Driverless Bus: ये है भारत की पहली AI पावर्ड ड्राइवरलेस बस, IIT हैदराबाद ने की है तैयार; जानें इसकी खूबियां
India Driverless Bus: आईआईटी यानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमेशा नवाचार के लिए जाना जाता है। और इसी कड़ी में संस्थान के छात्रों ने भारत की पहली AI-पावर्ड ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक बस भी बनाई है। ये बस IIT हैदराबाद में दौड़ रही है और लोग इसका बढ़-चढ़कर इस्तेमाल कर रहे हैं। आइए डालते हैं इसकी खूबियों पर एक नजर...
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क्या आपने कभी ऐसी बस में सफर करने की कल्पना की है जिसमें कोई ड्राइवर न हो और वह खुद ही आपको आपकी मंजिल तक पहुंचा दे? भारत में आईआईटी यानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्रों ने इसे हकीकत बना दिया है। यह कमाल IIT हैदराबाद के TiHAN (टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब ऑन ऑटोनोमस नेविगेशन) ने किया। भारत की पहली एआई-पावर्ड (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक बस बनाई है। यह हाई-टेक बस फिलहाल IIT हैदराबाद के कैंपस में छात्रों और स्टाफ को लाने-ले जाने का काम कर रही है। आइए जानते हैं इस शानदार 'सेल्फ-ड्राइविंग' बस की खूबियों के बारे में:
मुख्य खासियतें
इस बस की खूबियों पर नजर डालें तो यह पूरी तरह से ऑटोनोमस है, यानी इसके सफर में किसी भी तरह के इंसानी दखल या ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती। यह बस न सिर्फ स्मार्ट है बल्कि एक इको-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) भी है, जो बिना कोई प्रदूषण फैलाए कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करती है। यात्रियों की सुविधा और जरूरत को ध्यान में रखते हुए इसे 6-सीटर और 14-सीटर विकल्पों में तैयार किया गया है।
इसके परफॉरमेंस के आंकड़े भी बेहद शानदार हैं। अब तक यह बस कैंपस के अंदर 10 हजार से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित उनकी मंजिल तक पहुंचा चुकी है। जब लोगों से इस हाई-टेक सफर का रिव्यू लिया गया तो लोगों का संतुष्टि रेट 90% से भी ज्यादा रहा है।
कैसे काम करती है यह बस?
बिना ड्राइवर के सड़क पर चलना बिल्कुल भी आसान नहीं है, लेकिन यह बस अपनी स्मार्ट टेक्नोलॉजी के दम पर इसे मुमकिन बनाती है। इस बस को रास्ता देखने और समझने के लिए हाई-डेफिनिशन सेंसर, कैमरे और LiDAR (लेजर तकनीक) दिए गए हैं, जो इसकी 'आंखों' की तरह काम करते हैं। इसके अलावा, रास्ते की रुकावटों से बचने के लिए भी इसमें खास तकनीक है।
अगर बस के सामने अचानक कोई इंसान, जानवर या गाड़ी आ जाती है तो इसके सेंसर उसे तुरंत पहचान लेते हैं और बस अपने आप रुक जाती है या सुरक्षित तरीके से अपना रास्ता बदल लेती है। इन सब कामों के पीछे इसका 'एआई का दिमाग' काम करता है। यह बस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का बेहतरीन इस्तेमाल करती है। इसकी मदद से यह भीड़भाड़ वाले और मुश्किल रास्तों पर भी बिल्कुल सही और सुरक्षित फैसले ले पाती है।
सुरक्षा और टेस्टिंग में नंबर-1
सुरक्षा और टेस्टिंग के मामले में भी यह बस नंबर-1 है। सुरक्षित सफर के लिए इसमें स्मार्ट ब्रेकिंग और स्पीड कंट्रोल की सुविधा दी गई है। इसके तहत 'अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल' (ACC) और 'ऑटोनोमस इमरजेंसी ब्रेकिंग' (AEB) जैसे एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स शामिल किए गए हैं। अपनी इन बेहतरीन खूबियों और शानदार परफॉरमेंस के चलते इस बस ने टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 9 हासिल कर लिया है।
इसका सीधा सा मतलब यह है कि यह तकनीक अब पूरी तरह से प्रमाणित हो चुकी है और असली दुनिया के माहौल में सफलतापूर्वक काम करने के लिए बिल्कुल तैयार है। टेस्टिंग सुविधाओं की बात करें तो IIT हैदराबाद का TiHAN भारत का पहला ऐसा टेस्टबेड बन गया है, जहां जमीन पर चलने वाले ऑटोनोमस व्हीकल और हवा में उड़ने वाले सिस्टम, दोनों की आधुनिक टेस्टिंग एक ही जगह पर एक साथ की जा सकती है।
इस बस का आगे क्या उपयोग होगा?
वर्तमान में, यह बस स्मार्ट मोबिलिटी टेस्टिंग के लिए एक 'लाइव टेस्टबेड' के रूप में काम कर रही है। इससे भारतीय सड़कों के अनुकूल ड्राइवरलेस गाड़ियों की तकनीक को और भी बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। इसके साथ ही, इस पूरी व्यवस्था का इस्तेमाल एआई और ऑटोनोमस नेविगेशन से जुड़ी अहम रिसर्च और ट्रेनिंग के लिए भी किया जा रहा है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि भविष्य में जब यह अत्याधुनिक तकनीक हमारी आम सड़कों पर उतरेगी तो यह भारत के पब्लिक ट्रांसपोर्ट और ऑटोमोबाइल सेक्टर की तस्वीर को पूरी तरह से बदल कर रख देगी।