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Rare Earths: भारत की ऑटो इंडस्ट्री को चीन के प्रतिबंध से बड़ा झटका नहीं, यहां 95% गाड़ियां पेट्रोल-डीजल की
Tue, 17 Jun 2025 08:47 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 17 Jun 2025 08:47 PM IST
सार
चीन द्वारा रेयर अर्थ मैग्नेट्स के एक्सपोर्ट पर लगाए गए हालिया प्रतिबंधों का भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर बहुत कम असर पड़ेगा। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी वजह यह है कि भारत में आज भी 95 प्रतिशत से ज्यादा गाड़ियां इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) पर ही चल रही हैं।
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विस्तार
चीन द्वारा रेयर अर्थ मैग्नेट्स के एक्सपोर्ट पर लगाए गए हालिया प्रतिबंधों का भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर बहुत कम असर पड़ेगा। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी वजह यह है कि भारत में आज भी 95 प्रतिशत से ज्यादा गाड़ियां इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) पर ही चल रही हैं, यानी पेट्रोल या डीजल से। यह रिपोर्ट नुवामा नाम की एक संस्था ने जारी की है।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
हालांकि यह प्रतिबंध मुख्य रूप से रक्षा क्षेत्र को ध्यान में रखकर लगाया गया है, लेकिन इसका सबसे बड़ा असर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पर देखने को मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा प्रभाव इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल्स, फिर हाइब्रिड गाड़ियां, और फिर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर पड़ेगा। वहीं पेट्रोल-डीजल से चलने वाली पारंपरिक गाड़ियों पर इसका असर नगण्य रहेगा।
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इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
हालांकि यह प्रतिबंध मुख्य रूप से रक्षा क्षेत्र को ध्यान में रखकर लगाया गया है, लेकिन इसका सबसे बड़ा असर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पर देखने को मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा प्रभाव इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल्स, फिर हाइब्रिड गाड़ियां, और फिर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर पड़ेगा। वहीं पेट्रोल-डीजल से चलने वाली पारंपरिक गाड़ियों पर इसका असर नगण्य रहेगा।
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भारत में ईवी की हिस्सेदारी अभी भी कम
भारत में अभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी बहुत कम है। टू-व्हीलर सेगमेंट में सिर्फ 7 प्रतिशत, और पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में महज 3 प्रतिशत। हालांकि वित्त वर्ष 23 से वित्त वर्ष 25 के बीच ईवी की बिक्री में 25 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है, लेकिन यह ग्रोथ बहुत छोटे स्तर से शुरू हुई है। इसलिए अगर ईवी बिक्री में थोड़ी गिरावट आती भी है, तो इसका समग्र असर भारत की पूरी ऑटो इंडस्ट्री पर कम ही रहेगा।
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भारत में अभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी बहुत कम है। टू-व्हीलर सेगमेंट में सिर्फ 7 प्रतिशत, और पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में महज 3 प्रतिशत। हालांकि वित्त वर्ष 23 से वित्त वर्ष 25 के बीच ईवी की बिक्री में 25 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है, लेकिन यह ग्रोथ बहुत छोटे स्तर से शुरू हुई है। इसलिए अगर ईवी बिक्री में थोड़ी गिरावट आती भी है, तो इसका समग्र असर भारत की पूरी ऑटो इंडस्ट्री पर कम ही रहेगा।
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रेयर अर्थ मटेरियल्स की जरूरत ईवी मोटर्स में ज्यादा
ईवी गाड़ियों में ज्यादातर परमानेन्ट मैगनेट सिंक्रोनस मोटर्स (PMSM) का इस्तेमाल होता है, जो रेयर अर्थ मटेरियल्स (REM) पर निर्भर होते हैं। खासतौर पर उच्च तापमान पर चुंबकीय क्षमता बनाए रखने के लिए। रिपोर्ट के मुताबिक, एक ईवी में औसतन 0.8 किलोग्राम, हाइब्रिड गाड़ियों में 0.5 किलोग्राम, और ICE वाहनों में केवल 0.1 किलोग्राम REM का इस्तेमाल होता है।
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ईवी गाड़ियों में ज्यादातर परमानेन्ट मैगनेट सिंक्रोनस मोटर्स (PMSM) का इस्तेमाल होता है, जो रेयर अर्थ मटेरियल्स (REM) पर निर्भर होते हैं। खासतौर पर उच्च तापमान पर चुंबकीय क्षमता बनाए रखने के लिए। रिपोर्ट के मुताबिक, एक ईवी में औसतन 0.8 किलोग्राम, हाइब्रिड गाड़ियों में 0.5 किलोग्राम, और ICE वाहनों में केवल 0.1 किलोग्राम REM का इस्तेमाल होता है।
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किन तत्वों पर चीन ने लगाया है बैन?
चीन ने अप्रैल में जिन सात रेयर अर्थ एलिमेंट्स के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई है, उनमें समेरियम, गैडोलिनियम, टरबियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेशियम, स्कैंडियम और यट्रियम शामिल हैं। ये सभी तत्व उन मैग्नेट्स को बनाने में इस्तेमाल होते हैं जो ईवी मोटर्स, एयरोस्पेस, और इंडस्ट्रियल मशीनों में काम आते हैं। चीन इस समय में दुनिया की 90 प्रतिशत से ज्यादा REM प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है, जिससे वह इस पूरी सप्लाई चेन पर भारी प्रभाव डाल सकता है।
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चीन ने अप्रैल में जिन सात रेयर अर्थ एलिमेंट्स के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई है, उनमें समेरियम, गैडोलिनियम, टरबियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेशियम, स्कैंडियम और यट्रियम शामिल हैं। ये सभी तत्व उन मैग्नेट्स को बनाने में इस्तेमाल होते हैं जो ईवी मोटर्स, एयरोस्पेस, और इंडस्ट्रियल मशीनों में काम आते हैं। चीन इस समय में दुनिया की 90 प्रतिशत से ज्यादा REM प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है, जिससे वह इस पूरी सप्लाई चेन पर भारी प्रभाव डाल सकता है।
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- फोटो : Volkswagen
चीन से सप्लाई के लिए मंजूरी लेनी होगी
अब ऑटो कंपनियों को इन तत्वों को चीन से मंगाने के लिए एंड-यूजर सर्टिफिकेशन लेना होगा, जो चीनी सरकार से लगभग 45 दिन में मिल सकता है। इससे सप्लाई चेन में थोड़ी देरी और अनिश्चितता आ सकती है। लेकिन पारंपरिक ICE वाहनों पर इसका असर बहुत कम होगा।
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