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Traffic Signal: कैसे हुई ट्रैफिक लाइट की शुरुआत? जानें पहली बार कहां लगी थी लाल-हरी बत्ती वाली लाइट
Sun, 02 Mar 2025 06:43 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 02 Mar 2025 06:43 PM IST
सार
जैसे-जैसे सड़कों का जाल बढ़ा और वाहनों की संख्या बढ़ने लगी, वैसे-वैसे ट्रैफिक को नियंत्रित करना मुश्किल होने लगा। ऐसे में ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए सिग्नल सिस्टम की जरूरत महसूस होने लगी।
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Traffic Signal
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सड़क पर ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक लाइट का इस्तेमाल आज हर जगह होता है। अगर ये न हों तो चौराहों पर अफरा-तफरी मच जाएगी और जाम की समस्या और बढ़ जाएगी। ट्रैफिक सिग्नल जंप करने पर भारी भरकम जुर्माना लगता है, लेकिन ट्रैफिक सिग्नल न होते तो जुर्माना भी नहीं लगता। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस ट्रैफिक लाइट को बनाया किसने और इसका इस्तेमाल सबसे पहले कहां हुआ था?
ट्रैफिक लाइट का आइडिया कैसे आया?
जैसे-जैसे सड़कों का जाल बढ़ा और वाहनों की संख्या बढ़ने लगी, वैसे-वैसे ट्रैफिक कंट्रोल करने की जरूरत महसूस होने लगी। बिना किसी सिस्टम के सड़कें बेतरतीब हो जातीं और एक्सीडेंट के मामले भी बढ़ने लगे। इस समस्या को हल करने के लिए एक ऐसे संकेत की जरूरत थी जो ट्रैफिक को अनुशासित कर सके और सड़क पर चलते लोगों को सुरक्षा दे सके।
कहां लगी थी पहली ट्रैफिक लाइट?
इतिहास के पन्नों को पलटें तो, 1868 में पहली बार लंदन में ट्रैफिक लाइट लगाने का फैसला लिया गया था। उस समय सड़कों पर ज्यादातर घोड़े, बग्गी और इक्के चलते थे, जिससे सड़कें बेहद व्यस्त रहती थीं। खासकर लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर पर हालात इतने खराब थे कि पुलिस भी ट्रैफिक मैनेज करने में असफल हो जाती थी। इसी वजह से वहां पहली ट्रैफिक लाइट लगाई गई।
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लंदन की यह ट्रैफिक लाइट गैस से चलती थी और इसमें सिर्फ रेड और ग्रीन दो रंग थे। इसका संचालन पुलिस कर्मी मैनुअली करता था, यानी उसे खुद बटन दबाकर लाइट बदलनी होती थी। धीरे-धीरे यह सिस्टम अन्य यूरोपीय देशों और अमेरिका में भी अपनाया गया।
पहली इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट कब आई?
साल 1912 में अमेरिका के यूटा राज्य में साल्ट लेक सिटी में पहली बार बिजली से चलने वाली ट्रैफिक लाइट लगाई गई। इसे पुलिस अधिकारी लेस्टर वायर ने डिजाइन किया था। उस समय इसमें केवल रेड और ग्रीन लाइट थीं। लेकिन 1920 में इसमें पीली लाइट भी जोड़ दी गई, ताकि वाहन चालकों को रेड सिग्नल से पहले रुकने की चेतावनी मिल सके।
भारत में ट्रैफिक लाइट की शुरुआत
भारत में ट्रैफिक लाइट का इतिहास करीब 80-100 साल पुराना माना जाता है। 20वीं सदी के मध्य में देश के बड़े शहरों में ट्रैफिक लाइट लगाई जाने लगीं। शुरुआत में इन्हें मैनुअली ऑपरेट किया जाता था, लेकिन समय के साथ इनमें ऑटोमेशन आ गया। आज भारत के लगभग हर शहर में ऑटोमैटिक ट्रैफिक लाइट सिस्टम मौजूद हैं, जो ट्रैफिक के अनुसार खुद लाइट बदलते हैं।
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ट्रैफिक लाइट का आइडिया कैसे आया?
जैसे-जैसे सड़कों का जाल बढ़ा और वाहनों की संख्या बढ़ने लगी, वैसे-वैसे ट्रैफिक कंट्रोल करने की जरूरत महसूस होने लगी। बिना किसी सिस्टम के सड़कें बेतरतीब हो जातीं और एक्सीडेंट के मामले भी बढ़ने लगे। इस समस्या को हल करने के लिए एक ऐसे संकेत की जरूरत थी जो ट्रैफिक को अनुशासित कर सके और सड़क पर चलते लोगों को सुरक्षा दे सके।
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कहां लगी थी पहली ट्रैफिक लाइट?
इतिहास के पन्नों को पलटें तो, 1868 में पहली बार लंदन में ट्रैफिक लाइट लगाने का फैसला लिया गया था। उस समय सड़कों पर ज्यादातर घोड़े, बग्गी और इक्के चलते थे, जिससे सड़कें बेहद व्यस्त रहती थीं। खासकर लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर पर हालात इतने खराब थे कि पुलिस भी ट्रैफिक मैनेज करने में असफल हो जाती थी। इसी वजह से वहां पहली ट्रैफिक लाइट लगाई गई।
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लंदन की यह ट्रैफिक लाइट गैस से चलती थी और इसमें सिर्फ रेड और ग्रीन दो रंग थे। इसका संचालन पुलिस कर्मी मैनुअली करता था, यानी उसे खुद बटन दबाकर लाइट बदलनी होती थी। धीरे-धीरे यह सिस्टम अन्य यूरोपीय देशों और अमेरिका में भी अपनाया गया।
पहली इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट कब आई?
साल 1912 में अमेरिका के यूटा राज्य में साल्ट लेक सिटी में पहली बार बिजली से चलने वाली ट्रैफिक लाइट लगाई गई। इसे पुलिस अधिकारी लेस्टर वायर ने डिजाइन किया था। उस समय इसमें केवल रेड और ग्रीन लाइट थीं। लेकिन 1920 में इसमें पीली लाइट भी जोड़ दी गई, ताकि वाहन चालकों को रेड सिग्नल से पहले रुकने की चेतावनी मिल सके।
भारत में ट्रैफिक लाइट की शुरुआत
भारत में ट्रैफिक लाइट का इतिहास करीब 80-100 साल पुराना माना जाता है। 20वीं सदी के मध्य में देश के बड़े शहरों में ट्रैफिक लाइट लगाई जाने लगीं। शुरुआत में इन्हें मैनुअली ऑपरेट किया जाता था, लेकिन समय के साथ इनमें ऑटोमेशन आ गया। आज भारत के लगभग हर शहर में ऑटोमैटिक ट्रैफिक लाइट सिस्टम मौजूद हैं, जो ट्रैफिक के अनुसार खुद लाइट बदलते हैं।