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Hyundai i10: खरीद के एक महीने में अलग हुआ i10 कार का टायर और रिम, ह्यूंदै को दो लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश

Fri, 15 Dec 2023 10:06 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 15 Dec 2023 10:06 PM IST
सार

दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हाल ही में वाहन निर्माता कंपनी ह्यूंदै मोटर्स को 2 लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया है। एक व्यक्ति की i10 कार का पिछला टायर और रिम खरीद के एक महीने के अंदर ही ड्राइविंग के दौरान अलग हो गया, जिससे कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

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Hyundai directed to pay Rs 2 lakh compensation to vehicle owner as rear tyre rim got detached while driving
Hyundai Logo - फोटो : Social Media

विस्तार

दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हाल ही में वाहन निर्माता कंपनी ह्यूंदै मोटर्स को 2 लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया है। एक व्यक्ति की i10 कार का पिछला टायर और रिम खरीद के एक महीने के अंदर ही ड्राइविंग के दौरान अलग हो गया, जिससे कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
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उपभोक्ता अदालत की न्यायमूर्ति संगीता धींगरा सेहगल और जज सदस्य पिंकी ने 24 नवंबर को आदेश पारित करते हुए कहा, "...यह स्पष्ट है कि अपीलकर्ता/शिकायतकर्ता को 04.09.2009 को कार की डिलीवरी मिली थी। उसके बाद, 03.10.2009 को कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, क्योंकि टायर और उसका रिम शाफ्ट से अलग हो गया। जो प्रतिवादियों (ह्यूंदै) की ओर से खराब कारीगरी को दर्शाता है। यह घटना कार खरीद के पहले महीने में ही हुई थी।"
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शिकायतकर्ता पी आर मीना ने सितंबर 2009 में i10 कार खरीदी थी और घटना के समय तक उनकी कार सिर्फ 6,200 किलोमीटर ही चली थी। उन्होंने अदालत को बताया कि जब यह दुर्घटना घटी तब वह सिर्फ 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहे थे।
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ह्यूंदै ने अदालत में तर्क दिया कि i10 में कोई निर्माण दोष नहीं था और हादसा इसलिए हुआ क्योंकि मालिक गाड़ी को लापरवाही से तेज रफ्तार पर चला रहे थे।

उपभोक्ता अदालत ने हालांकि यह माना कि वाहन के खराब कामकाज के कारण शिकायतकर्ता को काफी असुविधा और परेशानी हुई है। अदालत ने कहा, "नए वाहन का कोई भी खरीदार यह नहीं सोचेगा कि वह वाहन की मरम्मत के लिए बार-बार गैरेज/सर्विस स्टेशन जाएगा, भले ही मरम्मत मामूली क्यों न हो।"


इससे पहले 2015 में, एक जिला आयोग ने भी इस मामले में ह्यूंदै को खराब कारीगरी का दोषी पाया था और मीना को 80,000 रुपये का हर्जाना दिया था। इस मुआवजे से असंतुष्ट होकर मीना ने बाद में दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
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