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Biogas: बायोगैस से भारत को सालाना 1.17 अरब डॉलर की होगी बचत, जानें कैसे

Sun, 03 Dec 2023 08:12 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sun, 03 Dec 2023 08:12 PM IST
सार

भारत की अपनी प्राकृतिक गैस आपूर्ति के साथ 5 प्रतिशत बायोगैस को मिश्रित करने की योजना से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के आयात में काफी कमी आ सकती है, जिससे सालाना लगभग 1.17 अरब डॉलर की बचत होगी। भारतीय बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए पीटीआई ने यह जानकारी दी है।

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India's plan to blend biogas with natural gas supplies could save India 1.17 Billion Dollar Annually
बायो सीएनजी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत की अपनी प्राकृतिक गैस आपूर्ति के साथ 5 प्रतिशत बायोगैस को मिश्रित करने की योजना से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के आयात में काफी कमी आ सकती है, जिससे सालाना लगभग 1.17 अरब डॉलर की बचत होगी। भारतीय बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए पीटीआई ने यह जानकारी दी है। यह पहल कंप्रेस्ड बायोगैस मिश्रण दायित्व (सीबीओ) योजना के तहत 1 अप्रैल, 2025 से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के साथ 1 प्रतिशत बायोगैस मिश्रण पेश करने के सरकार के निर्देश के अनुरूप है, जिसे वित्तीय वर्ष 2028-29 तक 5 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। 
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भारत को गैस आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना पिछले कुछ समय से एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य रहा है। इसमें ऊर्जा मिश्रण में गैस की मौजूदा 6 प्रतिशत हिस्सेदारी को 2030 तक 15 प्रतिशत तक बढ़ाना शामिल है। अनुमानित 5 प्रतिशत बायोगैस-प्राकृतिक गैस मिश्रण से भारत के एलएनजी आयात में काफी कमी आने की उम्मीद है। जिससे, 2019 के 1.9 मीट्रिक टन प्रति व्यक्ति की तुलना में, प्रति व्यक्ति CO2 उत्सर्जन में 2 प्रतिशत की कमी आएगी। पीटीआई ने यह जानकारी दी है।
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इसके अलावा, यह योजना 37,500 करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा दे सकती है, जिससे 2028-29 तक कम से कम 750 कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) परियोजनाओं की स्थापना की सुविधा मिलेगी। आयातित प्राकृतिक गैस पर भारी निर्भरता को देखते हुए, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए यह विकास महत्वपूर्ण है।
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पीएनजी और सीबीजी सप्लाई चेन में बायोगैस का इंटीग्रेशन न सिर्फ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है बल्कि आर्थिक फायदा का भी वादा करता है। यह कदम इथेनॉल के साथ देखे गए प्रभाव के समान, कृषि आय पर सकारात्मक असर डाल सकता है। प्रत्येक बड़े पैमाने का बायोगैस प्लांट संभावित रूप से संयंत्र के पास की लगभग 1,000 एकड़ भूमि को जैविक कृषि में बदल सकता है।

बायोगैस उत्पादन, कृषि अवशेष, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट और खाद्य अपशिष्ट जैसे विविध जैविक अपशिष्ट स्रोतों का इस्तेमाल करके, किसानों, अपशिष्ट प्रबंधन संस्थाओं और अन्य हितधारकों के लिए नए आर्थिक रास्ते खोलता है।


इसके अलावा, बायोगैस-प्राकृतिक गैस मिश्रण जैव ईंधन बाजार को सुव्यवस्थित करेगा, पूंजी और परिचालन व्यय को कम करके निवेशकों की अपील को बढ़ाएगा। आईबीए इस बात पर जोर देता है कि इन विकासों से जैव ईंधन बाजार लेनदेन में आसानी होगी और क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
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