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CAFE Norms: ईंधन दक्षता नियमों में बदलाव? अब सभी कार निर्माताओं पर समान सख्ती, छोटी कारों को छूट नहीं

Fri, 06 Feb 2026 08:15 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 06 Feb 2026 08:15 PM IST
सार

टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियों की दलीलों के बाद भारत ने आने वाले फ्यूल-एफिशिएंसी नियमों में छोटी कारों के लिए तय की गई छूट को खत्म कर दिया है। क्योंकि कंपनियों का कहना था कि इससे सिर्फ एक कंपनी को फायदा होगा। जानें क्या हैं इसके मायने।

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Govt Tightens CAFE Norms for Automakers No More Small Car Concession in fuel efficiency norms Claims Report
Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

ईंधन दक्षता मानकों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आगामी नियमों में छोटी कारों को दी जाने वाली प्रस्तावित राहत को वापस ले लिया गया है और ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए मानकों को सख्त किया गया है। यह फैसला सभी वाहन निर्माताओं पर समान दबाव बनाने और वास्तविक उत्सर्जन कटौती सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। 

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छोटी कारों को मिलने वाली छूट क्यों हटाई गई?
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, सितंबर में जारी ड्राफ्ट में 909 किलोग्राम या उससे कम वजन वाली पेट्रोल कारों के लिए नरमी का प्रस्ताव था। यह प्रावधान बड़े पैमाने पर Maruti Suzuki (मारुति सुजुकी) के पक्ष में माना जा रहा था।क्योंकि देश के छोटे कार बाजार में उसकी हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत है।

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हालांकि, Tata Motors (टाटा मोटर्स) और Mahindra & Mahindra (महिंद्रा एंड महिंद्रा ) समेत कई कंपनियों ने आपत्ति जताई कि इससे सिर्फ एक कंपनी को फायदा होगा। इसके बाद सरकार ने इस छूट को हटाने का फैसला किया। 

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एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि ताजा 41-पेज के मसौदे के अनुसार, भारत के ऊर्जा मंत्रालय ने अब उस छूट को हटा दिया है। और दूसरे मानकों को सख्त कर दिया है, जिससे सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों पर इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की बिक्री बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। 

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Govt Tightens CAFE Norms for Automakers No More Small Car Concession in fuel efficiency norms Claims Report
Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

नए ड्राफ्ट में सरकार ने क्या बदलाव किए हैं?
ताजा 41 पन्नों के ड्राफ्ट में

  • छोटी कारों के लिए दी जाने वाली विशेष राहत को खत्म किया गया है
  • वाहन के वजन के आधार पर जरूरत से ज्यादा छूट देने की व्यवस्था सीमित की गई है
  • हल्के और भारी वाहनों का उत्पादन करने वाली कंपनियों के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया है

इससे सभी ऑटो कंपनियों को वास्तविक ईंधन दक्षता सुधार पर ध्यान देना होगा।

क्या नए नियम उत्सर्जन कटौती को तेज करेंगे?
सरकारी दस्तावेज के अनुसार, नए मानकों में उत्सर्जन घटाने का रास्ता पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगा। इसे "काफी तीव्र उत्सर्जन कटौती मार्ग" बताया गया है। ताकि कागजी नहीं बल्कि वास्तविक सड़क स्थितियों में दक्षता बढ़े। 

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Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को कैसे मिलेगा बढ़ावा?
नए नियमों के तहत एक क्रेडिट सिस्टम लागू किया जाएगा:

  • ज्यादा इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहन बेचने वाली कंपनियों को अतिरिक्त क्रेडिट मिलेगा
  • कंपनियों को आपस में अपने ईंधन दक्षता प्रदर्शन को 'पूल' करने की अनुमति होगी
  • नियमों का पालन न करने पर प्रति कार 550 डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है


परिवहन क्षेत्र पर सरकार का फोकस क्यों बढ़ा?
परिवहन क्षेत्र भारत की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा है और पेट्रोलियम आयात तथा कार्बन उत्सर्जन का बड़ा कारण माना जाता है। दस्तावेज के मुताबिक, यात्री वाहन इस क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन का करीब 90 प्रतिशत योगदान करते हैं। 

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Car Pollution - फोटो : Freepik

ये नए नियम कब से लागू होंगे?
संशोधित कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) मानक

  • अप्रैल 2027 से लागू होंगे
  • इनकी अवधि पांच साल की होगी

हालांकि, सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अंतिम नियमों की अधिसूचना कब जारी होगी। 

ऑटो कंपनियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
सितंबर के पुराने ड्राफ्ट में भारी वाहनों के लिए लक्ष्य अपेक्षाकृत आसान थे, जिससे Volkswagen (फॉक्सवैगन), टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों को राहत मिलती। अब संशोधित योजना में यह संतुलन बदला गया है।

ड्राफ्ट के अनुसार, "जिन निर्माताओं के पास भारी वाहनों का बेड़ा है, उन्हें अब ज्यादा मजबूत आंतरिक दक्षता सुधार हासिल करने होंगे।" 

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Car Noise Pollution - फोटो : Freepik

उत्सर्जन लक्ष्यों का नया रोडमैप क्या है?
सरकार का लक्ष्य है कि

  • मार्च 2032 तक औसत फ्लीट उत्सर्जन 114 ग्राम/किमी से घटकर 100 ग्राम/किमी तक लाया जाए
  • अगर इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 2032 तक 11 प्रतिशत तक पहुंचती है, तो क्रेडिट के साथ यह स्तर 76 ग्राम/किमी तक भी गिर सकता है


निष्कर्ष
छोटी कारों को दी जाने वाली छूट हटाकर सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में ईंधन दक्षता और उत्सर्जन कटौती के मामले में कोई भी कंपनी रियायत की उम्मीद न करे। अब ऑटो उद्योग को इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और स्वच्छ तकनीकों में निवेश तेज करना ही होगा। 

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