Car Export India: दुनिया भर में दौड़ीं भारत की कारें, वैश्विक निर्यात में बना नया रिकॉर्ड, जानें आंकड़े?
Indian Auto Export 2025: भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने साल 2025 में वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बनाई। यात्री वाहनों के निर्यात में रिकॉर्ड 15 प्रतिशत की सलाना वृद्धि दर्ज करते हुए भारतीय कारों को विदेशों में भेजा है। जानें पूरा आंकड़ा...
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भारतीय ऑटोमोबाइल निर्यात के इतिहास में साल 2025 अब तक का सबसे मजबूत वर्ष साबित हुआ है। इस दौरान भारत से कुल 8,58,000 यात्री कारों का निर्यात किया गया, जो कि 2024 में दर्ज 7,44,000 यूनिट्स की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को दर्शाता है। आंकड़ों के अनुसार, सालाना आधार पर 15 प्रतिशत (वाईओवाई) की वृद्धि दर्ज की गई है। ये वैश्विक बाजारों में भारतीय कारों की बढ़ती स्वीकार्यता और मेक इन इंडिया पहल की सफलता का स्पष्ट संकेत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी, स्ट्रांग सेफ्टी स्टैंडर्ड्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्यात में आई तेजी ने इस साल रिकॉर्ड ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई। यही वजह है कि भारत अब केवल उभरते बाजारों के लिए नहीं, बल्कि विकसित देशों के लिए भी एक भरोसेमंद ऑटो एक्सपोर्ट हब बनता जा रहा है।
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किन कारों का रहा दबदबा?
भारतीय कार निर्यात में मारुति सुजुकी का दबदबा बरकरार रहा। कंपनी ने कुल निर्यात का 46 प्रतिशत हिस्सा हासिल करते हुए लगभग 3.95 लाख गाड़ियां विदेशी बाजारों में भेजीं। खास बात ये रही कि मारुति की पहली इलेक्ट्रिक कार ई-विटारा की 13 हजार से ज्यादा यूनिट्स यूरोप को निर्यात की गईं।
वहीं, ह्यूंदै इंडिया ने 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ एक लाख 86 हजार 528 कारों का निर्यात किया। होंडा कार्स इंडिया ने भी बड़ा संकेत देते हुए भारत को अपनी आगामी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए एकमात्र ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की योजना का खुलासा किया है।
बढ़ा मेक इन इंडिया का भरोसा
अब तक अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक सीमित भारतीय कारों की मांग 2025 में यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित बाजारों तक पहुंच गई है। यह बदलाव भारत की बेहतर मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी, सेफ्टी स्टैंडर्ड्स और टेक्नोलॉजी अपग्रेड का नतीजा माना जा रहा है।
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हालांकि इस ग्रोथ के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। भारत के तीसरे सबसे बड़े निर्यात बाजार मैक्सिको ने एक जनवरी 2026 से आयात शुल्क दोगुना करने का एलान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात की गति बनाए रखने के लिए भारत को अब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और व्यापार कूटनीति पर तेजी से काम करना होगा।
दुनिया के तीन शीर्ष देशों में शामिल हो सकता है भारत
SIAM के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा के अनुसार भारत अब दुनिया का चौथा सबसे बड़ा यात्री वाहन निर्माता बन चुका है। हमारी ऑटो इंडस्ट्री वैश्विक सप्लाई चेन में लगातार मजबूत हो रही है। अब भारतीय कार निर्माता आने वाले पांच वर्षों में अपने कुल उत्पादन का 30 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। अगर ये लक्ष्य सफल हुआ तो भारत ऑटो एक्सपोर्ट के मामले में दुनिया के तीन देशों में शामिल हो सकता है।