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Hindi News ›   Automobiles News ›   India Can Mobilise Rs 8 Lakh Crore Annually for Highways, Says Nitin Gadkari; Flags Slow Spending Pace

Nitin Gadkari: गडकरी का एलान- भारत हर साल ₹8 लाख करोड़ हाईवे के लिए जुटा सकता है, जताई खर्च पर यह चिंता

Tue, 24 Mar 2026 07:18 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Tue, 24 Mar 2026 07:18 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि सरकार, राजमार्ग क्षेत्र में मजबूत एसेट प्रोफाइल के आधार पर, 3.2 लाख करोड़ रुपये के बजटीय समर्थन के अलावा, बाजार से हर साल 5 लाख करोड़ रुपये जुटा सकती है।

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India Can Mobilise Rs 8 Lakh Crore Annually for Highways, Says Nitin Gadkari; Flags Slow Spending Pace
नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

हाईवे सेक्टर में खर्च की धीमी गति को लेकर चिंतित केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि सरकार सड़क परियोजनाओं के लिए हर साल 8 लाख करोड़ रुपये तक जुटा सकती है।

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इसमें:

  • करीब 5 लाख करोड़ रुपये बाजार से जुटाए जा सकते हैं

  • और 3.2 लाख करोड़ रुपये बजटीय सहायता से आ सकते हैं


फिर खर्च की रफ्तार धीमी क्यों है?
गडकरी ने चिंता जताई कि सबसे बड़ी समस्या फंड जुटाने की नहीं, बल्कि उसे खर्च करने की है।
उन्होंने कहा कि हाईवे सेक्टर में खर्च की गति अभी भी काफी धीमी है। 

गडकरी BSE में NHAI-प्रायोजित 'राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट' की लिस्टिंग सेरेमनी में बोल रहे थे। जहां उन्होंने कहा, "हमारी समस्या यह है कि हम खर्च नहीं कर पा रहे हैं। हमारे खर्च करने की गति बहुत धीमी है।"

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इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश इतना अहम क्यों है?
गडकरी के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर में किया गया हर 1 रुपये का निवेश अर्थव्यवस्था में 3 रुपये की गतिविधि पैदा करता है।
यानी ज्यादा निवेश से देश की आर्थिक वृद्धि को तेज किया जा सकता है।

क्या कोई उदाहरण है जहां हाईवे ने बड़ा असर डाला?
हां, द्वारका एक्सप्रेसवे इसका बड़ा उदाहरण है।
जहां पहले जंगल था, वहां अब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रियल एस्टेट निवेश आ चुका है।

आगे कौन-कौन से नए प्रोजेक्ट्स आने वाले हैं?
सरकार अगले कुछ हफ्तों में पुणे के आसपास 40,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स शुरू करने जा रही है, जिनमें शामिल हैं:

  • पुणे-औरंगाबाद एक्सप्रेसवे

  • चार अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स

इसके अलावा, मुंबई-बंगलूरू एक्सप्रेसवे की योजना भी है। जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर करीब 5 घंटे रह जाएगा।

मुंबई-गोवा हाईवे में देरी क्यों हुई?
इस प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण की समस्याओं के कारण देरी हुई।
हालांकि अब 93 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अगले दो महीनों में निर्माण पूरा होने की उम्मीद है।

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क्या सड़क निर्माण की रफ्तार कम हुई है?
हां, पहले जहां 40 किमी प्रति दिन सड़क बन रही थी, अब यह घटकर 32-34 किमी प्रतिदिन रह गई है।
सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 60 किमी प्रतिदिन करना है।

टोल सिस्टम में क्या बदलाव होने वाले हैं?
सरकार साल के आखिर तक 900 टोल प्लाजा को मल्टी-लेन फ्री-फ्लो सिस्टम में बदलने की योजना बना रही है।
इसके लिए जल्द ही 105 टेंडर जारी किए जाएंगे।

क्या टेक्नोलॉजी से कोई बचत हो रही है?
हां, टोल प्लाजा पर नई तकनीक के इस्तेमाल से सरकार हर साल 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत कर रही है, क्योंकि ऑपरेशन लागत कम हो गई है।

हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश
भारत के पास हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश करने की क्षमता है, लेकिन असली चुनौती इसे तेजी से लागू करने की है।
अगर खर्च की रफ्तार बढ़ती है, तो यह देश की आर्थिक ग्रोथ को नई गति दे सकता है।

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