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अब टोल प्लाजा पर नहीं लगाना पड़ेगा ब्रेक: देश का पहला AI-आधारित बैरियर-लेस टोल शुरू, कैसे काम करेगी ये तकनीक?
Fri, 01 May 2026 03:23 PM IST
Jagriti
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Fri, 01 May 2026 03:23 PM IST
सार
Barrier Free Toll Plaza: भारत में हाइवे यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है, क्योंकि देश का पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा गुजरात के सूरत के पास मुंबई-दिल्ली नेशनल हाईवे NH-48 पर शुरू कर दिया गया है। यह नया सिस्टम भारत के टोल कलेक्शन मॉडल में एक बड़ा तकनीकी बदलाव माना जा रहा है। जानिए इसके बारे में विस्तार से...
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
AI Toll System: नेशनल हाइवे एथाॅरिटी ऑफ इंडिया ने सूरत के पास मुंबई-दिल्ली नेशनल हाईवे एनएच-48 पर देश का पहला बैरियर-फ्री टोल प्लाजा शुरू कर दिया है। अब वाहन बिना रुके टोल पार कर सकेंगे और फास्टैग से अपने आप भुगतान कट जाएगा। यह सिस्टम मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित है, जिसमें हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और RFID सेंसर वाहन की नंबर प्लेट और फास्टैग को स्कैन कर सीधे बैंक खाते से टोल काट लेते हैं। कहा जा रहा है कि सरकार का लक्ष्य 2026 तक देशभर के 1,050 से ज्यादा टोल प्लाजा को एआई-आधारित बैरियर-फ्री सिस्टम में बदलना है।
यह नया सिस्टम भारत के टोल कलेक्शन मॉडल में सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव माना जा रहा है। चोर्यासी टोल प्लाजा पर लागू यह तकनीक वाहनों को बिना रुके सीधे टोल पार करने की अनुमति देती है। यानी अब न बैरियर, न लाइन और न इंतजार।
MLFF Technology: कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
यह पूरी व्यवस्था मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित है। इसमें टोल प्लाजा के ऊपर बने गैंट्री पर हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो पहले वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे, फिर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) सेंसर फास्टैग की जानकारी पढ़ेंगे, फिर जैसे ही वाहन गैंट्री के नीचे से गुजरेगा, सिस्टम अपने आप बैंक खाते से टोल राशि काट लेगा है। यह पूरी प्रक्रिया कॉन्टैक्टलेस और ऑटोमेटेड है। यह परियोजना नितिन गडकरी के सड़क परिवहन मंत्रालय के तहत शुरू की गई है।
RFID Tolling: 80 Kmph की स्पीड पर भी कट जाएगा टोल
इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत है कि इससे वाहन को स्पीड कम करने की भी जरूरत नहीं होगी। इस तकनीक से वाहन 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी टोल क्रॉस कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे ट्रैफिक जाम कम होगा, ईंधन की बचत होगी, यात्रा समय घटेगा और प्रदूषण भी कम होगा।
फास्टैग नहीं तो क्या होगा?
अगर किसी वाहन में एक्टिव फास्टैग नहीं है, तब भी सिस्टम नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान कर लेगा। इसके बाद वाहन मालिक को इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा और ऑनलाइन भुगतान की मांग की जाएगी। इस पर नेशनल हाइवे एथॉरिटी ऑफ इंडिया के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर एआर चित्रांसी ने कहा कि यह बैरियर-लेस टोलिंग मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोलिंग कहलाती है। इसमें वाहन को रोकने की जरूरत नहीं है। वाहन सीधे गैंट्री के नीचे से गुजरेगा और टोल अपने आप कट जाएगा।
पूरे देश में लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक देशभर के 1,050 से ज्यादा टोल प्लाजा को एआई-आधारित बैरियर-फ्री सिस्टम में बदलना है। सूरत का यह प्लाजा फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है।
तो क्या इससे सरकार को कोई फायदा होगा?
सरकारी अनुमान के अनुसार इससे हर साल लगभग 1,500 करोड़ रुपये का ईंधन बचेगा। बेहतर टोल कलेक्शन से 6,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। साथ ही यह बदलाव भारत के हाइवे इंफ्रास्ट्रक्चर को अमेरिका और यूरोप जैसे देशों के स्तर पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जिसे देखते हुए एक्सपर्ट्स का संभावना जता रहे हैं कि आने वाले समय में टोल प्लाजा पर रुकना पूरी तरह खत्म हो सकता है।
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यह नया सिस्टम भारत के टोल कलेक्शन मॉडल में सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव माना जा रहा है। चोर्यासी टोल प्लाजा पर लागू यह तकनीक वाहनों को बिना रुके सीधे टोल पार करने की अनुमति देती है। यानी अब न बैरियर, न लाइन और न इंतजार।
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#WATCH | Surat,. Gujarat: India’s first barrierless, Multi-Lane Free Flow (MLFF) tolling system has been officially implemented at the Choryasi toll plaza on NH-48 near Surat.
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(Visuals from Choryasi toll plaza) pic.twitter.com/jVwAEM8Icu — ANI (@ANI) May 1, 2026
MLFF Technology: कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
यह पूरी व्यवस्था मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित है। इसमें टोल प्लाजा के ऊपर बने गैंट्री पर हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो पहले वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे, फिर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) सेंसर फास्टैग की जानकारी पढ़ेंगे, फिर जैसे ही वाहन गैंट्री के नीचे से गुजरेगा, सिस्टम अपने आप बैंक खाते से टोल राशि काट लेगा है। यह पूरी प्रक्रिया कॉन्टैक्टलेस और ऑटोमेटेड है। यह परियोजना नितिन गडकरी के सड़क परिवहन मंत्रालय के तहत शुरू की गई है।
RFID Tolling: 80 Kmph की स्पीड पर भी कट जाएगा टोल
इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत है कि इससे वाहन को स्पीड कम करने की भी जरूरत नहीं होगी। इस तकनीक से वाहन 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी टोल क्रॉस कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे ट्रैफिक जाम कम होगा, ईंधन की बचत होगी, यात्रा समय घटेगा और प्रदूषण भी कम होगा।
फास्टैग नहीं तो क्या होगा?
अगर किसी वाहन में एक्टिव फास्टैग नहीं है, तब भी सिस्टम नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान कर लेगा। इसके बाद वाहन मालिक को इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा और ऑनलाइन भुगतान की मांग की जाएगी। इस पर नेशनल हाइवे एथॉरिटी ऑफ इंडिया के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर एआर चित्रांसी ने कहा कि यह बैरियर-लेस टोलिंग मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोलिंग कहलाती है। इसमें वाहन को रोकने की जरूरत नहीं है। वाहन सीधे गैंट्री के नीचे से गुजरेगा और टोल अपने आप कट जाएगा।
पूरे देश में लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक देशभर के 1,050 से ज्यादा टोल प्लाजा को एआई-आधारित बैरियर-फ्री सिस्टम में बदलना है। सूरत का यह प्लाजा फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है।
तो क्या इससे सरकार को कोई फायदा होगा?
सरकारी अनुमान के अनुसार इससे हर साल लगभग 1,500 करोड़ रुपये का ईंधन बचेगा। बेहतर टोल कलेक्शन से 6,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। साथ ही यह बदलाव भारत के हाइवे इंफ्रास्ट्रक्चर को अमेरिका और यूरोप जैसे देशों के स्तर पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जिसे देखते हुए एक्सपर्ट्स का संभावना जता रहे हैं कि आने वाले समय में टोल प्लाजा पर रुकना पूरी तरह खत्म हो सकता है।