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Rare Earths: भारत जापान के साथ रेयर अर्थ निर्यात समझौते की दोबारा करेगा समीक्षा, जानें क्यों लिया फैसला
Sat, 14 Jun 2025 12:52 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 14 Jun 2025 12:52 PM IST
सार
भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनी इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL) को जापान के साथ चल रहे रेयर अर्थ निर्यात समझौते को फिलहाल रोकने का निर्देश दिया है।
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- फोटो : Freepik
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विस्तार
भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनी इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL) को जापान के साथ चल रहे रेयर अर्थ निर्यात समझौते को फिलहाल रोकने का निर्देश दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि देश के लिए जरूरी रेयर मिनरल्स की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और चीन पर निर्भरता को कम किया जा सके। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में चीन द्वारा रेयर अर्थ की आपूर्ति पर नियंत्रण को लेकर चिंता बढ़ रही है। ये रेयर मिनरल्स इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।
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2012 से चल रहा था भारत-जापान समझौता
IREL और टोयोटा ग्रुप की कंपनी टोयोत्सु रेयर अर्थ्स इंडिया के बीच 2012 में हुआ समझौता जापान को मुख्य रूप से नियोडिमियम जैसे रेयर अर्थ निर्यात करने की सुविधा देता था। साल 2024 में ही टोयोत्सु ने भारत से 1,000 मीट्रिक टन से ज्यादा रेयर अर्थ जापान भेजा, जो IREL के कुल 2,900 मीट्रिक टन उत्पादन का करीब एक-तिहाई हिस्सा था। हालांकि जापान अभी भी चीन से ही रेयर अर्थ का बड़ा हिस्सा आयात करता है। क्योंकि चीन इस क्षेत्र में उत्पादन और प्रोसेसिंग दोनों में वैश्विक स्तर पर सबसे आगे है।
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- फोटो : Volkswagen
IREL अब घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देगा
IREL पहले तक रेयर अर्थ का निर्यात करता रहा क्योंकि भारत में उसकी प्रोसेसिंग की क्षमता सीमित थी। लेकिन अप्रैल 2024 से चीन द्वारा रेयर अर्थ के निर्यात पर लगाम लगाए जाने के बाद भारत की सोच में बदलाव आया है। अब IREL का ध्यान देश के भीतर खनिज संसाधनों को विकसित करने और उनका उपयोग यहीं करने पर है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग के हितधारकों के साथ बैठक में IREL को घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। हालांकि मौजूदा समझौते को तुरंत खत्म करना संभव नहीं है क्योंकि यह द्विपक्षीय करार है। लेकिन IREL अब इस मुद्दे को कूटनीतिक तरीके से हल करने की कोशिश कर रहा है। जापान को भारत एक रणनीतिक साझेदार मानता है।
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IREL पहले तक रेयर अर्थ का निर्यात करता रहा क्योंकि भारत में उसकी प्रोसेसिंग की क्षमता सीमित थी। लेकिन अप्रैल 2024 से चीन द्वारा रेयर अर्थ के निर्यात पर लगाम लगाए जाने के बाद भारत की सोच में बदलाव आया है। अब IREL का ध्यान देश के भीतर खनिज संसाधनों को विकसित करने और उनका उपयोग यहीं करने पर है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने उद्योग के हितधारकों के साथ बैठक में IREL को घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। हालांकि मौजूदा समझौते को तुरंत खत्म करना संभव नहीं है क्योंकि यह द्विपक्षीय करार है। लेकिन IREL अब इस मुद्दे को कूटनीतिक तरीके से हल करने की कोशिश कर रहा है। जापान को भारत एक रणनीतिक साझेदार मानता है।
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घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने की तैयारी में भारत
भारत के पास दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार है, जो लगभग 6.9 मिलियन मीट्रिक टन है। बावजूद इसके, देश में बड़े पैमाने पर मैग्नेट उत्पादन की तकनीकी और ढांचागत क्षमता अभी विकसित नहीं हो पाई है। मार्च 2025 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में भारत ने लगभग 53,748 मीट्रिक टन रेयर अर्थ मैग्नेट आयात किए, जिनमें से ज्यादातर चीन से आए। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक गाड़ियों, विंड टर्बाइनों और मेडिकल उपकरणों में काम आते हैं।
भारत में रेयर अर्थ का खनन करने का अधिकार सिर्फ IREL के पास है। और यह कंपनी परमाणु ऊर्जा विभाग को न्यूक्लियर और डिफेंस सेक्टर के लिए जरूरी खनिज सप्लाई करती है। लेकिन देश में पूरी सप्लाई चेन और आवश्यक तकनीक की कमी के कारण आत्मनिर्भरता हासिल नहीं हो पाई है।
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भारत में रेयर अर्थ का खनन करने का अधिकार सिर्फ IREL के पास है। और यह कंपनी परमाणु ऊर्जा विभाग को न्यूक्लियर और डिफेंस सेक्टर के लिए जरूरी खनिज सप्लाई करती है। लेकिन देश में पूरी सप्लाई चेन और आवश्यक तकनीक की कमी के कारण आत्मनिर्भरता हासिल नहीं हो पाई है।
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- फोटो : Freepik
उत्पादन बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने की योजना
IREL फिलहाल ओडिशा में एक्सट्रैक्शन यूनिट और केरल में रिफाइनिंग प्लांट चलाता है। कंपनी मार्च 2026 तक 450 मीट्रिक टन नियोडिमियम का उत्पादन करने की योजना बना रही है। और 2030 तक इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही IREL अब एक कॉर्पोरेट पार्टनर की तलाश में है जो ऑटोमोटिव और फार्मा इंडस्ट्री के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट बनाना शुरू कर सके।
सरकार भी इस दिशा में कदम उठा रही है और घरेलू प्रोसेसिंग और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग के लिए निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विशेष इंसेंटिव पैकेज तैयार कर रही है। ताकि देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सके और विदेशी निर्भरता घटाई जा सके।
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