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Hindi News ›   Automobiles News ›   India-EU Launch ₹169 Crore Initiative to Boost EV Battery Recycling and Green Innovation

ईवी सेक्टर के लिए बड़ी खबर: बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए भारत-ईयू का करार, 169 करोड़ रुपये के फंड का एलान

Thu, 07 May 2026 11:10 AM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Thu, 07 May 2026 11:10 AM IST
सार

India-EU EV Battery Recycling: इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) का चलन तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन खराब होने के बाद इनकी बैटरियों का क्या होगा? इसी बड़ी चुनौती को सुलझाने के लिए भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने हाथ मिलाया है। 169 करोड़ रुपये के इस जॉइंट प्रोजेक्ट के जरिए न सिर्फ बैटरियों को रीसायकल किया जाएगा, बल्कि उनसे महंगी धातुएं निकालकर भारत को इस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है।

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India-EU Launch ₹169 Crore Initiative to Boost EV Battery Recycling and Green Innovation
ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग - फोटो : एआई

विस्तार

इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन लोगों के मन में अक्सर एक सवाल होता है- 'जब इन कारों की बैटरी खराब होगी, तो उनका क्या होगा?' इसी बड़ी समस्या को सुलझाने के लिए भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक बड़ा कदम उठाया है। दोनों ने मिलकर ईवी बैटरी को रीसायकल (पुनर्चक्रण) करने और एक बेहतर इकोसिस्टम बनाने के लिए एक नए प्रोजेक्ट की शुरुआत की है।

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क्या है यह नई पहल?

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मिलकर एक नई और महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है, जिसे भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के तहत पेश किया गया है। इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में नए और आधुनिक विचारों को बढ़ावा देना है। इसके लिए प्रस्ताव भेजने की अंतिम तारीख 15 सितंबर, 2026 तय की गई है। इस खास प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए लगभग 169 करोड़ रुपये का एक बड़ा फंड तैयार किया गया है। इसे यूरोप के 'होराइजन यूरोप प्रोग्राम' और भारत के 'भारी उद्योग मंत्रालय' के जरिए मिलकर सपोर्ट दिया जा रहा है।

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इस प्रोजेक्ट का मुख्य फोकस किन बातों पर होगा?

इस पहल का असल मकसद सिर्फ पुरानी बैटरियों को फेंकने से बचाना नहीं है, बल्कि उन्हें एक कीमती संसाधन में बदलना है। सबसे ज्यादा जोर महंगी धातुओं की रिकवरी पर दिया जाएगा। ताकि बैटरी के भीतर मौजूद लिथियम, ग्रेफाइट और कोबाल्ट जैसे दुर्लभ कच्चे माल को सुरक्षित तरीके से निकालकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।

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इसके साथ ही, भारत में एक खास टेस्टिंग प्लांट स्थापित की जाएगी। इससे नई रीसाइक्लिंग तकनीकों को लैब के सीमित दायरे से निकालकर असल दुनिया की स्थितियों में टेस्ट करना आसान हो जाएगा।

प्रोजेक्ट का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू बैटरियों का 'सेकंड-लाइफ' इस्तेमाल है। इसमें ऐसी बैटरियों को जो अब कारों के लायक नहीं रहीं, उन्हें घरों या पावर ग्रिड में बिजली स्टोर करने के काम में लाया जाएगा। कुल मिलाकर यह पूरी कवायद भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। क्योंकि जब पुरानी बैटरियों से ही जरूरी खनिज मिलने लगेंगे तो कच्चे माल के आयात पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।


क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

विशेषज्ञों की राय के बारे में बात करें तो भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो अजय कुमार सूद ने इसे एक शानदार कदम बताया है। उनका मानना है कि चूंकि भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बिक्री रॉकेट की तरह बढ़ रही है, इसलिए देश के भीतर ही रीसाइक्लिंग का एक मजबूत सिस्टम तैयार करना पर्यावरण और संसाधनों की सुरक्षा, दोनों ही लिहाज से बेहद जरूरी है।



इसी बात को आगे बढ़ाते हुए भारत में यूरोपीय संघ (ईयू) के राजदूत हर्वे डेलफिन ने भी स्पष्ट किया कि दुनिया को प्रदूषण मुक्त बनाने की जंग में बैटरी सबसे अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह साझा प्रयास नई और उन्नत तकनीकों को प्रयोगशालाओं से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाने में काफी मददगार साबित होगा।

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