केंद्र सरकार की ओर से मॉरिस गैराज मोटर्स के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच शुरू कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से बिल बनाकर, टैक्स की चोरी कर गुमराह किया है।
क्या है आरोप
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ऑटोमोबाइल सेक्टर की बड़ी कंपनी मॉरिस गैराज मोटर्स के खिलाफ केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मंत्रालय की ओर से जांच शुरू की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एमजी मोटर्स पर आरोप है कि कंपनी ने संदिग्ध कंपनियों के साथ लेन-देन किया है। टैक्स की चोरी की है और गलत तरीके से बिल बनाकर गुमराह करने की कोशिश भी की है।
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मंत्रालय ने भेजा नोटिस
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्तीय अनियमितताओं मामले में मंत्रालय की ओर से कंपनी को नोटिस भी भेजा गया है। नोटिस के मुताबिक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। कंपनी के डायरेक्टर, मैनेजिंग डायरेक्टर और ऑडिटर से मंत्रालय के अधिकारी पूछताछ कर सकते हैं। नोटिस के बाद कंपनी के अधिकारियों को दिसंबर महीने में पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
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कंपनी ने रखा अपना पक्ष
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कंपनी की ओर से कहा गया है कि सरकार की ओर से नोटिस मिलने के बाद जवाब देने की प्रक्रिया पर काम शुरू हो चुका है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि वो सरकार के साथ पूरी तरह से सहयोग करेगी। जवाब देने के लिए जो समय कंपनी को मिला है उसी समय में कंपनी की ओर से जवाब दिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी से नोटिस में पूछा गया है कि साल 2019 और 2020 में कारोबार के पहले ही साल में घाटा क्यों दिखाया गया है।
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पहले साल में फायदे पर कंपनी ने कही ये बात
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कंपनी की ओर से पहले साल में घाटे पर कहा गया है कि किसी भी ऑटोमोबाइल कंपनी के लिए कारोबार शुरू करने के बाद पहले साल में प्रॉफिट हासिल करना नामुमकिन है। कंपनी का कहना है कि भारत जैसे बेहद प्रतिस्पर्धी बाजार में भारी मात्रा में रुपया लगाकर फायदा लेने के लिए लंबा इंतजार किया गया। जिसके कारण कई कंपनियों ने संघर्ष किया और घाटा उठाया है।
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