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Delhi HC: कार हादसे में आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा- ‘तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना हमेशा लापरवाही नहीं होता’

Fri, 04 Apr 2025 03:56 PM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Fri, 04 Apr 2025 03:56 PM IST
सार

दिल्ली हाई कोर्ट ने कार हादसे में आरोपी को राहत देते हुए यह कहकर बरी कर दिया कि तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने को हमेशा 'लापरवाही और गैरजिम्मेदारी' नहीं माना जा सकता। ट्रायल कोर्ट ने इसे लापरवाही मानते हुए 2022 में कार चालक को दोषी ठहराया था।

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High speed driving may not necessarily be rash driving until proven delhi hc grant bail to car accident accuse
कार एक्सीडेंट - फोटो : एआई

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना अपने-आप में 'लापरवाही और गैरजिम्मेदारी' नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ एक ऐसे व्यक्ति को बरी कर दिया, जिसे 2012 में दो पैदल यात्रियों की मौत का दोषी ठहराते हुए 18 महीने की सजा सुनाई गई थी।
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ट्रायल कोर्ट ने माना था दोषी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला दिल्ली का है, जहां एक कार क्लीनर ने बिना अनुमति गाड़ी चलाई जिससे हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। ट्रायल कोर्ट ने इसे लापरवाही मानते हुए 2022 में कार चालक को दोषी ठहराया था। लेकिन आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील करते हुए कहा कि घटना अचानक टायर फटने की वजह से हुई थी, ना कि लापरवाही के कारण।
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जस्टिस बैनर्जी ने जब गवाहों के बयान देखे, तो पाया कि सभी ने बस यही कहा कि गाड़ी तेज रफ्तार से चल रही थी, लेकिन किसी ने यह साफ तौर पर नहीं बताया कि ड्राइविंग लापरवाही भरी थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ तेज रफ्तार से यह तय नहीं हो जाता कि कोई व्यक्ति लापरवाह था।
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'तेज स्पीड में ड्राइविंग अपराध नहीं'
कोर्ट ने जांच एजेंसियों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने हादसे के समय, गाड़ी की हालत और टायर फटने के दावे जैसे जरूरी पहलुओं को नजरअंदाज किया।

जस्टिस बैनर्जी ने अपने फैसले में साफ किया कि किसी की मौत या चोट सिर्फ तब अपराध मानी जाएगी जब वह लापरवाही या गैर-जिम्मेदाराना रवैये की वजह से हुई हो। चूंकि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला, इसलिए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया।
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