से अमेरिका इन चीनी गाड़ियों को बैन कर सकता है? या कोई और एक्शन लेगा। यहां जानिए सबकुछ विस्तार से...
 

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Luxury Features Half Price: How Cheap Chinese Smart Cars Rattling US Auto Industry
गीली गैलेक्सी एम9 - फोटो : geely.ae

विस्तार

मसाज और हीटिंग वाली लेदर सीट्स, 30 इंच का विशाल कस्टमाइजेबल वीडियो डिस्प्ले, 27 स्पीकर्स का सराउंड साउंड सिस्टम, इन-बिल्ट फ्रिज, वायरलेस कराओके और दरवाजे लॉक करते ही टेलर स्विफ्ट या बीथोवेन की धुन...इतना ही नहीं, अगर आपको कार पार्क करने में परेशानी होती है, तो स्क्रीन पर कार की फोटो को खाली जगह पर ड्रैग-एंड-ड्रॉप करते ही आपकी गाड़ी खुद-ब-खुद पार्क हो जाएगी।

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हम बात कर रहे हैं 3-रो लग्जरी क्रॉसओवर एसयूवी गैलेक्सी एम9 की, जिसे चीन की दिग्गज ऑटो कंपनी गीली ने बनाया है। यह हाइब्रिड कार बैटरी और पेट्रोल इंजन मिलाकर एक बार में 1,060 किमी का सफर तय करती है। चीन में इसकी कीमत 35 हजार डॉलर यानी भारतीय रुपयों में करीब 33 लाख है, जबकि मेरिका में इसी स्तर के लग्जरी फीचर्स वाली मर्सिडीज या टेस्ला की गाड़ियां 70 से 80 लाख रुपये से कम में नहीं मिलतीं।
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लेकिन सवाल यह है कि क्या अमेरिकी ग्राहक कभी इस कार को खरीद पाएंगे? जवाब है, कभी नहीं। इन चीनी कारों ने अमेरिकी ऑटो लॉबी, सेना और खुफिया तंत्र की नींद उड़ा दी है और इन्हें जासूसी के डर से पूरी तरह बैन करने के लिए कानून लाने की तैयारी चल रही है।

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Luxury Features Half Price: How Cheap Chinese Smart Cars Rattling US Auto Industry
गीली गैलेक्सी एम9 - फोटो : geely.ae

33 लाख रुपये की कार में लग्जरी फीचर्स की भरमार

  • इसका उदाहरण चीन की दिग्गज ऑटो कंपनी गीली की फ्लैगशिप हाइब्रिड एसयूवी गैलेक्सी एम9 है। यह तीन रो वाली लग्जरी क्रॉसओवर एसयूवी है। इसमें बैटरी और पेट्रोल इंजन दोनों का इस्तेमाल होता है और यह एक बार में करीब 1,060 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। चीन में इसकी कीमत करीब 35 हजार डॉलर है। खास बात यह है कि इस कीमत में कार में कई प्रीमियम और स्मार्ट फीचर्स मिलते हैं।
  • कार में मसाज और हीटिंग वाली लेदर सीट्स, करीब 30 इंच का कस्टमाइजेबल वीडियो डिस्प्ले और 27 स्पीकर्स वाला सराउंड साउंड सिस्टम दिया गया है। इसके अलावा इन-बिल्ट फ्रिज और वायरलेस कराओके जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। दरवाजे लॉक करते ही कार में टेलर स्विफ्ट या बीथोवेन की धुन बजने जैसी सुविधा भी दी गई है।


स्क्रीन से ड्रैग-एंड-ड्रॉप करते ही पार्क होगी कार

  • किसी चालक को गाड़ी पार्क करने में कोई परेशानी न हो, इसलिए गैलेक्सी एम9 में पार्किंग को भी काफी आसान बनाने की कोशिश की गई है। अगर ड्राइवर को कार पार्क करने में परेशानी हो रही है तो स्क्रीन पर कार की तस्वीर को खाली पार्किंग जगह पर ड्रैग-एंड-ड्रॉप किया जा सकता है। इसके बाद कार खुद-ब-खुद पार्क हो सकती है।
  • यही टेक्नोलॉजी और फीचर्स अमेरिका के लिए चिंता का कारण भी बन रहे हैं। अमेरिका में इसी स्तर की लग्जरी सुविधाओं वाली मर्सिडीज और टेस्ला की कारों की कीमत करीब 70 से 80 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकती है।


अमेरिकी ग्राहक नहीं खरीद पाएगा चीनी कार

  • सवाल यह है कि दुनिया के सबसे बड़े ऑटो बाजारों में शामिल अमेरिका में क्या आम ग्राहक ऐसी चीनी कार खरीद पाएगा? नहीं...अमेरिकी ऑटो लॉबी, सेना और खुफिया एजेंसियों को इन कनेक्टेड कारों से डेटा सुरक्षा और जासूसी का खतरा नजर आ रहा है। इसी वजह से अमेरिका में चीनी कारों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए कानून लाने की तैयारी चल रही है।
  • अमेरिकी सीनेटर बर्नी मोरेनो और डेमोक्रेट सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन ने कनेक्टेड व्हीकल सिक्योरिटी एक्ट 2026 पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस विधेयक को संसद की समिति ने सर्वसम्मति से पास कर दिया है। प्रस्तावित नियम के तहत जिस कार निर्माता कंपनी में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 15 फीसदी से ज्यादा होगी, उसकी कारों की अमेरिका में बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित की जा सकती है।

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गीली गैलेक्सी एम9 - फोटो : geely.ae

मर्सिडीज-बेंज पर भी आ सकता है असर
इस प्रस्तावित नियम का असर सिर्फ चीनी कंपनियों तक सीमित नहीं रह सकता। जर्मन लग्जरी कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज भी इसकी चपेट में आ सकती है। मर्सिडीज-बेंज में चीनी हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी बताई गई है। ऐसे में अगर यह कानून लागू होता है तो अमेरिकी बाजार में बने रहने के लिए कंपनी को अपनी चीनी हिस्सेदारी घटानी पड़ सकती है।

कनाडा और मैक्सिको से भी नहीं ला सकेंगे चीनी कार?
प्रस्तावित कानून का दायरा सीमा पार से आने वाली कारों तक भी बढ़ सकता है। इसके तहत अगर कनाडा या मैक्सिको का कोई नागरिक चीनी कार खरीदकर अमेरिका की सीमा में प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो उसे रोका जा सकता है। यानी पड़ोसी देशों से चीनी कार खरीदकर अमेरिका में चलाने का रास्ता भी आसान नहीं रहेगा।

अमेरिका ग्राहक नहीं खरीद सकते यह कार
सीनेटर और पूर्व सीआईए एजेंट एलिसा स्लॉटकिन ने इन कनेक्टेड कारों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ये कारें हर सेकंड दर्जनों तस्वीरें ले सकती हैं। उनके अनुसार, चिंता इस बात की है कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों, संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर और शीर्ष नेताओं की लोकेशन से जुड़ा डेटा सीधे बीजिंग भेजा जा सकता है। यही वजह है कि अमेरिकी सुरक्षा तंत्र इन वाहनों को केवल ऑटोमोबाइल के तौर पर नहीं, बल्कि संभावित डेटा और सुरक्षा जोखिम के रूप में देख रहा है।

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गीली गैलेक्सी एम9 - फोटो : geely.ae

चीन की असली ताकत सिर्फ सस्ती कार नहीं
वहीं, जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन हेल्वेस्टन का कहना है कि चीन की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ सस्ती कारें बनाना नहीं है। चीन ने सप्लाई चेन का पूरा इकोसिस्टम तैयार किया है और जमीन से नई अत्याधुनिक फैक्ट्रियां खड़ी की हैं। इससे चीनी कंपनियों को कम लागत पर तेजी से नई तकनीक और वाहन विकसित करने में मदद मिल रही है।

हमेशा के लिए चीनी कारों को बाहर नहीं रख सकते
इसपर फोर्ड मोटर कंपनी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बिल फोर्ड का कहना है कि अमेरिका चीनी कारों को हमेशा के लिए अपने बाजार से बाहर रखने की उम्मीद नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, अमेरिका को चीन की कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता विकसित करनी होगी और उसी के खेल में उतरकर उन्हें हराना होगा। चीन की सिर्फ 28 साल पुरानी गीली आज दुनियाभर में 123 साल पुरानी फोर्ड  के बराबर कारें बेच रही है। यह बदलाव वैश्विक ऑटो इंडस्ट्री में चीन की तेजी से बढ़ती ताकत को दिखाता है।

पूरी तरह बैन या कड़े नियम? अमेरिका के सामने बड़ा सवाल
यहां पर साइबर एक्सपर्ट़स का मानना है कि अमेरिका के पास चीनी कारों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के अलावा दूसरा रास्ता भी हो सकता है। सरकार कड़े नियम बनाकर चीनी कंपनियों को अमेरिकी सर्वर इस्तेमाल करने और स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोर करने के लिए मजबूर कर सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इससे अमेरिकियों को सस्ती और उन्नत तकनीक से हमेशा के लिए दूर रखना आसान नहीं होगा। ब्रिटेन, पोलैंड और इस्राइल जैसे देशों ने चीनी कारों पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है। 

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